यूरोपीय संघ — डिजिटल सेवा अधिनियम, डिजिटल बाजार अधिनियम और मंच जवाबदेही का नया मॉडल
भाग–5 : विश्व का तुलनात्मक अध्ययन
अमेरिका ने इंटरनेट के विकास के शुरुआती दौर में मुख्यतः इस प्रश्न का उत्तर खोजा था कि ऑनलाइन मंच को उपयोगकर्ता द्वारा प्रकाशित सामग्री के लिए कितनी कानूनी सुरक्षा दी जाए। इसी से धारा 230 जैसा मॉडल विकसित हुआ। यूरोपीय संघ ने लगभग ढाई दशक बाद समस्या को दूसरे कोण से देखा। उसके सामने प्रश्न था—
यूरोप का उत्तर था—नहीं। इसी सोच से दो महत्वपूर्ण कानून सामने आए— डिजिटल सेवा अधिनियम (DSA) — डिजिटल सेवाओं और मंचों की सामाजिक तथा सामग्री संबंधी जवाबदेही के लिए। डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA) — अत्यधिक शक्तिशाली डिजिटल कंपनियों की बाजार शक्ति और प्रतिस्पर्धा संबंधी व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए। दोनों को साथ पढ़ने पर यूरोपीय मॉडल की मूल सोच स्पष्ट होती है—
यही यूरोपीय व्यवस्था को अमेरिकी मॉडल से अलग बनाता है। यूरोपीय आयोग स्वयं स्पष्ट करता है कि DSA मुख्यतः ऑनलाइन मंचों की जवाबदेही, गैरकानूनी सामग्री और प्रणालीगत जोखिमों से संबंधित है, जबकि DMA उन बड़े मंचों पर केंद्रित है जो डिजिटल बाजार में “Gatekeeper—प्रवेश-द्वार नियंत्रक” की भूमिका निभाते हैं। (Digital Strategy)
14.1 यूरोप को नए कानूनों की आवश्यकता क्यों पड़ी?
2000 के दशक की शुरुआत में इंटरनेट की बड़ी कंपनियां अपेक्षाकृत नई थीं। लेकिन अगले दो दशकों में स्थिति बदल गई। कुछ कंपनियों के पास एक साथ— सोशल मीडिया, विज्ञापन, ऐप वितरण, खोज, ऑनलाइन बाजार, मोबाइल परिचालन प्रणाली, क्लाउड सेवाएं और संदेश सेवाएं— आ गईं। इससे दो अलग समस्याएं पैदा हुईं। पहली समस्या थी—
क्या गैरकानूनी सामग्री फैल रही है? क्या बच्चों को नुकसान हो रहा है? क्या एल्गोरिद्म दुष्प्रचार या हानिकारक सामग्री बढ़ा रहे हैं? क्या उपयोगकर्ता जानता है कि उसे कोई विज्ञापन क्यों दिखाया जा रहा है? दूसरी समस्या थी—
क्या कोई विशाल कंपनी अपने ही उत्पादों को प्रतिस्पर्धियों से अधिक प्राथमिकता दे रही है? क्या ऐप निर्माता उसके नियम स्वीकार करने के लिए मजबूर हैं? क्या उपयोगकर्ता आसानी से दूसरी सेवा चुन सकता है? पहले प्रश्न का उत्तर DSA है। दूसरे का DMA।
14.2 डिजिटल सेवा अधिनियम क्या है?
