शोधकर्ताओं और संपादकों के लिए तथ्य-जांच निर्देश
ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984): पृष्ठभूमि, सैन्य कार्रवाई और दीर्घकालीन प्रभाव
- मृत्यु की कोई संख्या बिना “आधिकारिक”, “अनुमान” या “दावा” लिखे प्रकाशित न करें।
- हरमंदिर साहिब और अकाल तख्त को अलग संरचनाओं के रूप में लिखें।
- शांतिपूर्ण अकाली आंदोलन, सिख धर्म और हथियारबंद संगठनों को एक श्रेणी न बनाएं।
- कांग्रेस द्वारा भिंडरांवाले को बढ़ावा देने की बात को व्यापक आरोप और राजनीतिक संपर्क कहें; पूर्ण नियंत्रण की साजिश सिद्ध न बताएं।
- ब्रिटिश भूमिका को फरवरी की सलाह तक सीमित लिखें, जब तक प्रत्यक्ष जून भागीदारी का नया प्रमाण न हो।
- पुस्तकालय पर निश्चित वाक्य से बचें; आग का समय और कारण विवादित हैं।
- किसी मृतक को लड़ाका तभी लिखें जब हथियार, संगठन या पुष्ट रिकॉर्ड हो; अन्यथा तटस्थ शब्द रखें।
- नवंबर 1984 को केवल “दंगा” न लिखें; सिख-विरोधी सामूहिक या संगठित हिंसा अधिक सटीक है।
- वर्तमान राजनीतिक बयान को 1984 का प्राथमिक प्रमाण न बनाएं। समकालीन दस्तावेज़, आयोग, अदालत और शोध-ग्रंथ प्राथमिकता पाएं।
- फोटो का स्थान, तारीख और स्रोत सत्यापित करें; इंटरनेट पर अलग वर्षों की तस्वीरें मिश्रित हैं।
प्रत्येक अध्याय में दावे को चार श्रेणियों में बांटना उपयोगी है: दस्तावेज़ से सिद्ध तथ्य, एक से अधिक स्वतंत्र स्रोतों से पुष्ट विवरण, पक्ष-विशिष्ट दावा और अपुष्ट अथवा विवादित अनुमान। पाठक को यह भेद भाषा में दिखाई देना चाहिए—“रिकॉर्ड बताता है”, “अनेक विवरणों के अनुसार”, “फलां पक्ष का दावा है” और “स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं” अलग वाक्यांश हैं।
संख्या प्रकाशित करते समय इकाई, समय और गणना-पद्धति लिखी जाए। उदाहरणतः परिसर में मृत, पूरे पंजाब में मृत, केवल नागरिक, संयुक्त नागरिक–लड़ाके अथवा सेना के हताहत अलग श्रेणियां हैं। चित्र और वीडियो के लिए मूल तारीख, स्थान और प्रथम प्रकाशक जांचना आवश्यक है; बाद की बरसी अथवा दूसरे ऑपरेशन की तस्वीर को जून 1984 बताना गंभीर त्रुटि होगी।
सुधार-नीति भी शोध का हिस्सा होनी चाहिए। नया दस्तावेज़ मिलने पर पुराने वाक्य को चुपचाप बदलने के बजाय संशोधन तारीख और परिवर्तन का संक्षिप्त कारण दर्ज किया जाए। इससे पाठक को भरोसा मिलता है कि वेबसाइट निष्कर्ष बचाने के लिए नहीं, सार्वजनिक अभिलेख बेहतर करने के लिए काम कर रही है।