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OCN Research Dossier–011 · अध्याय 06

स्थानीय सहयोग: OGW और हाइब्रिड आतंकी

स्थानीय सहायता, नए मॉड्यूल, जांच-साक्ष्य और कानूनी सीमाएं

Omkar Chaudhary / OCN Research Deskप्रथम संस्करण · 1 अगस्त 2026

स्थानीय सहायता, नए मॉड्यूल, जांच-साक्ष्य और कानूनी सीमाएं

सीमा पार से आने वाला आतंकवादी स्थानीय सहायता के बिना लंबे समय तक सक्रिय नहीं रह सकता। उसे भोजन, आश्रय, वाहन, हथियार, संचार, स्थानीय भूगोल और संभावित लक्ष्य की जानकारी चाहिए। आतंकवादी संगठनों को यह सहायता देने वाले नेटवर्क के लिए सुरक्षा एजेंसियां सामान्यतः “ओवरग्राउंड वर्कर”—OGW—शब्द का प्रयोग करती हैं।

हाल के वर्षों में “हाइब्रिड आतंकी” शब्द भी सामने आया है। इससे ऐसे व्यक्ति का संकेत मिलता है जो किसी घोषित आतंकवादी की तरह लगातार हथियार के साथ भूमिगत नहीं रहता, लेकिन संगठन के निर्देश पर हत्या, ग्रेनेड हमला या हथियार पहुंचाने जैसा आतंकी कृत्य करके फिर सामान्य जीवन में लौट जाता है।

दोनों शब्द सुरक्षा विमर्श में महत्वपूर्ण हैं, लेकिन एक मूल कानूनी सावधानी आवश्यक है—OGW और हाइब्रिड आतंकी भारतीय दंड कानून में अपने-आप में अलग अपराधों के नाम नहीं हैं। किसी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी इस आधार पर तय होती है कि उसने वास्तव में क्या किया, उसे किस बात की जानकारी थी, उसकी मंशा क्या थी और उसके विरुद्ध कौन-से साक्ष्य उपलब्ध हैं।

1. OGW किसे कहा जाता है?

ओवरग्राउंड वर्कर ऐसा व्यक्ति हो सकता है जो स्वयं नियमित रूप से हथियार लेकर भूमिगत न रहता हो, लेकिन आतंकवादी या प्रतिबंधित संगठन को जानबूझकर सहायता देता हो।

  • सुरक्षा एजेंसियों द्वारा OGW से जोड़ी जाने वाली प्रमुख गतिविधियां हैं
  • आतंकवादी को घर या दूसरे स्थान पर आश्रय देना
  • भोजन, कपड़े और दवाइयां पहुंचाना
  • वाहन उपलब्ध कराना
  • हथियार एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना
  • ड्रोन से गिराई गई खेप उठाना
  • धन या हवाला की रकम पहुंचाना
  • मोबाइल फोन, सिम कार्ड या डिजिटल खाता उपलब्ध कराना
  • सुरक्षाबलों की तैनाती की जानकारी देना
  • किसी व्यक्ति या संस्थान की रेकी करना
  • नए युवाओं को संगठन से जोड़ना
  • आतंकवादी प्रचार और धमकी प्रसारित करना

हमले के बाद हथियार या हमलावर को छिपाना।

हर OGW ये सभी काम करे, यह जरूरी नहीं। किसी को केवल हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि दूसरा व्यक्ति आश्रय या धन की व्यवस्था करता है। नेटवर्क को छोटे हिस्सों में बांटने से एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद भी पूरी श्रृंखला सुरक्षित रह सकती है।

2. सक्रिय आतंकवादी, OGW और हाइब्रिड आतंकी में अंतर

व्यवहार में ये सीमाएं हमेशा स्पष्ट नहीं रहतीं। कोई OGW धीरे-धीरे हाइब्रिड हमलावर बन सकता है। कोई हाइब्रिड आतंकी हमला करने के बाद हथियार सहित भूमिगत होकर सक्रिय आतंकवादी बन सकता है। इसी तरह किसी आतंकवादी को भोजन देने वाला व्यक्ति सक्रिय समर्थक भी हो सकता है और बंदूक की धमकी से मजबूर नागरिक भी।

3. पारंपरिक OGW नेटवर्क कैसे काम करता है?

