361 से 283 सीटें
कांग्रेस केंद्र में रही, लेकिन उसकी सीटें 78 कम हुईं और एकछत्र प्रभुत्व में पहली बड़ी दरार पड़ी।
1967 के आम चुनाव में कांग्रेस की पहली बड़ी चुनावी गिरावट से लेकर संयुक्त विधायक दल सरकारों, “आया राम, गया राम”, बार-बार बदलते मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों के विवादित निर्णयों, 1969 के कांग्रेस विभाजन और 1974 तक अनुच्छेद 356 के प्रयोग तक—भारतीय बहुदलीय राजनीति के कठिन संक्रमणकाल का विस्तृत अध्ययन।
कांग्रेस केंद्र में रही, लेकिन उसकी सीटें 78 कम हुईं और एकछत्र प्रभुत्व में पहली बड़ी दरार पड़ी।
मार्च 1967 से फरवरी 1968 के बीच विधायकों के पक्ष परिवर्तन ने सरकारों का गणित बदल दिया।
स्पष्ट बहुमत के संकट, गठबंधन-विघटन और आंदोलनों के बीच राष्ट्रपति शासन का बार-बार सहारा लिया गया।
दल-बदल की संख्या को अलग-अलग विधायकों की संख्या नहीं माना गया है; एक विधायक के कई पक्ष-परिवर्तन कई घटनाएँ बन सकते हैं। 1969 के कांग्रेस विभाजन को सामान्य व्यक्तिगत दल-बदल से अलग राजनीतिक घटना के रूप में पढ़ा गया है।
चुनावी परिवर्तन से संवैधानिक परिणाम तक सामग्री को विषयानुसार रखा गया है। टूट चुकी तालिकाओं को पुनर्निर्मित किया गया है और मुख्य तथ्य, उदाहरण तथा स्रोत सुरक्षित रखे गए हैं।
चुनावी पराजय और सत्ता से निष्कासन अलग · दल-बदल की घटना और अलग विधायक अलग · राज्यपाल का संवैधानिक विवेक और राजनीतिक विवाद अलग · राष्ट्रपति शासन की औपचारिक उद्घोषणा तथा उसके राजनीतिक कारण अलग।