डिजिटल सेवा अधिनियम अर्थात डिजिटल सेवा अधिनियम यूरोपीय संघ का Regulation (EU) 2022/2065 है। यह अक्टूबर 2022 में अपनाया गया और 17 फरवरी 2024 से इसका सामान्य अनुप्रयोग शुरू हुआ। बहुत बड़े ऑनलाइन मंचों और खोज इंजनों पर इसकी कुछ जिम्मेदारियां उससे पहले ही लागू हो चुकी थीं। (Eur-Lex) इसका मूल उद्देश्य इंटरनेट से हर हानिकारक विचार हटाना नहीं है। इसकी संरचना का केंद्रीय सिद्धांत है—
इसलिए छोटी वेबसाइट और अरबों उपयोगकर्ताओं वाले मंच पर समान दायित्व नहीं लगाया गया।
14.3 जिम्मेदारी का स्तरीय मॉडल
DSA की महत्वपूर्ण विशेषता है कि वह सभी डिजिटल सेवाओं को एक ही श्रेणी में नहीं रखता। व्यवस्था मोटे तौर पर अलग-अलग स्तरों पर दायित्व बढ़ाती है— मध्यस्थ सेवाएं, होस्टिंग सेवाएं, ऑनलाइन मंच, और सबसे ऊपर अत्यंत बड़े ऑनलाइन मंच तथा खोज इंजन। यूरोपीय संघ में जिन ऑनलाइन मंचों या खोज इंजनों के औसत मासिक उपयोगकर्ताओं की संख्या 4.5 करोड़ या उससे अधिक होती है, उन्हें आयोग Very Large Online मंच (VLOP) अथवा Very Large Online Search Engine (VLOSE) घोषित कर सकता है। (Digital Strategy) यह सीमा यूरोपीय संघ की आबादी के लगभग दस प्रतिशत के बराबर रखी गई थी। विचार साफ है—
14.4 गैरकानूनी सामग्री पर DSA का मॉडल
DSA का अर्थ यह नहीं है कि मंच हर उपयोगकर्ता की पोस्ट प्रकाशित होने से पहले जांचे। ऐसी व्यवस्था खुले इंटरनेट को लगभग असंभव बना सकती थी। इसके बजाय कानून मंचों से ऐसी प्रणाली की अपेक्षा करता है जिसमें गैरकानूनी सामग्री की सूचना दी जा सके और उचित परिस्थितियों में उस पर कार्रवाई हो। यहां यूरोप ने एक महत्वपूर्ण संतुलन बनाने की कोशिश की—
इसीलिए DSA में उपयोगकर्ता अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी महत्वपूर्ण तत्व हैं। यूरोपीय आयोग इसे गैरकानूनी सामग्री और सामाजिक जोखिमों के विरुद्ध जवाबदेही के साथ मौलिक अधिकारों की सुरक्षा वाला ढांचा बताता है। (Digital Strategy)
14.5 सामग्री हटाई तो कारण बताना होगा
यह यूरोपीय मॉडल की महत्वपूर्ण विशेषता है। यदि किसी उपयोगकर्ता की सामग्री हटाई जाती है, उसका खाता सीमित किया जाता है या उसके विरुद्ध कुछ सामग्री-नियंत्रण कार्रवाई होती है, तो मंच को कई परिस्थितियों में कारण बताना होता है। अर्थात उपयोगकर्ता केवल यह न देखे—
उसे यह भी पता चले— किस आधार पर कार्रवाई हुई। यूरोपीय आयोग इसे DSA द्वारा नागरिकों को दिए गए महत्वपूर्ण डिजिटल अधिकारों में गिनता है। (Digital Strategy) यह सिद्धांत भारत के भविष्य के डिजिटल नियमन के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है—
14.6 अपील की व्यवस्था