पारंपरिक आतंकवादी ढांचे में सक्रिय आतंकवादी जंगल, पहाड़ या सुरक्षित मकानों में छिपे रहते थे। आसपास मौजूद OGW उन्हें दैनिक आवश्यकताएं उपलब्ध कराते थे।

  • इस नेटवर्क में कई प्रकार की भूमिकाएं हो सकती हैं

आश्रय देने वाला

वह आतंकवादियों को घर, दुकान, बाग, खेत, पशुशाला या जंगल के किसी अस्थायी ठिकाने में छिपाता है। कभी आतंकवादी थोड़े समय के लिए रुकते हैं और कभी सुरक्षित मकान को लगातार उपयोग करते हैं।

कूरियर

कूरियर संदेश, नकदी, दवा, सिम कार्ड, हथियार या गोला-बारूद पहुंचाता है। उसे संगठन के शीर्ष नेतृत्व या अंतिम हमले की पूरी जानकारी होना आवश्यक नहीं।

परिवहन उपलब्ध कराने वाला

वाहन चालक आतंकवादी को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक ले जा सकता है। निजी कार, टैक्सी, दोपहिया या मालवाहक वाहन का उपयोग किया जा सकता है।

हथियार संरक्षक

हथियार आतंकवादी के पास लगातार रखने के बजाय किसी स्थानीय व्यक्ति के घर, खेत या दूसरे गुप्त स्थान पर रखा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर उसे हमलावर को दिया जाता है और घटना के बाद वापस छिपा दिया जाता है।

रेकी करने वाला

स्थानीय व्यक्ति लक्ष्य की पहचान, दिनचर्या, सुरक्षा और आवागमन की जानकारी जुटाता है। टारगेट किलिंग में उसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।

वित्तीय संपर्क

वह हवाला, नकदी, बैंक खाते, डिजिटल भुगतान अथवा मादक पदार्थों से प्राप्त रकम को संगठन या स्थानीय मॉड्यूल तक पहुंचाता है।

भर्ती और प्रचारक

वह सोशल मीडिया सामग्री, वीडियो, धार्मिक या राजनीतिक प्रचार के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करता है और उन्हें संगठन के हैंडलर से जोड़ता है।

4. हाइब्रिड आतंकी का नया मॉडल

हाइब्रिड आतंकी पारंपरिक भूमिगत आतंकवादी से अलग होता है। वह सामान्य नागरिक के रूप में समाज में मौजूद रहता है। उसका नाम आतंकवादियों की सार्वजनिक सूची में नहीं होता और संभव है कि उसके विरुद्ध पहले कोई आपराधिक मामला भी दर्ज न हो।

  • उसे एक सीमित कार्य दिया जा सकता है
  • पिस्तौल लेकर किसी व्यक्ति को गोली मारना
  • सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड फेंकना
  • हथियार किसी दूसरे व्यक्ति तक पहुंचाना
  • निर्धारित स्थान पर IED रखना
  • किसी लक्ष्य की तस्वीर और लोकेशन भेजना

हमले के बाद इस्तेमाल किया गया हथियार छिपाना।

कार्य पूरा होने के बाद वह अपनी नौकरी, दुकान, पढ़ाई या पारिवारिक जीवन में लौट सकता है। इसी कारण उसे पहचानना और निगरानी में रखना पारंपरिक आतंकवादी की तुलना में कठिन होता है।

“हाइब्रिड” शब्द यह भी बताता है कि व्यक्ति आतंकवादी और सामान्य नागरिक—दोनों तरह का व्यवहार प्रदर्शित कर रहा है। लेकिन कानून में ऐसी मध्यवर्ती पहचान नहीं है। यदि उसने जानबूझकर हत्या या आतंकवादी कृत्य किया है तो उसके अपराध का निर्धारण उसी कृत्य और उपलब्ध साक्ष्य से होगा।

5. हाइब्रिड मॉडल की आवश्यकता क्यों पड़ी?

सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई के कारण सक्रिय आतंकवादियों का भूमिगत रहना कठिन हुआ। उनके फोटो, मोबाइल संपर्क और संगठनात्मक पहचान पुलिस के पास उपलब्ध रहने लगे। मुठभेड़ों में पुराने कमांडरों के मारे जाने से स्थानीय कैडर भी कमजोर हुआ।

  • ऐसी स्थिति में आतंकवादी संगठनों को हाइब्रिड मॉडल से कई लाभ मिले

पहचान से बचाव: हमलावर का नाम आतंकवादियों की सूची में नहीं होता।

सामान्य सामाजिक आवरण: वह छात्र, कर्मचारी, दुकानदार, मजदूर या चालक के रूप में दिखाई दे सकता है।

छोटा प्रशिक्षण: पिस्तौल से नजदीक जाकर हमला करने के लिए लंबे सैन्य प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं।

कम लागत: एक पिस्तौल और सीमित गोलियों से हत्या कराई जा सकती है।

स्थानीय जानकारी: हमलावर लक्ष्य और क्षेत्र से पहले से परिचित हो सकता है।

संगठन से दूरी: गिरफ्तारी की स्थिति में शीर्ष नेतृत्व से प्रत्यक्ष संबंध सिद्ध करना कठिन हो सकता है।

भय का व्यापक प्रभाव: एक सामान्य दिखने वाले व्यक्ति द्वारा हत्या किए जाने से समाज में यह आशंका पैदा होती है कि हमलावर कहीं से भी सामने आ सकता है।

गृह मंत्रालय द्वारा 2024 में प्रकाशित UAPA ट्रिब्यूनल के एक आदेश में सरकारी पक्ष ने आरोप लगाया कि युवाओं को हाइब्रिड आतंकियों के रूप में टारगेट किलिंग के लिए उकसाया गया और सोशल मीडिया से आतंकवादी गतिविधियों का महिमामंडन किया गया। UAPA ट्रिब्यूनल का संबंधित आदेश

6. टारगेट किलिंग में हाइब्रिड आतंकी की भूमिका

टारगेट किलिंग के लिए बड़े आतंकवादी दस्ते की आवश्यकता नहीं होती। एक स्थानीय हमलावर और उसके दो-तीन सहयोगी पर्याप्त हो सकते हैं।

  • एक संभावित मॉड्यूल में भूमिकाएं अलग हो सकती हैं

हमलावर को कभी नाम से विशेष लक्ष्य दिया जा सकता है। दूसरी स्थिति में उसे व्यापक श्रेणी—जैसे पुलिसकर्मी, राजनीतिक कार्यकर्ता, गैर-स्थानीय मजदूर या अल्पसंख्यक कर्मचारी—में से सुविधाजनक लक्ष्य चुनने का निर्देश दिया जा सकता है।

संगठन का उद्देश्य केवल व्यक्ति की हत्या नहीं, उसके पूरे समुदाय या पेशे में भय उत्पन्न करना होता है।

7. OGW से हाइब्रिड आतंकी बनने की प्रक्रिया

  • किसी व्यक्ति को सीधे हत्या का आदेश देने के बजाय उसे धीरे-धीरे नेटवर्क में शामिल किया जा सकता है
  • सोशल मीडिया पर संगठन की सामग्री देखना या साझा करना
  • प्रचारक अथवा स्थानीय संपर्क से बातचीत
  • छोटे संदेश या सामान पहुंचाना
  • सुरक्षित मोबाइल या सिम कार्ड उपलब्ध कराना
  • हथियार की खेप उठाना
  • लक्ष्य की फोटो या लोकेशन भेजना
  • पिस्तौल चलाने का सीमित प्रशिक्षण
  • पहला हमला

घटना के बाद संगठन में पूर्णकालिक शामिल होना अथवा सामान्य जीवन में लौटना।

यह क्रम प्रत्येक मामले में समान हो, यह आवश्यक नहीं। कुछ व्यक्ति वैचारिक रूप से पहले से कट्टर हो सकते हैं, जबकि अन्य धन, दबाव या निजी प्रतिशोध के कारण जुड़ते हैं।

8. महिलाओं और नाबालिगों का उपयोग

आतंकवादी नेटवर्क ऐसे व्यक्तियों का उपयोग करने का प्रयास कर सकता है जिन पर सामान्यतः कम संदेह किया जाता है। महिलाओं, किशोरों, बुजुर्गों या सामान्य पेशे से जुड़े लोगों को संदेश, नकदी, सिम कार्ड या छोटी खेप पहुंचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने के आरोप समय-समय पर सामने आए हैं।

