सैन्य प्रदर्शन—साहस, भूल और सीमाएं
ऑपरेशन ब्लू स्टार (1984): पृष्ठभूमि, सैन्य कार्रवाई और दीर्घकालीन प्रभाव
ऑपरेशन में भारतीय सैनिकों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लड़ाई लड़ी। उन्हें अपने ही नागरिकों के बीच, धार्मिक मर्यादा बचाते हुए, प्रशिक्षित और दृढ़ हथियारबंद प्रतिरोध का सामना करना पड़ा। कई अधिकारी तथा जवान अग्रिम मोर्चे पर मारे गए। व्यक्तिगत वीरता का सम्मान करना समग्र निर्णय की आलोचना से विरोधाभासी नहीं है। राजनीतिक नेतृत्व ने परिस्थिति बनाई; मैदानी सैनिकों ने दिए गए आदेश में प्राण जोखिम में डाले।
इसी तरह प्रतिरोध की सामरिक क्षमता स्वीकार करना उसके राजनीतिक उद्देश्य या नागरिक हत्याओं का समर्थन नहीं है। शाबेग सिंह द्वारा तैयार रक्षात्मक स्थान प्रभावी थे; लड़ाके अंत तक डटे। किंतु पवित्र स्थल को युद्धक्षेत्र बनाना और तीर्थयात्रियों के बीच भारी हथियार रखना धार्मिक तथा मानवीय उत्तरदायित्व का उल्लंघन था। वीरता और नैतिक वैधता एक ही चीज नहीं होतीं।
प्रमुख सैन्य कमियां
- रक्षकों की संख्या, हथियार और मोर्चों का कम अनुमान।
- बहुत कम समय में योजना और इकाइयों का समन्वय।
- रात में संकरे प्रवेश से हमला, जिससे रक्षकों को लाभ मिला।
- नागरिकों की संख्या और स्थान की अपर्याप्त जानकारी।
- प्रारंभिक कमांडो लक्ष्य विफल होने पर भारी बल की ओर तेज संक्रमण।
- ऑपरेशन के बाद सूचना और साक्ष्य प्रबंधन की कमजोरी।
प्रमुख सैन्य उपलब्धियां
- अत्यंत जटिल परिसर पर अपेक्षाकृत सीमित समय में नियंत्रण।
- हरमंदिर साहिब के मुख्य गर्भस्थल को संरचनात्मक विनाश से बचाना, हालांकि गोली के निशान और क्षति हुई।
- संगठित हथियारबंद नेतृत्व और मोर्चों को निष्क्रिय करना।
- भारी हताहतों के बावजूद कमान और इकाई अनुशासन बनाए रखना।
समग्र मूल्यांकन में सामरिक सफलता और रणनीतिक नुकसान दोनों दर्ज करने होंगे। सेना ने सौंपा गया तत्काल लक्ष्य प्राप्त किया, पर कार्रवाई से उत्पन्न राजनीतिक अलगाव ने सुरक्षा समस्या को समाप्त नहीं किया। यही अंतर “लड़ाई जीतना” और “संघर्ष हल करना” के बीच है।
अभियान की समीक्षा में जवानों के साहस और योजना की आलोचना को परस्पर विरोधी नहीं माना जाना चाहिए। सैनिकों और अधिकारियों ने अत्यंत सीमित दृश्यता, धार्मिक संरचना को बचाने के निर्देश, नागरिकों की उपस्थिति और मजबूत फायर के बीच कार्रवाई की। कई इकाइयों को ऐसे परिसर में लड़ना पड़ा जिसका व्यावहारिक भूगोल उनके लिए नया था। व्यक्तिगत वीरता उन परिस्थितियों की गंभीरता बताती है, पर वह राजनीतिक समय-चयन या अपर्याप्त खुफिया तैयारी पर प्रश्न को समाप्त नहीं करती।
सैन्य सफलता का संकीर्ण पैमाना लक्ष्य पर कब्जा और प्रमुख हथियारबंद नेतृत्व का अंत था। रणनीतिक पैमाना अलग है: क्या कार्रवाई ने दीर्घकालीन हिंसा घटाई, राज्य की वैधता बढ़ाई और समुदाय का विश्वास सुरक्षित रखा? इस व्यापक कसौटी पर परिणाम मिश्रित रहा। परिसर पर नियंत्रण मिला, लेकिन ध्वस्त अकाल तख्त की छवि, नागरिक मौतों का विवाद और सूचना-बंदी ने उग्रवादी प्रचार को नया आधार दिया। इसी अंतर को सामरिक विजय और रणनीतिक परिणाम के बीच भेद कहा जाता है।