मार्क्सवाद से सर्वोदय
अमेरिकी प्रवास, समाजवादी राजनीति और विनोबा भावे के भूदान आंदोलन ने उनकी विचारयात्रा को लगातार नया रूप दिया।
सिताबदियारा के विद्यार्थी से अमेरिका के मजदूर–विद्यार्थी, कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संगठनकर्ता, 1942 के भूमिगत क्रांतिकारी, भूदान–सर्वोदय के पथिक और 1974–77 में लोकतंत्र की निर्णायक आवाज बनने तक—जयप्रकाश नारायण के जीवन, विचार, संघर्ष, उपलब्धियों और अंतर्विरोधों का समेकित अध्ययन।
अमेरिकी प्रवास, समाजवादी राजनीति और विनोबा भावे के भूदान आंदोलन ने उनकी विचारयात्रा को लगातार नया रूप दिया।
बिहार छात्र आंदोलन को उन्होंने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वैचारिक, शैक्षिक और नैतिक परिवर्तन के व्यापक कार्यक्रम से जोड़ा।
आपातकाल के बाद बिखरे विपक्ष को एक मंच पर लाने में उनकी नैतिक और राजनीतिक भूमिका निर्णायक बनी।
यह अध्ययन जयप्रकाश नारायण को किसी एक दल या विचारधारा में सीमित नहीं करता। उनके मार्क्सवादी प्रभाव, लोकतांत्रिक समाजवाद, गांधी–विनोबा से निकटता, संपूर्ण क्रांति, आपातकाल-विरोध और जनता पार्टी से निराशा—सभी चरणों को उनके मूल प्रश्न के साथ पढ़ता है: सत्ता जनता के प्रति उत्तरदायी कैसे बने?
जीवन, विचार और राजनीतिक संघर्ष को कालक्रम तथा विषयगत संदर्भ के साथ रखा गया है। दोहराई गई सामग्री हटाकर सभी मौलिक तथ्य, तर्क और मूल्यांकन सुरक्षित रखे गए हैं।
व्यक्ति और पद अलग · नैतिक नेतृत्व और दलगत राजनीति अलग · जन आंदोलन और संवैधानिक सत्ता-परिवर्तन अलग · लोकतंत्र में चुनाव तथा चुनावों के बीच नागरिक जवाबदेही—दोनों का समेकित मूल्यांकन।