लेकिन उम्र, लिंग या किसी आतंकवादी से रिश्तेदारी के आधार पर दोष नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से नाबालिगों के मामलों में कट्टरता, दबाव, शोषण और बाल न्याय कानून के प्रावधानों की अलग जांच आवश्यक है।

9. OGW बनने के संभावित कारण

वैचारिक प्रतिबद्धता

कुछ व्यक्ति संगठन की अलगाववादी या धार्मिक विचारधारा से सहमत होकर स्वेच्छा से सहायता कर सकते हैं।

भय और धमकी

आतंकवादी किसी परिवार को जान से मारने की धमकी देकर आश्रय, भोजन या वाहन की मांग कर सकते हैं। आतंकवादी प्रभाव वाले दूरस्थ क्षेत्र में इनकार करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

आर्थिक लालच

कूरियर, हथियार पहुंचाने, ड्रोन की खेप उठाने या सुरक्षित ठिकाना देने के बदले भुगतान किया जा सकता है।

रिश्तेदारी और सामाजिक दबाव

परिवार या समुदाय का सदस्य आतंकवादी संगठन में शामिल हो तो उसके रिश्तेदार भावनात्मक अथवा सामाजिक दबाव में मदद कर सकते हैं।

आपराधिक नेटवर्क

हथियार, मादक पदार्थ, नकली दस्तावेज और हवाला का काम करने वाले अपराधी बिना वैचारिक सहमति के भी आतंकवादी नेटवर्क के लिए काम कर सकते हैं।

निजी शिकायत या प्रतिशोध

व्यक्तिगत विवाद को आतंकवादी संगठन की सहायता से हिंसक रूप दिया जा सकता है। संगठन ऐसी निजी शिकायत को भर्ती के अवसर के रूप में इस्तेमाल कर सकता है।

10. डिजिटल OGW: बिना भौतिक संपर्क का सहयोग

स्थानीय सहायता अब केवल भोजन और आश्रय तक सीमित नहीं है। डिजिटल माध्यम से भी आतंकवादी संगठन को मदद दी जा सकती है:

  • विदेशी हैंडलर के लिए भारतीय सिम या WhatsApp खाता सक्रिय करना
  • बैंक खाते अथवा डिजिटल वॉलेट उपलब्ध कराना
  • लक्ष्य की तस्वीर और लाइव लोकेशन भेजना
  • धमकी वाले पोस्टर तथा वीडियो तैयार करना
  • युवाओं को बंद ऑनलाइन समूहों में जोड़ना
  • संगठन की जिम्मेदारी का दावा प्रसारित करना
  • पुलिस कार्रवाई की तत्काल जानकारी देना

फर्जी समाचार और भड़काऊ सामग्री फैलाना।

दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष आए एक मामले में NIA ने आरोप लगाया था कि एक कथित OGW ने पाकिस्तान स्थित लश्कर हैंडलर के लिए धोखे से प्राप्त सिम और बैंक खातों की व्यवस्था की। अदालत में प्रस्तुत आरोपों के अनुसार इन खातों का इस्तेमाल संचार और धन की परतें बनाने के लिए किया गया था। यह उदाहरण बताता है कि आधुनिक OGW हथियार छुए बिना भी नेटवर्क की महत्वपूर्ण तकनीकी या वित्तीय कड़ी बन सकता है। दिल्ली उच्च न्यायालय का संबंधित आदेश

11. कानूनी स्थिति: OGW होना नहीं, उसका कृत्य अपराध है

  • UAPA में “OGW” नाम से कोई स्वतंत्र अपराध परिभाषित नहीं है। उसके विरुद्ध कार्रवाई वास्तविक कृत्य के अनुसार की जा सकती है
  • धारा 18: आतंकवादी कृत्य की साजिश, प्रयास या सहायता
  • धारा 18B: आतंकवादी कृत्य के लिए भर्ती
  • धारा 19: आतंकवादी को जानबूझकर आश्रय देना या छिपाना
  • धारा 20: आतंकवादी गिरोह या संगठन का सदस्य होना
  • धारा 38: आतंकवादी संगठन से जुड़ना और उसकी गतिविधियों को आगे बढ़ाने की मंशा
  • धारा 39: आतंकवादी संगठन को जानबूझकर समर्थन देना