यदि उपयोगकर्ता मानता है कि उसकी सामग्री गलत तरीके से हटाई गई है तो DSA उसे निर्णय चुनौती देने की व्यवस्था भी देता है। यहां यूरोपीय मॉडल केवल सामग्री हटाने पर केंद्रित नहीं है। वह प्रक्रियात्मक न्याय पर भी जोर देता है। अर्थात— नियम क्या है? निर्णय क्यों हुआ? क्या उसे चुनौती दी जा सकती है? क्या बाहरी विवाद समाधान उपलब्ध है? EUR-Lex के आधिकारिक सारांश के अनुसार उपयोगकर्ता सामग्री-नियंत्रण निर्णयों को चुनौती दे सकते हैं और विवाद समाधान अथवा न्यायिक उपायों का सहारा ले सकते हैं। (Eur-Lex)
14.7 एल्गोरिद्म पहली बार नियमन के केंद्र में
DSA की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि उसने सोशल मीडिया समस्या को केवल “पोस्ट हटाने” तक सीमित नहीं रखा। उसने अनुशंसा प्रणालियों को भी नियमन के केंद्र में रखा। कानून स्वयं स्वीकार करता है कि एल्गोरिद्मिक सिफारिश और क्रम निर्धारण यह प्रभावित करते हैं कि उपयोगकर्ता किस सूचना से संपर्क करता है और कौन-से संदेश बड़े पैमाने पर फैलते हैं। (Eur-Lex) इसलिए बड़े मंचों को अपनी अनुशंसा प्रणालियों के प्रमुख मानकों के बारे में पारदर्शिता रखनी पड़ती है। यहीं यूरोप का मॉडल अमेरिका के पारंपरिक सुरक्षित आश्रय मॉडल से आगे जाता है। प्रश्न केवल यह नहीं—
प्रश्न यह भी—
14.8 बिना प्रोफाइलिंग वाली अनुशंसा का विकल्प
अत्यंत बड़े ऑनलाइन मंचों के लिए DSA का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है कि उपयोगकर्ता को कम से कम ऐसा अनुशंसा विकल्प उपलब्ध हो जो उसकी व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग पर आधारित न हो। (Digital Strategy) इसका महत्व बहुत बड़ा है। यह एल्गोरिद्म को समाप्त नहीं करता। लेकिन उपयोगकर्ता को कुछ नियंत्रण वापस देता है। अर्थात—
14.9 विज्ञापन की पारदर्शिता
डिजिटल विज्ञापन आधुनिक मंचों की आर्थिक शक्ति का केंद्र है। DSA के तहत उपयोगकर्ता को यह पहचानने में सक्षम होना चाहिए कि उसके सामने दिखाई देने वाली सामग्री विज्ञापन है और उसके पीछे कौन है। अत्यंत बड़े मंचों को सार्वजनिक विज्ञापन संग्रह भी रखना पड़ता है। (Digital Strategy) यह व्यवस्था शोधकर्ताओं, पत्रकारों और नागरिक समाज को यह समझने में सहायता कर सकती है कि— किस प्रकार के विज्ञापन चल रहे हैं, कौन चला रहा है, और डिजिटल विज्ञापन व्यवस्था किस दिशा में काम कर रही है। चुनावी दुष्प्रचार के संदर्भ में इसका महत्व और बढ़ जाता है।
14.10 बच्चों और संवेदनशील डेटा की सुरक्षा
यूरोपीय व्यवस्था ने बच्चों और व्यक्तिगत डेटा को भी विशेष महत्व दिया। DSA बच्चों की सुरक्षा से संबंधित प्रणालीगत जोखिमों को बहुत बड़े मंचों के जोखिम आकलन में शामिल करता है। साथ ही संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा के आधार पर लक्ष्यित विज्ञापन पर सीमाएं यूरोपीय डिजिटल ढांचे का हिस्सा हैं। (Eur-Lex) यह महत्वपूर्ण नीति परिवर्तन है। पुराने इंटरनेट मॉडल में प्रश्न था—
