18,000 फीट तक संघर्ष
द्रास, मश्कोह, काकसर और बटालिक की ऊँचाइयों पर कठिन रात्रि-आक्रमण और निकट युद्ध।
लाहौर घोषणा के बीच हुई पाकिस्तानी घुसपैठ, दुर्गम ऊँचाइयों पर भारतीय प्रतिआक्रमण, चार परमवीर चक्रों की वीरता, अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और युद्ध के बाद हुए रक्षा सुधारों का क्रमबद्ध तथा संतुलित दस्तावेज़।
करगिल एक साथ खुफिया विफलता, सैनिक साहस, सीमित युद्ध, परमाणु प्रतिरोध, वैश्विक कूटनीति और रक्षा सुधार का अध्ययन है। यह डॉसियर विजय का सम्मान करते हुए आरंभिक कमियों, पाकिस्तानी गणना, मानवीय लागत और संस्थागत सीख—सभी को प्रमाणों के साथ रखता है।
द्रास, मश्कोह, काकसर और बटालिक की ऊँचाइयों पर कठिन रात्रि-आक्रमण और निकट युद्ध।
चार परमवीर चक्र, नौ महावीर चक्र और 55 वीर चक्र—असाधारण साहस की आधिकारिक पहचान।
खुफिया समन्वय, तकनीकी निगरानी, संयुक्तता और उच्च रक्षा प्रबंधन में संस्थागत परिवर्तन।
उपलब्ध मूल मसौदे की पुनरावृत्तियाँ हटाकर 19 विषयों को सात क्रमबद्ध, मोबाइल-अनुकूल भागों में समेकित किया गया है। प्रत्येक भाग में स्पष्ट ऐतिहासिक आकलन और स्रोत-रजिस्टर है।
संक्षिप्त समयरेखा युद्ध के राजनीतिक, सैन्य और सुधारात्मक चरणों को एक साथ रखती है। विस्तृत तिथियाँ अंतिम भाग में उपलब्ध हैं।
भारत–पाक संवाद की नई आशा; उसी पृष्ठभूमि में ऊँचाइयों पर पाकिस्तानी घुसपैठ आगे बढ़ी।
स्थानीय सूचना, गश्ती संपर्क और अनेक उपक्षेत्रों में भारी हथियारों सहित कब्जे की पुष्टि।
भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा के भारतीय भाग में सैन्य कार्रवाई शुरू की।
द्रास क्षेत्र में भारतीय अभियान का पहला बड़ा निर्णायक मोड़।
13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स ने प्रभुत्वशाली ऊँचाई पर कब्जा किया।
भारतीय ध्वज के साथ सैन्य और मनोवैज्ञानिक विजय; उसी दिन वॉशिंगटन वार्ता।
सैन्य सहमति और ऑपरेशन विजय की सफलता की राजनीतिक घोषणा।
सेना ने घुसपैठियों की बेदखली घोषित की; तिथि करगिल विजय दिवस बनी।
करगिल समीक्षा समिति तथा मंत्रियों के समूह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुधारों का एजेंडा बनाया।
भारत ने कब्जाई ऊँचाइयाँ पुनः प्राप्त कर नियंत्रण रेखा की स्थिति बहाल की, विश्व समर्थन अर्जित किया और पाकिस्तान की रणनीतिक गणना विफल की। साथ ही युद्ध ने चेताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा में सफलता के लिए शांति काल की निगरानी, संयुक्त खुफिया, आधुनिक उपकरण और स्पष्ट राजनीतिक–सैन्य समन्वय अनिवार्य हैं।
सैनिक बलिदान का सम्मान · तथ्य और दावे का पृथक्करण · स्रोत-मतभेदों का उल्लेख · कालक्रम को प्राथमिकता · विजय और विफलता का संतुलित मूल्यांकन।
अध्यायों की संरचना करगिल समीक्षा समिति, भारत सरकार के आधिकारिक अभिलेखों और रक्षा-अध्ययन संस्थानों के सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है।