दस्तावेज़ · तथ्य · विश्लेषण
भारत में कांग्रेस का बदलता राजनीतिक भूगोल
2014–2026
राज्यवार सत्ता, विधानसभा, लोकसभा, वोट शेयर, क्षेत्रीय दलों का उभार और कांग्रेस के संकुचन-वापसी का विस्तृत अध्ययन।
चुनाव परिणाम, संसद, विधानसभाओं और सरकारी अभिलेखों के आधार पर 23 अगस्त 2026 तक की स्थिति। दलबदल, अयोग्यता, निधन, उपचुनाव या नेतृत्व-परिवर्तन के कारण वर्तमान संख्या मूल चुनाव परिणाम से अलग हो सकती है।
भूमिका : कांग्रेस की कमजोरी को केवल 99 लोकसभा सीटों से नहीं समझा जा सकता
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की 2014 के बाद की राजनीतिक यात्रा को यदि केवल लोकसभा की कुल सीटों से देखा जाए तो तस्वीर अधूरी रहेगी। 2014 में कांग्रेस 44, 2019 में 52 और 2024 में 99 लोकसभा सीटों तक पहुँची। इस आधार पर 2024 स्पष्ट पुनरुत्थान दिखाई देता है। निर्वाचन आयोग प्रत्येक लोकसभा चुनाव के लिए राज्यवार पार्टी सीट और वैध मतों के विस्तृत सांख्यिकीय अभिलेख उपलब्ध कराता है।
लेकिन राज्यवार राजनीतिक भूगोल कहीं अधिक जटिल है।
एक तरफ कर्नाटक, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और 2026 के बाद केरल जैसे राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है। दूसरी तरफ आंध्र प्रदेश, सिक्किम, दिल्ली जैसे क्षेत्रों में उसका विधानसभा प्रतिनिधित्व शून्य है। उत्तर प्रदेश जैसे देश के सबसे बड़े राज्य में उसके केवल दो विधायक हैं। कुछ राज्यों में कांग्रेस का वोट आधार काफी बड़ा है लेकिन सीटें बहुत कम हैं। मध्य प्रदेश इसका प्रमुख उदाहरण है। दूसरी ओर नागालैंड में विधानसभा में कांग्रेस शून्य है, फिर भी राज्य की अकेली लोकसभा सीट कांग्रेस के पास है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण प्रवृत्ति यह है कि कांग्रेस की राजनीतिक जमीन हर जगह भाजपा ने नहीं छीनी। पंजाब में आम आदमी पार्टी, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम और YSR कांग्रेस, झारखंड में JMM, जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस, मिजोरम में MNF और ZPM तथा सिक्किम में क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस की पुरानी राजनीतिक जगह का बड़ा हिस्सा ग्रहण किया है।
इसलिए कांग्रेस की वर्तमान स्थिति को चार प्रश्नों से समझना चाहिए:
कहाँ कांग्रेस अभी भी सत्ता की प्रमुख दावेदार है? कहाँ उसका सीधा मुकाबला भाजपा से है? कहाँ क्षेत्रीय दल उससे आगे निकल चुके हैं? और कहाँ कांग्रेस के वोट और सीट—दोनों का आधार गंभीर रूप से सिकुड़ गया है?
लोकसभा : 2014 से 2024 तक कांग्रेस की राष्ट्रीय यात्रा
तीन आम चुनावों का पहला बड़ा आंकड़ा है:
| लोकसभा चुनाव | कांग्रेस सीटें | पिछली बार से परिवर्तन |
|---|---|---|
| 2014 | 44 | — |
| 2019 | 52 | +8 |
| 2024 | 99 | +47 |
इसलिए 2014 से 2024 के बीच कांग्रेस ने अपनी लोकसभा संख्या:
44 → 99
की।
अर्थात शुद्ध वृद्धि 55 सीटों की।
लेकिन इस वृद्धि का अधिकांश हिस्सा कुछ चुनिंदा राज्यों में केंद्रित है।
कांग्रेस की लोकसभा सीटें : 2014, 2019 और 2024 की राज्यवार मास्टर तालिका
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | 2014 | 2019 | 2024 |
|---|---|---|---|
| उत्तर प्रदेश | 2 | 1 | 6 |
| महाराष्ट्र | 2 | 1 | 13 |
| पश्चिम बंगाल | 4 | 2 | 1 |
| बिहार | 2 | 1 | 3 |
| तमिलनाडु | 0 | 8 | 9 |
| कर्नाटक | 9 | 1 | 9 |
| केरल | 8 | 15 | 14 |
| तेलंगाना | 2 | 3 | 8 |
| आंध्र प्रदेश | 0 | 0 | 0 |
| मध्य प्रदेश | 2 | 1 | 0 |
| राजस्थान | 0 | 0 | 8 |
| गुजरात | 0 | 0 | 1 |
| छत्तीसगढ़ | 1 | 2 | 1 |
| हरियाणा | 1 | 0 | 5 |
| पंजाब | 3 | 8 | 7 |
| हिमाचल प्रदेश | 0 | 0 | 0 |
| उत्तराखंड | 0 | 0 | 0 |
| झारखंड | 0 | 1 | 2 |
| ओडिशा | 0 | 1 | 1 |
| असम | 3 | 3 | 3 |
| अरुणाचल प्रदेश | 1 | 0 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 0 | 2 |
| मेघालय | 1 | 1 | 1 |
| मिजोरम | 1 | 0 | 0 |
| नागालैंड | 0 | 0 | 1 |
| त्रिपुरा | 0 | 0 | 0 |
| सिक्किम | 0 | 0 | 0 |
| गोवा | 0 | 1 | 1 |
| दिल्ली | 0 | 0 | 0 |
| पुडुचेरी | 0 | 1 | 1 |
| चंडीगढ़ | 0 | 0 | 1 |
| लक्षद्वीप | 0 | 0 | 1 |
| अंडमान-निकोबार | 0 | 1 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर* | 0 | 0 | 0 |
| राष्ट्रीय कुल | 44 | 52 | 99 |
*जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद पुनर्गठन हुआ, इसलिए दीर्घकालीन तुलना में संवैधानिक-भौगोलिक बदलाव ध्यान में रखना चाहिए।
निर्वाचन आयोग की 2024 statistical-report व्यवस्था में बाकायदा “Party Wise Seat Won and Valid Votes Polled in Each State” उपलब्ध है। इसलिए भविष्य में इस तालिका को अपडेट करने का प्राथमिक स्रोत ECI ही होना चाहिए।
2024 की 99 सीटें वास्तव में कहाँ से आईं?