नए मॉडल में प्रश्न है—
14.11 सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्था — प्रणालीगत जोखिम
DSA की वास्तविक नवीनता यहीं है। अत्यंत बड़े मंचों को केवल व्यक्तिगत शिकायतों पर प्रतिक्रिया नहीं देनी है। उन्हें यह भी देखना है कि उनकी पूरी प्रणाली समाज पर किस प्रकार का जोखिम पैदा कर रही है। इन जोखिमों में शामिल हो सकते हैं— गैरकानूनी सामग्री का प्रसार, अभिव्यक्ति और अन्य मौलिक अधिकारों पर प्रभाव, चुनावी प्रक्रिया, सार्वजनिक सुरक्षा, लैंगिक हिंसा, बच्चों की सुरक्षा, और मानसिक तथा शारीरिक कल्याण। (Digital Strategy) यहां कानून की दृष्टि व्यक्तिगत पोस्ट से हटकर मंच वास्तुकला पर पहुंच जाती है।
14.12 जोखिम पहचाना तो उसे कम भी करना होगा
केवल रिपोर्ट बनाना पर्याप्त नहीं। यदि मंच पहचानता है कि उसकी प्रणाली गंभीर जोखिम पैदा कर रही है तो उसे उन्हें कम करने के उपाय करने पड़ सकते हैं। इसमें— मंच के डिजाइन में बदलाव, सामग्री नियंत्रण प्रणाली मजबूत करना, अनुशंसा प्रणाली बदलना, और आंतरिक संसाधन बढ़ाना— शामिल हो सकते हैं। (Digital Strategy) यानी यूरोप का मॉडल कहता है—
14.13 स्वतंत्र जांच और शोधकर्ताओं की पहुंच
बहुत बड़े मंचों को नियमित स्वतंत्र जांच से भी गुजरना पड़ सकता है। इसके अलावा योग्य शोधकर्ताओं को कुछ परिस्थितियों में मंचीय डेटा तक पहुंच देने की व्यवस्था है ताकि वे सामाजिक जोखिमों का अध्ययन कर सकें। (Digital Strategy) यह डिजिटल जवाबदेही में महत्वपूर्ण बदलाव है। क्योंकि अब तक बड़ी समस्या थी— कंपनी के पास डेटा है। कंपनी के पास एल्गोरिद्म है। कंपनी स्वयं बताती है कि उसकी प्रणाली सुरक्षित है। बाहरी दुनिया के पास उसे जांचने की सीमित क्षमता है। DSA इस सूचना-असमानता को कुछ हद तक कम करने की कोशिश करता है।
14.14 DSA का अर्थ सरकारी सेंसरशिप है?
इस पर यूरोप और अमेरिका के बीच तीखी राजनीतिक बहस हुई है। आलोचक कहते हैं कि “हानिकारक सामग्री” और प्रणालीगत जोखिम जैसी अवधारणाएं मंचों को अत्यधिक सामग्री नियंत्रण के लिए प्रेरित कर सकती हैं। समर्थक कहते हैं कि DSA वैध अभिव्यक्ति को गैरकानूनी घोषित नहीं करता बल्कि मंच की प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और जोखिम प्रबंधन को नियंत्रित करता है। कानून की संरचना में मौलिक अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया बहुलता स्वयं जोखिम आकलन के विषय हैं। (Digital Strategy) इसलिए DSA को समझते समय यह अंतर आवश्यक है—
फिर भी इसका वास्तविक संतुलन अंततः प्रवर्तन पर निर्भर करेगा।
14.15 उल्लंघन पर कितनी बड़ी सजा?
