2025–26 — संपूर्ण वंदे मातरम् की वापसी और 89 वर्ष पुरानी व्यवस्था को चुनौती
7 नवंबर 2025 इस पूरी कहानी में एक नया मोड़ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के वर्षभर के राष्ट्रीय समारोह का शुभारंभ किया।
सरकारी कार्यक्रम 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक निर्धारित किया गया। (Press Information Bureau)
लेकिन कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात थी—
संपूर्ण वंदे मातरम् का सामूहिक गायन।
सरकार ने देशभर में पूर्ण संस्करण के सामूहिक गायन का कार्यक्रम रखा। (Press Information Bureau)
यहीं पहली बार 1937 की व्यवस्था को राजकीय स्तर पर प्रत्यक्ष चुनौती दिखाई देती है।
मोदी सरकार का तर्क
सरकार का दृष्टिकोण मूलतः ऐतिहासिक पुनर्स्थापन का था।
उसका तर्क यह था कि—
वंदे मातरम् बंकिमचंद्र की संपूर्ण रचना है;
उसने स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया;
उसकी 150वीं वर्षगांठ पर उसके संपूर्ण स्वरूप को सामने आना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने उद्घाटन अवसर पर वंदे मातरम् को केवल शब्द नहीं बल्कि राष्ट्र को प्रेरित करने वाला मंत्र, ऊर्जा, स्वप्न और संकल्प बताया। (Press Information Bureau)
जनवरी 2026 — निर्णायक सरकारी बदलाव
गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय गीत के संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए।
इसके बाद सरकारी प्रोटोकॉल में छह अंतरों वाला संस्करण प्रमुख रूप से सामने आया।
सरकारी प्रकाशन के अनुसार पूर्ण संस्करण की अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड निर्धारित हुई और महत्वपूर्ण राजकीय अवसरों पर आधिकारिक संस्करण के प्रयोग का निर्देश दिया गया। (New India Samachar)
यह मामूली प्रशासनिक परिवर्तन नहीं था।
89 वर्ष बाद क्या हुआ?
1937 में—
6 → 2
राष्ट्रीय सार्वजनिक गायन की दिशा बनी।
2026 में—
2 → 6
सरकारी प्रोटोकॉल की दिशा बनी।
यानी विवाद वास्तव में इतिहास की उलटी यात्रा कर रहा था।
आकाशवाणी का परिवर्तन इसका सबसे अच्छा उदाहरण
26 मार्च 2026 से आकाशवाणी ने छह-अंतरे वाला नया संस्करण प्रसारित करना शुरू किया।
सरकारी विज्ञप्ति ने स्वयं बताया कि इससे पहले स्वतंत्रता के समय से 65 सेकंड वाला दो-अंतरे का संस्करण सुबह प्रसारित होता था।
नया संस्करण—
3 मिनट 10 सेकंड।
और सभी छह अंतरे। (Press Information Bureau)
इस एक परिवर्तन में 1937 से 2026 तक की पूरी कहानी समाहित है।
जुलाई 2026 — कानून भी बदल गया
अब मामला केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं रहा।
24 जुलाई 2026 को राज्यसभा में *Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026* पेश किया गया।
29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा ने इसे पारित किया। (PRS Legislative Research)
इसका मूल उद्देश्य था—
राष्ट्रगान के गायन को जानबूझकर रोकने अथवा सभा में व्यवधान डालने पर लागू दंडात्मक प्रावधान को राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् तक विस्तारित करना।
अर्थात 1971 से मौजूद कानूनी अंतर को संसद ने 2026 में कम किया। (PRS Legislative Research)
यहां एक बहुत जरूरी कानूनी सावधानी
इस कानून का अर्थ यह नहीं है कि—
हर नागरिक को छहों अंतरे गाना अनिवार्य है।
कानून का लक्ष्य राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना अथवा ऐसी सभा में व्यवधान पैदा करना है। (PRS Legislative Research)
इसलिए—
“संसद ने प्रत्येक नागरिक को छह अंतरे गाने का आदेश दिया”
कहना तथ्यात्मक रूप से गलत होगा।
लेकिन राजनीतिक और संवैधानिक महत्व फिर भी बहुत बड़ा है।
क्योंकि पहली बार संसद ने राष्ट्रीय गीत को उस प्रकार की वैधानिक सुरक्षा के दायरे में लाया जो राष्ट्रगान को प्राप्त थी।
और फिर प्रश्न सीधे कांग्रेस के सामने आया
यदि केंद्र संपूर्ण संस्करण को सरकारी प्रोटोकॉल में ला रहा है—
तो कांग्रेस क्या करेगी?
क्या वह 1937 की अपनी नीति बदलेगी?
या—
89 वर्ष पुराने निर्णय पर कायम रहेगी?
19 अगस्त 2026 को उत्तर मिल गया।