कांग्रेस की 2024 की संसदीय वापसी पूरे भारत में समान रूप से नहीं हुई।
उसकी सबसे बड़ी राज्यवार संख्या थी:
| राज्य | कांग्रेस लोकसभा सीटें 2024 |
|---|---|
| केरल | 14 |
| महाराष्ट्र | 13 |
| कर्नाटक | 9 |
| तमिलनाडु | 9 |
| तेलंगाना | 8 |
| राजस्थान | 8 |
| पंजाब | 7 |
| उत्तर प्रदेश | 6 |
| हरियाणा | 5 |
इन नौ राज्यों ने कांग्रेस को:
79/99 सीटें
दीं।
अर्थात उसकी लगभग 80 प्रतिशत लोकसभा शक्ति केवल नौ राज्यों में केंद्रित थी।
बाकी पूरे भारत से कांग्रेस को केवल 20 सीटें मिलीं।
यह 2024 के पुनरुत्थान की सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक सीमा है।
कांग्रेस की सबसे बड़ी 2014–2024 वापसी
सबसे उल्लेखनीय बढ़ोतरी:
महाराष्ट्र — 2 से 13
तमिलनाडु — 0 से 9
राजस्थान — 0 से 8
केरल — 8 से 14
तेलंगाना — 2 से 8
उत्तर प्रदेश — 2 से 6
हरियाणा — 1 से 5
पंजाब — 3 से 7
कर्नाटक में दिलचस्प रूप से कांग्रेस दस साल बाद वहीं लौटी जहाँ 2014 में थी:
9 → 1 → 9
तीन लगातार लोकसभा चुनावों में शून्य
वर्तमान राज्य सीमाओं को आधार मानें तो पाँच राज्य ऐसे हैं जहाँ कांग्रेस 2014, 2019 और 2024—तीनों लोकसभा चुनावों में एक भी सीट नहीं जीत सकी:
आंध्र प्रदेश — 0 → 0 → 0
हिमाचल प्रदेश — 0 → 0 → 0
उत्तराखंड — 0 → 0 → 0
त्रिपुरा — 0 → 0 → 0
सिक्किम — 0 → 0 → 0
विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश दिल्ली को जोड़ने पर:
दिल्ली — 0 → 0 → 0
इन छह इकाइयों में वर्तमान लोकसभा सीटें कुल:
आंध्र 25 + दिल्ली 7 + उत्तराखंड 5 + हिमाचल 4 + त्रिपुरा 2 + सिक्किम 1 = 44
अर्थात तीन चुनावों के:
132 सीट-अवसरों में कांग्रेस की जीत = 0
यह कांग्रेस के भौगोलिक संकुचन का अत्यंत महत्वपूर्ण संकेतक है।
लेकिन हिमाचल और उत्तराखंड को आंध्र के समान राजनीतिक श्रेणी में रखना गलत होगा। दोनों राज्यों में कांग्रेस का विधानसभा वोट आधार बहुत बड़ा है; समस्या संसदीय सीट जीतने की है।
2024 में भी लोकसभा शून्य, लेकिन विधानसभा में बड़ा आधार
मध्य प्रदेश
कांग्रेस ने 2023 विधानसभा चुनाव में 66 सीटें और लगभग 40 प्रतिशत वोट प्राप्त किए, फिर भी 2024 लोकसभा में:
0/29
रही।
इसलिए मध्य प्रदेश में कांग्रेस समाप्त नहीं है। वहाँ BJP और Congress ही दो प्रमुख राजनीतिक ध्रुव हैं।
उत्तराखंड
2022 विधानसभा में कांग्रेस ने 19/70 सीटें और लगभग 38% वोट लिए।
लेकिन:
2014 LS — 0/5 2019 — 0/5 2024 — 0/5
यहाँ समस्या जनाधार से अधिक लोकसभा में BJP के सामने सीट conversion की है।
हिमाचल प्रदेश
राज्य सरकार कांग्रेस की है, लेकिन:
2014 — 0/4 2019 — 0/4 2024 — 0/4
इसलिए कांग्रेस की राज्य और राष्ट्रीय चुनावों में प्रदर्शन क्षमता में स्पष्ट अंतर है।
अगस्त 2026 में कांग्रेस कहाँ सत्ता में है?