DSA की शक्ति केवल दिशानिर्देश देने में नहीं है। बड़े उल्लंघनों पर जुर्माना कंपनी के विश्वव्यापी वार्षिक कारोबार के 6 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। (European Commission) अरबों डॉलर के कारोबार वाली कंपनी के लिए भी यह छोटी राशि नहीं है। यूरोपीय मॉडल का संदेश स्पष्ट है—
14.16 DSA अब केवल कागजी कानून नहीं
फरवरी 2026 में DSA के सामान्य अनुप्रयोग के दो वर्ष पूरे हुए। यूरोपीय आयोग के अनुसार इस दौरान कई जांचें शुरू की गईं और कुछ मामलों में कंपनियों ने अपनी सेवाओं में बदलाव भी किए। (European Commission) उदाहरण के लिए टिकटॉक ने 2024 में अपनी टिकटॉक Lite Rewards व्यवस्था को यूरोपीय संघ में वापस लेने की प्रतिबद्धता दी थी, जब आयोग ने उसके संभावित व्यसनकारी प्रभाव को लेकर कार्रवाई शुरू की। फेसबुक और इंस्टाग्राम के संबंध में बच्चों की सुरक्षा तथा संभावित “rabbit-hole” प्रभावों की जांच भी की गई। (European Commission) इससे स्पष्ट है कि यूरोप का नियमन अब सिद्धांत से वास्तविक प्रवर्तन के चरण में पहुंच चुका है।
14.17 कृत्रिम बुद्धिमत्ता ने DSA की परीक्षा और कठिन कर दी
2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और सोशल मीडिया का मेल DSA के लिए नई परीक्षा बन गया। जनवरी 2026 में यूरोपीय आयोग ने X के विरुद्ध नई औपचारिक जांच शुरू की, जिसमें Grok की कुछ क्षमताओं से जुड़े जोखिम और X की अनुशंसा प्रणाली के जोखिम प्रबंधन को जांच के दायरे में लिया गया। आयोग ने विशेष रूप से गैरकानूनी सामग्री और कृत्रिम रूप से बदली गई यौन सामग्री से जुड़े जोखिमों का उल्लेख किया। (Digital Strategy) यह घटना महत्वपूर्ण है। क्योंकि सोशल मीडिया मंच अब केवल उपयोगकर्ता सामग्री का वितरक नहीं है। उसी मंच के भीतर कृत्रिम बुद्धिमत्ता स्वयं नई सामग्री बना सकती है। इससे DSA की प्रणालीगत जोखिम वाली सोच और प्रासंगिक हो जाती है।
14.18 DMA क्यों बनाया गया?
DSA मुख्यतः ऑनलाइन सुरक्षा और मंचीय जवाबदेही से संबंधित है। DMA का प्रश्न अलग है—
यूरोपीय संघ ने ऐसी कंपनियों के लिए शब्द चुना—
DMA नवंबर 2022 में लागू हुआ और इसके प्रमुख प्रावधान मई 2023 से लागू होने लगे। (डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA))
14.19 Gatekeeper कौन है?
हर बड़ी कंपनी Gatekeeper नहीं है। कानून कुछ मात्रात्मक और गुणात्मक कसौटियां निर्धारित करता है। उदाहरण के लिए किसी कंपनी के लिए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि उसका यूरोपीय आंतरिक बाजार पर महत्वपूर्ण प्रभाव है यदि उसका यूरोपीय संघ में वार्षिक कारोबार कम से कम 7.5 अरब यूरो हो अथवा उसका बाजार मूल्य कम से कम 75 अरब यूरो हो और वह आवश्यक अन्य शर्तें पूरी करती हो। इसके साथ किसी मुख्य मंचीय सेवा के लिए लगभग—
4.5 करोड़ मासिक अंतिम उपयोगकर्ता
यूरोपीय संघ ने मंचों की जवाबदेही तय करते समय उनके आकार और सामाजिक प्रभाव को केंद्रीय कसौटी बनाया है। जिन सेवाओं के यूरोपीय संघ में औसतन 4.5 करोड़ या उससे अधिक मासिक सक्रिय प्राप्तकर्ता हों, उन्हें अत्यंत बड़े ऑनलाइन मंच अथवा अत्यंत बड़े ऑनलाइन खोज इंजन की श्रेणी में रखा जा सकता है। यह सीमा यूरोपीय संघ की आबादी के लगभग दस प्रतिशत के बराबर रखी गई, ताकि व्यापक जनमत और बाजार को प्रभावित करने वाली सेवाओं पर साधारण मध्यस्थों की तुलना में अधिक कठोर दायित्व लागू हों।
इस श्रेणी में आने पर केवल शिकायत मिलने के बाद सामग्री हटाना पर्याप्त नहीं रहता। मंच को प्रणालीगत जोखिम का आकलन, स्वतंत्र लेखा-परीक्षण, शोधकर्ताओं को आवश्यक आंकड़ों तक पहुंच, विज्ञापन की पारदर्शिता और अनुशंसा प्रणालियों के बारे में अधिक स्पष्टता देनी पड़ती है। इसलिए 4.5 करोड़ का आंकड़ा केवल उपयोगकर्ताओं की गणना नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव के अनुपात में जवाबदेही बढ़ाने का नियामकीय सिद्धांत है।
और
जैसी सीमाएं भी महत्वपूर्ण हैं। (Eur-Lex) लेकिन अंतिम Gatekeeper निर्धारण यूरोपीय आयोग करता है।
