राष्ट्रीय आपातकाल
“आंतरिक अशांति” के आधार पर लागू संवैधानिक असाधारणता।
25 जून 1975 की रात से 21 मार्च 1977 तक—सत्ता के केंद्रीकरण, नागरिक स्वतंत्रताओं के निलंबन, बिना मुकदमे की बंदी, प्रेस सेंसरशिप, न्यायपालिका की परीक्षा, जबरन नसबंदी, प्रतिरोध और जनता के ऐतिहासिक जनादेश का विस्तृत, संतुलित और स्रोत-सचेत अध्ययन।
“आंतरिक अशांति” के आधार पर लागू संवैधानिक असाधारणता।
संसद, न्यायपालिका, प्रेस, पुलिस, प्रशासन और नागरिक जीवन का परीक्षण।
सत्ता परिवर्तन, शाह आयोग और भविष्य की संवैधानिक सुरक्षा दीवार।
आपातकाल केवल एक सरकार अथवा एक नेता की कहानी नहीं है। यह उस प्रक्रिया का अध्ययन है जिसमें संवैधानिक प्रावधान, संस्थागत आज्ञाकारिता, भय, प्रचार और प्रशासनिक लक्ष्य मिलकर लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को सीमित कर सकते हैं।
हर भाग स्वतंत्र रूप से पढ़ा जा सकता है। कालक्रम, संवैधानिक प्रश्न, दमन, प्रतिरोध, समर्थक पक्ष, संस्थागत विफलता और दीर्घकालीन प्रभाव—सभी को अलग अध्याय में रखा गया है।
तथ्य और व्याख्या के बीच स्पष्ट अंतर रखते हुए अध्ययन का निष्कर्ष तथा सरकारी, न्यायिक, संवैधानिक और स्वतंत्र स्रोत अलग भागों में उपलब्ध हैं।
दमन के आरोप और सरकारी पक्ष—दोनों दर्ज · संख्या के साथ गणना-पद्धति · न्यायिक निर्णय और राजनीतिक व्याख्या अलग · मिथक बनाम तथ्य · प्राथमिक तथा आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता।