अमेरिका — धारा 230, मंच की कानूनी सुरक्षा और जवाबदेही की बदलती बहस
भाग–5 : विश्व का तुलनात्मक अध्ययन
यदि भारत में सोशल मीडिया मंचों की कानूनी सुरक्षा समझने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 महत्वपूर्ण है, तो अमेरिका में उसकी तुलना सामान्यतः धारा 230 से की जाती है। अमेरिकी इंटरनेट के विकास में इस प्रावधान की भूमिका इतनी महत्वपूर्ण रही है कि इसे कई बार आधुनिक इंटरनेट की आधारभूत कानूनी व्यवस्थाओं में गिना जाता है। इसका मूल सिद्धांत है—
यही सिद्धांत फेसबुक, यूट्यूब, X, Reddit, ऑनलाइन मंचों, चर्चा समूहों और अनेक उपयोगकर्ता-आधारित सेवाओं के लिए व्यापक कानूनी सुरक्षा का आधार बना। धारा 230 आज भी अमेरिकी कानून का हिस्सा है, हालांकि 2025–26 में इसे सीमित करने, बदलने अथवा भविष्य में समाप्त करने तक के कई द्विदलीय प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस के सामने आए हैं। (GovInfo)
13.1 धारा 230 क्यों बनाया गया?
1990 के दशक के शुरुआती इंटरनेट में एक महत्वपूर्ण कानूनी समस्या सामने आई। यदि कोई ऑनलाइन सेवा अपने मंच पर आपत्तिजनक सामग्री हटाने की कोशिश करती थी, तो यह तर्क दिया जा सकता था कि वह सामग्री का संपादकीय नियंत्रण कर रही है और इसलिए उसे प्रकाशक की तरह जिम्मेदार माना जाना चाहिए। इससे एक विचित्र स्थिति पैदा हो सकती थी— जो मंच कोई सामग्री नियंत्रण नहीं करता, वह अपेक्षाकृत सुरक्षित रहे; लेकिन जो मंच हानिकारक सामग्री हटाने की कोशिश करे, उसी पर अधिक जिम्मेदारी आ जाए। अमेरिकी कांग्रेस इस परिणाम से बचना चाहती थी। इसी पृष्ठभूमि में 1996 के दूरसंचार कानून के अंतर्गत धारा 230 जोड़ा गया। कानून ने इंटरनेट के विकास, विविध राजनीतिक संवाद और आपत्तिजनक सामग्री को स्वेच्छा से नियंत्रित करने की क्षमता को सार्वजनिक नीति के उद्देश्यों में शामिल किया। (GovInfo) इसलिए धारा 230 का मूल उद्देश्य दो बातों को एक साथ प्रोत्साहित करना था— खुला इंटरनेट और स्वैच्छिक सामग्री नियंत्रण।
13.2 कानून की सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति
धारा 230(c)(1) का केंद्रीय सिद्धांत यह है कि किसी संवादात्मक ऑनलाइन सेवा के प्रदाता या उपयोगकर्ता को किसी दूसरे सूचना-प्रदाता द्वारा उपलब्ध कराई गई सामग्री का प्रकाशक या वक्ता नहीं माना जाएगा। (GovInfo) सरल उदाहरण से समझें। यदि कोई व्यक्ति सोशल मीडिया पर किसी दूसरे व्यक्ति के बारे में मानहानिकारक पोस्ट लिखता है तो मूल सामग्री का निर्माता वह उपयोगकर्ता है। सामान्य परिस्थितियों में केवल पोस्ट को मंच उपलब्ध कराने के कारण सोशल मीडिया कंपनी को उसी प्रकार प्रकाशक नहीं माना जाएगा जैसे किसी अखबार को उसके स्वयं प्रकाशित लेख के लिए माना जाता है। यही अमेरिकी सुरक्षित आश्रय व्यवस्था का केंद्रीय आधार है।
13.3 दूसरा हिस्सा — “Good Samaritan” सुरक्षा
धारा 230(c)(2) का उद्देश्य ऑनलाइन सेवाओं को सद्भावना में आपत्तिजनक सामग्री सीमित करने की स्वतंत्रता देना भी है। इसका विचार था कि मंच यदि अश्लील, हिंसक, उत्पीड़क या अन्य आपत्तिजनक सामग्री नियंत्रित करता है तो केवल इस कारण उसके खिलाफ दायित्व न पैदा हो। यहीं धारा 230 का एक महत्वपूर्ण विरोधाभास दिखाई देता है। कानून मंच को एक ओर कहता है—
दूसरी ओर वह उसे अपनी सेवा में सामग्री नियंत्रित करने की काफी स्वतंत्रता भी देता है। इसी दोहरी व्यवस्था ने बाद में अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद पैदा किया।
13.4 धारा 230 पूर्ण कानूनी छूट नहीं है
अक्सर सार्वजनिक बहस में कहा जाता है कि धारा 230 तकनीकी कंपनियों को “हर प्रकार के मुकदमे से पूर्ण सुरक्षा” देता है। यह सटीक नहीं है। कानून में स्वयं महत्वपूर्ण अपवाद हैं। उदाहरण के लिए संघीय आपराधिक कानून के प्रवर्तन पर धारा 230 रोक नहीं लगाता। बौद्धिक संपदा कानूनों के लिए अलग व्यवस्था है। इलेक्ट्रॉनिक संचार गोपनीयता संबंधी कानूनों को भी वह निष्प्रभावी नहीं करता। 2018 में यौन तस्करी से संबंधित मामलों में भी कानून को सीमित किया गया। अमेरिकी कानून के वर्तमान पाठ में ये अपवाद स्पष्ट रूप से मौजूद हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात—
विवाद मुख्यतः वहां उत्पन्न होता है जहां नुकसान तीसरे पक्ष की सामग्री और मंच की अपनी तकनीकी संरचना—दोनों से जुड़ा हो।
13.5 इंटरनेट के विकास में इसकी भूमिका
धारा 230 समर्थकों का प्रमुख तर्क यह है कि यदि प्रत्येक उपयोगकर्ता की पोस्ट के लिए ऑनलाइन मंच को पहले से प्रकाशक माना जाता तो उपयोगकर्ता-निर्मित सामग्री वाला इंटरनेट इस पैमाने पर विकसित करना अत्यंत कठिन होता। मंचों को या तो प्रत्येक सामग्री प्रकाशन से पहले जांचनी पड़ती, या भारी मुकदमेबाजी जोखिम उठाना पड़ता। इससे छोटे मंचों के लिए प्रवेश बाधा विशेष रूप से बढ़ सकती थी। यह तर्क आज भी धारा 230 के समर्थन की सबसे मजबूत दलीलों में से एक है—
13.6 फिर समस्या कहां पैदा हुई?
1996 का इंटरनेट और 2026 का इंटरनेट एक जैसे नहीं हैं। उस समय ऑनलाइन सेवाओं को उभरती हुई तकनीकी कंपनियों के रूप में देखा जाता था। आज कुछ मंच दुनिया की सबसे प्रभावशाली कंपनियों में हैं और उनकी अनुशंसा प्रणालियां अरबों उपयोगकर्ताओं के सामने सामग्री का क्रम निर्धारित कर सकती हैं। यहीं आलोचक प्रश्न उठाते हैं— यदि मंच केवल सामग्री संग्रहित करता है तो उसकी सुरक्षा समझ में आती है। लेकिन यदि उसका अपना एल्गोरिद्म— सामग्री चुनता है, उसे सुझाता है, उसकी पहुंच बढ़ाता है, और उपयोगकर्ता को किसी खास दिशा में लगातार सामग्री देता है— तो क्या उस तकनीकी डिजाइन के लिए भी वही सुरक्षा मिलनी चाहिए? 2025 में अमेरिकी सीनेट में प्रस्तुत Algorithm Accountability Act ने इसी प्रश्न को सीधे उठाया। प्रस्तावित विधेयक कुछ सामाजिक मंचों के अनुशंसा-आधारित एल्गोरिद्म से होने वाली अनुमानित शारीरिक क्षति या मृत्यु के संदर्भ में देखभाल का दायित्व स्थापित करने और धारा 230 की सुरक्षा सीमित करने की दिशा में था। अगस्त 2026 तक यह प्रस्ताव कानून नहीं बना था। (GovInfo)
13.7 Gonzalez v. Google — दुनिया की निगाहें सर्वोच्च न्यायालय पर
2023 में Gonzalez v. Google मामला अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। मामला ISIS से संबंधित सामग्री और यूट्यूब की अनुशंसा प्रणाली से जुड़ा था। प्रश्नों में यह मुद्दा भी था कि तीसरे पक्ष की सामग्री की एल्गोरिद्मिक सिफारिश पर धारा 230 की सुरक्षा किस सीमा तक लागू होती है। बहुत लोगों को उम्मीद थी कि सर्वोच्च न्यायालय पहली बार स्पष्ट करेगा कि—
लेकिन न्यायालय ने इस बड़े प्रश्न का निर्णायक उत्तर नहीं दिया। उसने पाया कि संबंधित दावे दूसरे कानूनी आधारों पर ही अत्यंत कमजोर थे और धारा 230 के व्यापक प्रश्न पर निर्णय देने से परहेज किया। इसलिए अमेरिकी कानून का सबसे बड़ा आधुनिक प्रश्न खुला रह गया।
13.8 ट्विटर v. Taamneh — केवल मंच उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं
उसी दिन सर्वोच्च न्यायालय ने ट्विटर v. Taamneh में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। आतंकवाद-विरोधी कानून के तहत दावा था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों ने ISIS को अपने मंच इस्तेमाल करने देकर आतंकवादी गतिविधियों में सहायता की। सर्वोच्च न्यायालय ने सर्वसम्मति से कहा कि केवल यह आरोप पर्याप्त नहीं कि मंच ने आतंकवादी सामग्री हटाने के लिए “पर्याप्त” काम नहीं किया। दायित्व के लिए जानबूझकर और पर्याप्त सहायता का आवश्यक संबंध दिखाना होगा। न्यायालय ने पाया कि संबंधित हमले से मंचों का संबंध बहुत दूर का था। (Supreme Court) इस निर्णय का व्यापक संकेत था—
13.9 लेकिन न्यायालय के भीतर भी असंतोष
धारा 230 की व्यापक न्यायिक व्याख्या पर अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के भीतर भी सवाल उठे हैं। 2024 के Doe v. Snap मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मामला सुनने से इनकार किया, लेकिन न्यायमूर्ति क्लेरेंस थॉमस ने अलग मत में चिंता व्यक्त की कि निचली अदालतों ने धारा 230 की अपेक्षाकृत संकीर्ण भाषा को कई परिस्थितियों में मंचों की अपनी गतिविधियों तक विस्तारित कर दिया है। उन्होंने इस प्रश्न को न्यायालय द्वारा भविष्य में स्पष्ट किए जाने योग्य माना कि— क्या मंच अपनी स्वयं की कथित गलत डिजाइन या आचरण के लिए भी धारा 230 के पीछे छिप सकता है? (Supreme Court) यह बहस अब तीसरे पक्ष की पोस्ट से आगे बढ़कर उत्पाद डिजाइन और एल्गोरिद्मिक संरचना तक पहुंच चुकी है।
13.10 Moody v. NetChoice — मंच स्वयं भी अभिव्यक्ति का अधिकार रखता है
अमेरिकी व्यवस्था का दूसरा पहलू और भी दिलचस्प है। Florida और Texas ने बड़े सोशल मीडिया मंचों की सामग्री हटाने और प्राथमिकता निर्धारण की शक्ति सीमित करने वाले कानून बनाए। तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियां कुछ राजनीतिक विचारों को दबा रही हैं। मामला Moody v. NetChoice के रूप में सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा। जुलाई 2024 के निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालतों के फैसले प्रक्रिया संबंधी कारणों से वापस भेजे, लेकिन साथ ही महत्वपूर्ण संवैधानिक मार्गदर्शन दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया मंच जब तीसरे पक्ष की सामग्री चुनते, हटाते और व्यवस्थित करते हैं तो ऐसी गतिविधि कुछ परिस्थितियों में प्रथम संशोधन द्वारा संरक्षित संपादकीय अभिव्यक्ति हो सकती है। (Supreme Court) यह अमेरिकी मॉडल का बड़ा विरोधाभास है—