14.20 Gatekeeper समस्या क्या है?
कल्पना कीजिए कि कोई कंपनी— मोबाइल परिचालन प्रणाली भी चलाती है, ऐप स्टोर भी, भुगतान व्यवस्था भी, विज्ञापन भी, और अपनी स्वयं की ऐप भी। तब वह केवल बाजार में एक प्रतियोगी नहीं रहती। वह बाजार का दरवाजा भी नियंत्रित करती है। यही DMA की मूल चिंता है। यदि दरवाजा नियंत्रित करने वाला स्वयं उसी बाजार में प्रतिस्पर्धा कर रहा हो तो वह अपने उत्पादों को अनुचित लाभ दे सकता है।
14.21 अपने उत्पाद को ऊपर रखना
DMA के तहत Gatekeeper अपने मंच पर अपनी सेवाओं और उत्पादों को तीसरे पक्ष की समान सेवाओं की तुलना में अनुचित रूप से अधिक प्राथमिकता नहीं दे सकता। (Eur-Lex) इसे Self-preferencing—स्व-प्राथमिकता की समस्या कहा जाता है। उदाहरण के लिए यदि कोई खोज इंजन अपने ही व्यापारिक उत्पाद को हमेशा प्रतिस्पर्धी सेवा से ऊपर दिखाए तो यह केवल एल्गोरिद्मिक निर्णय नहीं रह जाता। वह प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है।
14.22 उपयोगकर्ता को बाहर जाने की स्वतंत्रता
Gatekeeper को व्यवसायों को अपने ग्राहकों से मंच के बाहर भी संपर्क और सौदा करने की अनुमति देनी होती है। वह उन्हें यह कहकर पूरी तरह बांध नहीं सकता कि—
DMA व्यवसायों को वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध कराने पर जोर देता है। (डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA)) यह ऐप अर्थव्यवस्था और डिजिटल बाजार के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
14.23 डेटा पर एकाधिकार को चुनौती
डिजिटल बाजार में सबसे बड़ी शक्ति केवल पैसा नहीं है।
यदि विशाल मंच के पास करोड़ों उपभोक्ताओं के व्यवहार का डेटा हो तो नई कंपनी उसके मुकाबले कमजोर स्थिति में होती है। DMA इसलिए कुछ परिस्थितियों में व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं को उनके द्वारा उत्पन्न डेटा तक पहुंच और उपयोगकर्ताओं को डेटा स्थानांतरण की अधिक सुविधा देता है। (डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA)) इसका उद्देश्य है—
14.24 पहले से लगी ऐप भी प्रश्न के दायरे में
Gatekeeper उपयोगकर्ताओं को कुछ पहले से स्थापित ऐप हटाने से अनुचित रूप से नहीं रोक सकता। इसी तरह उपयोगकर्ता को कुछ सेवाओं में अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में DMA ने महत्वपूर्ण बदलाव कराए हैं। 2026 की पहली DMA समीक्षा के अनुसार ब्राउजर और खोज इंजन के लिए विकल्प स्क्रीन, पहले से लगी ऐप हटाने की क्षमता, डेटा स्थानांतरण और अलग सेवाओं के डेटा को जोड़ने से पहले उपयोगकर्ता की सहमति जैसी व्यवस्थाओं में व्यावहारिक परिवर्तन हुए हैं। (डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA))
14.25 उल्लंघन पर DMA की सजा और भी कठोर
DMA का उल्लंघन करने पर कंपनी के कुल विश्वव्यापी कारोबार के 10 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार उल्लंघन होने पर यह 20 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। (Eur-Lex) इसलिए यूरोप ने Gatekeeper नियमन को केवल नैतिक अपील नहीं बनाया। उसके पीछे वास्तविक आर्थिक दंड है।
14.26 2026 तक DMA कहां पहुंचा?