धारा 40: आतंकवादी संगठन के लिए धन जुटाना या उपलब्ध कराना।

इसके अतिरिक्त हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, हथियार, विस्फोटक, मादक पदार्थ, जालसाजी और डिजिटल अपराध से संबंधित दूसरे कानून भी लागू हो सकते हैं। UAPA का आधिकारिक पाठ

सिर्फ “OGW सूची” में नाम होना न्यायिक दोषसिद्धि नहीं है। अभियोजन को संबंधित अपराध के आवश्यक तत्व—जानकारी, मंशा, सहायता और संगठन से संबंध—साक्ष्य द्वारा स्थापित करने होते हैं।

12. जब सहायता दबाव में दी गई हो

किसी आतंकवादी को भोजन या रास्ता बताने वाला हर व्यक्ति स्वेच्छा से सहयोगी नहीं होता। बंदूक की धमकी, परिवार की सुरक्षा या तत्काल भय के कारण सहायता देने की स्थिति संभव है।

  • जांच में निम्न प्रश्न महत्वपूर्ण होते हैं

क्या आतंकवादी अचानक घर में घुसा या पहले से संपर्क था?

सहायता एक बार दी गई या लगातार?

बदले में पैसा मिला?

पुलिस को सूचना देने का वास्तविक अवसर था?

आरोपी ने बाद में भी संगठन से संपर्क बनाए रखा?

हथियार, संचार या धन से जुड़ा अन्य साक्ष्य मिला?

आरोपी का व्यवहार भयग्रस्त व्यक्ति जैसा था या सक्रिय आयोजक जैसा?

दिल्ली उच्च न्यायालय में 2025 के एक मामले में आरोपी ने दावा किया कि आतंकवादी को भोजन और स्थान की जानकारी दबाव में दी गई थी। अदालत के सामने अभियोजन और बचाव—दोनों ने मंशा, संपर्क और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों पर अलग-अलग तर्क रखे। यह दर्शाता है कि “आश्रय” के आरोप में भी परिस्थितियों और ज्ञान की जांच अनिवार्य है। दिल्ली उच्च न्यायालय का संबंधित मामला

13. केवल संपर्क या परिचय पर्याप्त नहीं

आतंकवादी प्रभावित समाज में किसी संदिग्ध व्यक्ति से परिचय, रिश्तेदारी या आकस्मिक मुलाकात संभव है। केवल इसी आधार पर UAPA के गंभीर आरोप सिद्ध नहीं होते।

मई 2022 के एक निर्णय में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने कहा कि किसी कथित आतंकवादी संगठन के सदस्य के साथ दिखाई देना, बिना किसी अतिरिक्त कृत्य या गतिविधियों को आगे बढ़ाने की मंशा के, UAPA लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं। अदालत को समर्थन, धन या लॉजिस्टिक सहायता का प्राथमिक साक्ष्य नहीं मिला था। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय का निर्णय

  • यह न्यायिक सिद्धांत दो कारणों से महत्वपूर्ण है
  • वास्तविक OGW नेटवर्क के विरुद्ध ठोस और अदालत में टिकने योग्य साक्ष्य जुटाने की जरूरत

सामान्य सामाजिक संपर्क को आतंकवादी भागीदारी मान लेने से निर्दोष व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा।

14. जांच में प्रमुख साक्ष्य

  • किसी कथित OGW या हाइब्रिड आतंकी की भूमिका स्थापित करने के लिए निम्न प्रमाण महत्वपूर्ण हो सकते हैं
  • CCTV और प्रत्यक्षदर्शी
  • कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन
  • फोन से प्राप्त चैट, फोटो और नक्शे
  • हथियार तथा बैलिस्टिक रिपोर्ट
  • बैंक खाते, हवाला और डिजिटल भुगतान
  • ड्रोन अथवा पेलोड की फॉरेंसिक जांच
  • सुरक्षित ठिकाने से हुई बरामदगी
  • लक्ष्य की रेकी से जुड़ी तस्वीरें
  • सह-अभियुक्त का बयान—जहां कानून के अनुसार स्वीकार्य हो
  • स्वतंत्र गवाह और परिस्थितिजन्य प्रमाण

