omkarchaudhary.comJOURNALIST · AUTHOR · RESEARCHEROCN Research Desk
दस्तावेज़ · तथ्य · विश्लेषण
OCN Research Dossier–015 · अध्याय 13

1 से 4 जून—घेरा और आरंभिक गोलीबारी

ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984): पृष्ठभूमि, सैन्य कार्रवाई और दीर्घकालीन प्रभाव

Omkar Chaudhary / OCN Research Deskविस्तृत शोध संस्करण · 3 अगस्त 2026

1 जून को सुरक्षा बलों और परिसर के भीतर हथियारबंद लोगों के बीच गोलीबारी हुई। इसके कारण और किसने पहले गोली चलाई, इस पर विवरण अलग हैं। तत्कालीन अमृतसर प्रशासन से जुड़े विवरण 1 जून को 11 मौतों का उल्लेख करते हैं। इमारतों पर गोली के निशान पड़े और तनाव खुली लड़ाई में बदल गया।

2 जून तक सेना ने अमृतसर और पंजाब के प्रमुख हिस्सों में स्थिति संभाल ली। सीमाएं और परिवहन मार्ग नियंत्रित किए गए; कर्फ्यू लगाया गया और संचार काटा गया। प्रधानमंत्री का प्रसारण इसी दिन हुआ। 3 जून को गुरु अर्जन देव के शहीदी गुरुपर्व के कारण परिसर में सामान्य से अधिक तीर्थयात्री थे। पूर्ण कर्फ्यू ने बाहर निकलने की क्षमता सीमित कर दी। रेल, बस और फोन सेवाओं पर रोक ने परिवारों को यह जानने से भी वंचित किया कि उनके सदस्य कहां हैं।

सेना ने लाउडस्पीकर से बाहर आने की अपील करने का दावा किया। कुछ लोग निकले, पर संख्या अपेक्षाकृत कम थी। प्रत्यक्षदर्शी विवरणों में घोषणाओं की श्रव्यता, समय और सुरक्षित मार्ग की स्पष्टता पर सवाल हैं। भीतर मौजूद लोगों को भय था कि बाहर आने पर गिरफ्तारी होगी; हथियारबंद लोग भी निकासी रोक सकते थे। कर्फ्यू में अचानक मिली सीमित अवधि वृद्ध, बच्चे और दूर के कमरों में फंसे लोगों के लिए पर्याप्त नहीं थी।

4 जून को गोलीबारी तेज हुई। सेना ने परिसर के आसपास की ऊंची इमारतों और मोर्चों को निष्क्रिय करने का प्रयास किया। पानी और बिजली की आपूर्ति बाधित हुई। जून की गर्मी में हजारों लोगों के लिए पानी की कमी गंभीर मानवीय संकट थी। चिकित्सा सहायता सीमित थी; घायलों को निकालना कठिन था। मुख्य हमला अभी शुरू नहीं हुआ था, पर नागरिक सुरक्षा की संभावना तेजी से घट रही थी।

निकासी पर निर्णायक प्रश्न

सरकार का तर्क था कि उग्रवादियों ने तीर्थयात्रियों को ढाल की तरह रोका। कई विवरण इसे पुष्ट करते हैं कि हथियारबंद नियंत्रण और भय ने स्वतंत्र निकासी बाधित की। फिर भी गैर-लड़ाकों की सुरक्षा की अंतिम जिम्मेदारी राज्य से समाप्त नहीं होती। पर्याप्त चेतावनी, कई चरणों में सुरक्षित गलियारा, धार्मिक प्रतिनिधियों की सार्वजनिक गारंटी और गिरफ्तार व्यक्ति तथा साधारण तीर्थयात्री में प्रारंभिक छंटाई की योजना अपेक्षित थी। उपलब्ध साक्ष्य बताते हैं कि यह व्यवस्था कार्रवाई के पैमाने के अनुपात में अपर्याप्त रही।