DMA अब शुरुआती प्रयोग भर नहीं है। 2026 में इसकी पहली औपचारिक समीक्षा में यूरोपीय आयोग ने कहा कि कानून ने बाजार को अधिक निष्पक्ष और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में शुरुआती सकारात्मक परिणाम दिए हैं, हालांकि पूर्ण प्रभाव अभी सामने नहीं आया है और प्रवर्तन मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है। (डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA)) विशेष रूप से दो नए क्षेत्र सामने आए— क्लाउड सेवाएं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता। आयोग ने माना कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेवाओं का परिचालन प्रणालियों, खोज और बड़े मंचों के साथ एकीकरण भविष्य में बाजार शक्ति का नया स्रोत बन सकता है। 2026 में कृत्रिम बुद्धिमत्ता अंतर-संचालन और खोज डेटा तक पहुंच से जुड़े विषय DMA के प्रवर्तन में स्पष्ट रूप से सामने आ चुके थे। (डिजिटल बाजार अधिनियम (DMA)) यह महत्वपूर्ण संकेत है—
14.27 DSA और DMA में मूल अंतर
दोनों कानूनों को लेकर अक्सर भ्रम होता है। इसे सरल तरीके से समझा जा सकता है।
मंच समाज और उपयोगकर्ता के प्रति कितना जिम्मेदार है?
मंच बाजार में अपनी शक्ति का उपयोग कैसे कर रहा है? DSA की चिंता है— गैरकानूनी सामग्री, एल्गोरिद्म, विज्ञापन पारदर्शिता, बच्चों की सुरक्षा, प्रणालीगत जोखिम, और उपयोगकर्ता अधिकार। DMA की चिंता है— Gatekeeper शक्ति, प्रतिस्पर्धा, डेटा नियंत्रण, स्व-प्राथमिकता, व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं की स्वतंत्रता और बाजार में प्रवेश। दोनों मिलकर यूरोप की डिजिटल शासन व्यवस्था बनाते हैं। (Digital Strategy)
14.28 यूरोप और अमेरिका — मूल दार्शनिक अंतर
अमेरिकी मॉडल की ऐतिहासिक प्राथमिकता रही—
यूरोपीय मॉडल की प्राथमिकता में अधिक स्पष्ट रूप से शामिल हैं—
अमेरिका पूछता रहा— “किस परिस्थिति में मंच पर मुकदमा किया जा सकता है?” यूरोप ने प्रश्न आगे बढ़ाया— “इतने बड़े मंच को समाज पर जोखिम पैदा होने से पहले क्या करना चाहिए?” यही दोनों मॉडलों का सबसे महत्वपूर्ण अंतर है।
14.29 क्या यूरोपीय मॉडल आदर्श है?
अभी ऐसा निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसके सामने गंभीर चुनौतियां हैं। इतने विशाल डिजिटल मंचों की जांच के लिए अत्यधिक तकनीकी क्षमता चाहिए। एल्गोरिद्मिक जोखिम मापना कठिन है। कंपनियों और नियामकों के बीच लंबे कानूनी विवाद हो सकते हैं। अत्यधिक अनुपालन लागत छोटी कंपनियों के लिए बोझ बन सकती है। और “प्रणालीगत जोखिम” की अवधारणा का गलत विस्तार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर दबाव पैदा कर सकता है। इसलिए यूरोपीय मॉडल की सफलता केवल कानून की भाषा से नहीं मापी जाएगी। वास्तविक कसौटी होगी—
14.30 भारत यूरोप से क्या सीख सकता है?