13.11 अमेरिका की बहस राजनीतिक रूप से उलटी दिशाओं से आती है
धारा 230 की आलोचना अमेरिका में केवल एक राजनीतिक विचारधारा से नहीं होती। एक पक्ष का आरोप है कि बड़ी तकनीकी कंपनियां हानिकारक सामग्री, बच्चों को नुकसान, नशीले पदार्थों, शोषण और एल्गोरिद्मिक हानि के लिए पर्याप्त जिम्मेदारी नहीं उठातीं। दूसरा पक्ष शिकायत करता है कि वही कंपनियां राजनीतिक विचारों को हटाने और कुछ दृष्टिकोणों को दबाने के लिए अत्यधिक सामग्री नियंत्रण करती हैं। इसलिए विचित्र स्थिति बनती है— कुछ लोग धारा 230 बदलना चाहते हैं क्योंकि मंच बहुत कम सामग्री हटाते हैं। दूसरे उसे बदलना चाहते हैं क्योंकि मंच बहुत अधिक सामग्री हटाते हैं। यही कारण है कि अमेरिकी कांग्रेस में व्यापक सहमति बनाना कठिन रहा है।
13.12 2025–26 में समाप्त करने तक का द्विदलीय प्रस्ताव
दिसंबर 2025 में अमेरिकी सीनेट में Dick Durbin और Lindsey Graham सहित दोनों प्रमुख दलों के कई सीनेटरों ने धारा 230 की सुरक्षा को भविष्य की निश्चित तारीख पर समाप्त करने वाला विधेयक पेश किया। इसका उद्देश्य कांग्रेस और तकनीकी उद्योग पर दबाव बनाना था कि वे समाप्ति की तारीख आने से पहले नया जवाबदेही ढांचा तैयार करें। प्रस्ताव के समर्थकों ने बच्चों की सुरक्षा, अवैध नशीले पदार्थों और अन्य मंचीय हानियों को प्रमुख कारण बताया। (Senate Judiciary) महत्वपूर्ण तथ्य यह है—
धारा 230 अभी समाप्त नहीं हुआ है। लेकिन प्रस्ताव का द्विदलीय स्वरूप बताता है कि अमेरिकी राजनीति में पुराने ढांचे को जस का तस बनाए रखने पर असंतोष काफी गहरा हो चुका है।
13.13 तीस वर्ष बाद कांग्रेस में फिर मूल प्रश्न
मार्च 2026 में अमेरिकी सीनेट की वाणिज्य समिति ने धारा 230 के तीस वर्ष पूरे होने पर विशेष सुनवाई आयोजित की—“Liability or Deniability? मंच Power as धारा 230 Turns 30.” सुनवाई में मंचीय शक्ति, ऑनलाइन अभिव्यक्ति, कानूनी जवाबदेही और अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन की सीमाओं पर चर्चा की गई। दिलचस्प रूप से समिति के अध्यक्ष Ted Cruz ने यह भी चेताया कि धारा 230 को केवल समाप्त कर देना उलटा अधिक सेंसरशिप पैदा कर सकता है, क्योंकि कंपनियां मुकदमों से बचने के लिए अधिक सामग्री हटाने लग सकती हैं। (Commerce Senate) यही सुरक्षित आश्रय बहस की मूल कठिनाई है।
13.14 भारत और अमेरिका में महत्वपूर्ण अंतर
भारत की धारा 79 और अमेरिकी धारा 230 में समानता है कि दोनों तीसरे पक्ष की सामग्री के लिए मध्यस्थ को सीमित कानूनी सुरक्षा देते हैं। लेकिन दोनों व्यवस्थाएं समान नहीं हैं। भारत में सुरक्षित आश्रय को उचित सावधानी, सूचना प्रौद्योगिकी नियमों और सरकारी/न्यायिक आदेशों के अनुपालन से अधिक स्पष्ट रूप से जोड़ा गया है। अमेरिका में धारा 230 ने ऐतिहासिक रूप से मंचों को अधिक व्यापक स्वतंत्रता दी और इसके साथ प्रथम संशोधन की अत्यंत मजबूत संवैधानिक सुरक्षा भी जुड़ती है। इसलिए अमेरिका में सरकार यदि यह तय करना चाहे कि सोशल मीडिया कंपनी कौन-सी वैध राजनीतिक सामग्री रखे या हटाए, तो मामला केवल धारा 230 का नहीं रहता—
