आत्मघाती राजनीतिक हत्या
चुनावी सभा में मानव बम के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री और आसपास मौजूद लोगों की हत्या।
भारत–श्रीलंका संबंधों और भारतीय शांति सेना की पृष्ठभूमि से लेकर 21 मई 1991 के आत्मघाती विस्फोट, सुरक्षा चूक, विशेष जांच दल, वर्मा व जैन आयोग, टाडा अदालत, सर्वोच्च न्यायालय, दया याचिकाओं और 2022 की अंतिम रिहाई तक—एक विस्तृत, स्रोत-सचेत अध्ययन।
चुनावी सभा में मानव बम के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री और आसपास मौजूद लोगों की हत्या।
आपराधिक साजिश, सुरक्षा विफलता और कथित व्यापक षड्यंत्र की अलग-अलग जांच।
मृत्युदंड, सजा परिवर्तन, संवैधानिक शक्तियों का विवाद और सातों दोषियों की रिहाई।
मूल सामग्री के तथ्य, अदालती निष्कर्ष, आयोगीय रिकॉर्ड और विवादित प्रश्नों को क्रमबद्ध वेब अध्यायों में रखा गया है। विषयगत दोहराव हटाया गया है; substantive विवरण सुरक्षित रखा गया है।
1987 से 2026 की घटनाओं, आरोपियों, आयोगों और फैसलों की समयरेखा तथा न्यायालय, संसद और सरकारी दस्तावेजों की स्रोत-सूची अलग उपलब्ध है।
न्यायालय में सिद्ध तथ्य और आयोगीय संदेह अलग · आपराधिक जिम्मेदारी और राजनीतिक आलोचना अलग · सुरक्षा चूक और हत्या की साजिश अलग · अनुत्तरित प्रश्नों को निष्कर्ष की तरह प्रस्तुत नहीं किया गया है।