भारत को यूरोपीय मॉडल की हूबहू नकल करने की आवश्यकता नहीं है। भारत की संवैधानिक व्यवस्था, जनसंख्या, भाषाई विविधता, प्रशासनिक क्षमता और डिजिटल बाजार अलग हैं। लेकिन कुछ सिद्धांत अत्यंत उपयोगी हैं।
छोटे मंच और अरबों डॉलर की कंपनी को एक जैसा नियमन आवश्यक नहीं।
कंपनी को अपना पूरा व्यापारिक रहस्य सार्वजनिक न करना पड़े, लेकिन यह बताया जा सके कि उसकी अनुशंसा प्रणाली किन मुख्य सिद्धांतों पर काम करती है।
चुनाव, बच्चों, डीपफेक और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशाल मंच के प्रभाव की नियमित समीक्षा।
मंच के दावों की स्वतंत्र जांच संभव हो।
पोस्ट हटे तो उपयोगकर्ता को कारण और अपील का रास्ता मिले।
एक कंपनी की सामग्री नीति और उसकी आर्थिक एकाधिकार शक्ति दो अलग समस्याएं हैं। DSA और DMA का अलग-अलग अस्तित्व यही सिखाता है।
14.31 निष्कर्ष
यूरोपीय संघ ने डिजिटल नियमन में दुनिया के सामने एक महत्वपूर्ण प्रयोग रखा है। उसने यह स्वीकार किया कि आज की विशाल तकनीकी कंपनियां केवल सामान्य निजी कंपनियां नहीं हैं। वे— सूचना के द्वारपाल, विज्ञापन बाजार के नियंत्रक, ऐप अर्थव्यवस्था के प्रवेश-द्वार, डेटा के विशाल भंडार और सार्वजनिक संवाद के महत्वपूर्ण मंच— बन चुकी हैं। इसलिए यूरोप का सिद्धांत है—
DSA कहता है— अपने मंच से पैदा होने वाले प्रणालीगत जोखिम को समझो, पारदर्शिता रखो और उन्हें कम करने के उपाय करो। DMA कहता है— अपनी विशाल बाजार शक्ति का इस्तेमाल प्रतिस्पर्धियों और उपभोक्ताओं को अनुचित रूप से बांधने के लिए मत करो। लेकिन यूरोपीय मॉडल का अंतिम मूल्यांकन अभी बाकी है। DSA का व्यापक अनुप्रयोग फरवरी 2024 से ही हुआ और DMA भी अभी शुरुआती प्रवर्तन वर्षों में है। 2026 तक मिले परिणाम महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इतने नहीं कि उसकी दीर्घकालीन सफलता घोषित कर दी जाए। (European Commission) फिर भी एक बात स्पष्ट है—
अब प्रश्न हैं— एल्गोरिद्म किसके प्रति जवाबदेह है? डिजिटल बाजार का प्रवेश-द्वार कौन नियंत्रित करता है? उपयोगकर्ता का डेटा किसके पास है? विशाल मंच समाज के लिए पैदा होने वाले जोखिम का कितना भार उठाए? और सरकार की नियामकीय शक्ति की सीमा क्या हो? अमेरिका ने इंटरनेट को विकसित होने के लिए व्यापक कानूनी स्वतंत्रता दी। यूरोप अब उसी डिजिटल शक्ति को नियमबद्ध और जवाबदेह बनाने का प्रयोग कर रहा है। भारत के लिए भविष्य का मॉडल संभवतः इन दोनों के बीच कहीं होगा—न तो अमेरिकी शैली की अत्यधिक मंचीय स्वतंत्रता, न ऐसी नियामकीय व्यवस्था जिसमें राज्य स्वयं डिजिटल संवाद का निर्णायक बन जाए।