नवंबर 1984 की सिख-विरोधी सामूहिक हिंसा
ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984): पृष्ठभूमि, सैन्य कार्रवाई और दीर्घकालीन प्रभाव
प्रधानमंत्री की हत्या के बाद 31 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच दिल्ली और कई अन्य शहरों में सिखों पर संगठित भीड़ हिंसा हुई। घरों, दुकानों और गुरुद्वारों को चिन्हित किया गया; पुरुषों को पीटकर या जिंदा जलाकर मारा गया; महिलाओं ने यौन हिंसा, विस्थापन और परिवार-विनाश झेला। पुलिस की निष्क्रियता, प्राथमिकी दर्ज न करना और कई कांग्रेस नेताओं पर भीड़ को उकसाने या सहायता देने के आरोप बाद की जांचों में सामने आए।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में 2,733 सिख मारे गए; देशभर का सरकारी कुल लगभग 3,350 के आसपास बताया जाता है। नागरिक समूहों के अनुमान अधिक हैं। न्यायमूर्ति नानावटी आयोग ने अनेक मामलों, पुलिस विफलता और राजनीतिक व्यक्तियों पर आरोपों की समीक्षा की। दशकों बाद कुछ दोषसिद्धियां हुईं, लेकिन बहुत से परिवारों के लिए न्याय विलंबित और अधूरा रहा।
इसे स्वतःस्फूर्त “दंगा” कहना अपर्याप्त है। कई इलाकों में मतदाता सूचियों या स्थानीय पहचान से घर ढूंढना, ज्वलनशील सामग्री उपलब्ध होना, एक जैसी हत्या-पद्धति और पुलिस का पीछे हटना संगठन की ओर संकेत करता है। अलग-अलग मामलों में आपराधिक उत्तरदायित्व न्यायालय को तय करना था, लेकिन व्यापक संस्थागत विफलता निर्विवाद है।
राजीव गांधी का बाद का कथन—बड़े पेड़ के गिरने पर धरती हिलने के रूपक वाला—पीड़ितों के दर्द के प्रति असंवेदनशील और हिंसा को प्राकृतिक प्रतिक्रिया जैसा बनाने वाला माना गया। चाहे आशय कुछ भी रहा हो, प्रधानमंत्री का दायित्व प्रतिशोध को अस्वीकार करना और न्याय का स्पष्ट संदेश देना था।
ब्लू स्टार और नवंबर हिंसा का संबंध
दोनों घटनाएं कारण-श्रृंखला में जुड़ी हैं, लेकिन नैतिक जिम्मेदारी अलग है। ब्लू स्टार का आदेश इंदिरा गांधी ने दिया; उनकी हत्या दो व्यक्तियों और षड्यंत्रकारियों ने की; उसके बाद हजारों निर्दोष सिखों की हत्या भीड़, आयोजकों और विफल/सहयोगी राज्य तंत्र ने की। एक अपराध दूसरे को न समझाता है, न क्षमा करता है। सामूहिक दोष का सिद्धांत ही इस त्रासदी का मूल था।
नवंबर की हिंसा ने सिख युवाओं में यह धारणा पुष्ट की कि भारत का राज्य उनकी रक्षा नहीं करेगा। उग्रवादी भर्ती के लिए यह ब्लू स्टार से भी व्यापक अनुभव बना, क्योंकि हिंसा राजधानी की गलियों में और नागरिक पड़ोसियों के सामने हुई। पंजाब संकट की अगली अवस्था समझने के लिए दोनों आघातों को साथ पढ़ना आवश्यक है।