Moody v. NetChoice इसी अंतर को स्पष्ट करता है। (Supreme Court)
13.15 अमेरिकी मॉडल की सबसे बड़ी उपलब्धि
इस मॉडल की सबसे बड़ी उपलब्धि है—
छोटे मंच, ब्लॉग, चर्चा समूह, सामाजिक नेटवर्क और उपयोगकर्ता-निर्मित सेवाएं हर पोस्ट के लिए प्रकाशक जैसा जोखिम लिए बिना विकसित हो सकीं। इसका लाभ केवल बड़ी कंपनियों को नहीं मिला। सामान्य नागरिक को भी अपनी बात सीधे दुनिया तक पहुंचाने का माध्यम मिला। इसी कारण धारा 230 के पूर्ण उन्मूलन का विरोध करने वाले विशेषज्ञ चेताते हैं कि सबसे बड़ी कंपनियां भारी मुकदमेबाजी का खर्च सह सकती हैं, लेकिन छोटे मंच शायद नहीं।
13.16 अमेरिकी मॉडल की सबसे बड़ी कमजोरी
दूसरी ओर आलोचना है कि 1996 में उभरती हुई इंटरनेट सेवाओं के लिए बनाया गया सुरक्षा-कवच आज दुनिया की सबसे शक्तिशाली एल्गोरिद्मिक कंपनियों पर भी लगभग उसी बुनियादी संरचना में लागू है। आज मंच केवल संदेश पहुंचाता नहीं है। वह— उपयोगकर्ता का व्यवहार मापता है, सामग्री की सिफारिश करता है, उसकी पहुंच बढ़ाता है, विज्ञापन जोड़ता है, और मंच की संरचना इस तरह तैयार करता है कि उपयोगकर्ता अधिक समय तक उससे जुड़ा रहे। इसलिए बहस तीसरे पक्ष की सामग्री से आगे बढ़कर यह हो चुकी है—
2025 का Algorithm Accountability Act इसी नए चरण का उदाहरण है। (GovInfo)
13.17 अमेरिका किस दिशा में जा सकता है?
2026 तक अमेरिकी बहस से कम से कम तीन संभावित रास्ते दिखाई देते हैं। पहला—धारा 230 को मूल रूप में बनाए रखना, लेकिन बच्चों, तस्करी, कृत्रिम अंतरंग सामग्री और विशिष्ट अपराधों के लिए अलग-अलग कानून बनाना। दूसरा—धारा 230 को बनाए रखते हुए कुछ क्षेत्रों में सुरक्षा सीमित करना, विशेषकर एल्गोरिद्मिक डिजाइन और मंच की अपनी गतिविधियों के संबंध में।
2025–26 में अमेरिकी कांग्रेस में तीनों प्रकार की सोच के तत्व दिखाई देते हैं। (GovInfo) अभी यह कहना संभव नहीं कि इनमें से कौन-सा मॉडल अंततः कानून बनेगा।
13.18 निष्कर्ष
धारा 230 ने उस इंटरनेट को जन्म लेने में सहायता की जिसमें प्रत्येक उपयोगकर्ता प्रकाशक बन सकता है। उसका मूल सिद्धांत आज भी तार्किक है—
लेकिन तीस वर्षों में इंटरनेट बदल चुका है। 1996 में प्रश्न था—
2026 में प्रश्न है—
क्या उसने केवल उसे रखा? या उसे चुना? सुझाया? लाखों लोगों तक पहुंचाया? उससे लाभ कमाया? और क्या उसके अपने तकनीकी डिजाइन ने किसी गंभीर नुकसान में भूमिका निभाई? इसीलिए अमेरिका की वर्तमान बहस सुरक्षित आश्रय समाप्त करने या बचाने की साधारण लड़ाई नहीं है। असल प्रश्न है—
और अमेरिका का अनुभव यह भी बताता है कि अत्यधिक मंचीय शक्ति का उत्तर आवश्यक रूप से अत्यधिक सरकारी शक्ति नहीं हो सकता। First Amendment राज्य को भी सीमा में रखता है। इस दृष्टि से अमेरिकी मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण सबक शायद यही है—
अमेरिका ने इंटरनेट के विकास में बाजार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्राथमिकता दी। यूरोपीय संघ ने इससे अलग रास्ता चुना—उसने विशाल डिजिटल मंचों पर सीधे प्रणालीगत जिम्मेदारियां और जोखिम नियंत्रण लागू किया।