घटना से पहले और बाद का व्यवहार।

केवल पुलिस डोजियर, गुप्त सूचना अथवा सामान्य श्रेणीकरण अंतिम दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं होना चाहिए। खुफिया सूचना कार्रवाई शुरू करा सकती है, लेकिन अदालत में स्वीकार्य साक्ष्य अलग से प्रस्तुत करना पड़ता है।

15. आतंकवाद-विरोधी रणनीति

केंद्र सरकार ने जुलाई 2024 में संसद को बताया कि उसकी रणनीति केवल सक्रिय आतंकवादियों के विरुद्ध अभियान तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे “टेरर इकोसिस्टम” और समर्थन संरचना को नष्ट करने की है। इसमें आतंक वित्त पर कार्रवाई, संपत्ति जब्त करना, रणनीतिक समर्थकों की पहचान, घुसपैठ रोकना, खुफिया सूचनाओं का वास्तविक समय में आदान-प्रदान और दिन-रात क्षेत्रीय निगरानी शामिल है। गृह मंत्रालय का संसदीय उत्तर, 30 जुलाई 2024

  • OGW और हाइब्रिड नेटवर्क से निपटने के लिए निम्न उपाय महत्वपूर्ण हैं
  • हथियारों की बैलिस्टिक और डिजिटल ट्रैकिंग
  • सीमा पार हैंडलरों से संचार की पहचान
  • संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच
  • ड्रोन ड्रॉप प्राप्त करने वाले स्थानीय व्यक्ति तक पहुंचना
  • गांव और शहर स्तर पर मानवीय खुफिया तंत्र
  • स्थानीय पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के डेटाबेस का समन्वय
  • कट्टरता की शुरुआती पहचान और परामर्श
  • दबाव में सहायता करने वाले और सक्रिय षड्यंत्रकारी में अंतर
  • गवाह सुरक्षा

16. व्यापक लेबलिंग का खतरा

OGW नेटवर्क वास्तविक सुरक्षा चुनौती है, लेकिन इस शब्द का अत्यधिक व्यापक उपयोग उलटा प्रभाव डाल सकता है। यदि राजनीतिक असहमति, सोशल मीडिया पोस्ट, रिश्तेदारी या आकस्मिक संपर्क को पर्याप्त जांच के बिना आतंकवादी सहायता मान लिया जाए तो:

  • निर्दोष लोगों के अधिकार प्रभावित होंगे
  • वास्तविक आतंकवादी नेटवर्क और सामान्य नागरिक के बीच अंतर धुंधला होगा
  • पुलिस जांच की विश्वसनीयता कमजोर हो सकती है
  • अदालत में मामले टिकना कठिन होगा
  • स्थानीय समुदाय से मिलने वाली खुफिया सहायता घट सकती है

आतंकवादी संगठन असंतोष और अन्याय की भावना का प्रचार में उपयोग कर सकते हैं।

इसलिए सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता को परस्पर विरोधी मानना उचित नहीं। सटीक जांच, फॉरेंसिक प्रमाण और न्यायिक प्रक्रिया आतंकवाद-विरोधी अभियान को अधिक प्रभावी तथा विश्वसनीय बनाते हैं।

निष्कर्ष

OGW और हाइब्रिड आतंकी आधुनिक आतंकवाद की दो अलग लेकिन परस्पर जुड़ी कड़ियां हैं। OGW नेटवर्क आतंकवादी को आश्रय, हथियार, धन, संचार और लक्ष्य की जानकारी देता है। हाइब्रिड आतंकी इसी सहायता के आधार पर स्वयं हमला करता है और फिर सामान्य समाज में लौटने का प्रयास करता है।

टारगेट किलिंग के संदर्भ में यह मॉडल विशेष रूप से खतरनाक है क्योंकि इसमें बड़े आतंकवादी दस्ते, भारी हथियार या लंबे समय तक भूमिगत रहने की आवश्यकता नहीं होती। सीमा पार का हैंडलर, स्थानीय रेकीकर्ता, एक पिस्तौल और सामान्य पहचान वाला हमलावर—इतनी सीमित संरचना से भी पूरे समुदाय में भय फैलाया जा सकता है।