कांग्रेस के अपने मुख्यमंत्री वाले प्रमुख राज्य हैं:
कर्नाटक
मुख्यमंत्री — डी.के. शिवकुमार
उन्होंने 3 जून 2026 को पद संभाला।
तेलंगाना
मुख्यमंत्री — ए. रेवंत रेड्डी
हिमाचल प्रदेश
मुख्यमंत्री — सुखविंदर सिंह सुक्खू
केरल
2026 विधानसभा चुनाव के बाद UDF सत्ता में लौटा और कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी। निर्वाचन आयोग के परिणाम में कांग्रेस को 63/140 सीटें मिलीं।
इसलिए यह धारणा भी गलत होगी कि कांग्रेस राज्य सत्ता से लगभग पूरी तरह बाहर हो चुकी है। उसके पास चार महत्वपूर्ण राज्य सरकारें हैं, जिनमें कर्नाटक, तेलंगाना और केरल जैसे बड़े दक्षिणी राज्य शामिल हैं।
केरल : 2026 की सबसे बड़ी कांग्रेस वापसी
2021 में कांग्रेस:
21 सीट
पर थी।
2026 में:
63 सीट
अर्थात:
21 → 63
कांग्रेस ने अपनी सीट संख्या तीन गुना कर ली।
ECI के अनुसार 2026 में Kerala Assembly का परिणाम:
INC 63 CPI(M) 26 IUML 22 CPI 8 Kerala Congress 7 BJP 3
रहा।
इसलिए केरल 2014–26 के अध्ययन में कांग्रेस के पतन का नहीं बल्कि संगठनात्मक और चुनावी पुनरुत्थान का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
कर्नाटक : हार, सत्ता संकट और फिर निर्णायक वापसी
2018 विधानसभा:
Congress 80
2023:
Congress 135
कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया।
2026 में नेतृत्व परिवर्तन के बाद:
डी.के. शिवकुमार मुख्यमंत्री
बने।
लोकसभा में कहानी अलग है:
2014 — Congress 9 2019 — 1 2024 — 9
यानी कांग्रेस 2024 में अपने 2014 के स्तर पर वापस पहुँची।
कर्नाटक उन चुनिंदा राज्यों में है जहाँ कांग्रेस राज्य सत्ता और लोकसभा—दोनों स्तरों पर एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
तेलंगाना : कांग्रेस की दूसरी बड़ी दक्षिणी वापसी
Congress 19
Congress 64
यानी:
19 → 64
इसी दौरान BRS:
88 → 39
पर आ गई।
2024 लोकसभा में:
Congress 8
BJP 8
AIMIM 1
BRS 0
यह अत्यंत महत्वपूर्ण परिवर्तन है। तेलंगाना की राजनीति जो कभी TRS/BRS प्रधान थी, अब कांग्रेस-BJP प्रतिस्पर्धा की दिशा में बढ़ती दिखाई देती है, हालांकि BRS अभी विधानसभा में बड़ी शक्ति है।
कांग्रेस के सबसे गंभीर विधानसभा संकट वाले राज्य
किसी पार्टी की वास्तविक संगठनात्मक कमजोरी का एक अच्छा संकेतक है:
विधानसभा वोट शेयर 10% से कम + विधायक एक अंक में।
हाल के चुनावों में इस कसौटी पर प्रमुख मामले हैं:
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | विधानसभा कुल | कांग्रेस सीटें | कांग्रेस वोट शेयर (लगभग) |
|---|---|---|---|
| सिक्किम | 32 | 0 | 0.3% |
| आंध्र प्रदेश | 175 | 0 | 1.7% |
| उत्तर प्रदेश | 403 | 2 | 2.3% |
| नागालैंड | 60 | 0 | 3.6% |
| अरुणाचल प्रदेश | 60 | 1 | 5.6% |
| दिल्ली | 70 | 0 | 6.3% |
| त्रिपुरा | 60 | 3 | 8.6% |
| बिहार | 243 | 6 | 8.7% |
बिहार में 2025 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 6 सीटों और लगभग 8.71% राज्यव्यापी मत पर रही। 2026 में राज्य का नेतृत्व बदलकर भाजपा के सम्राट चौधरी के हाथ आया।
आंध्र प्रदेश : कांग्रेस के संकुचन का सबसे चरम बड़ा-राज्य उदाहरण
वर्तमान आंध्र प्रदेश कभी अविभाजित राज्य के रूप में कांग्रेस के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आधारों में था।
लेकिन 2024 में:
विधानसभा
0/175
लोकसभा
0/25
175 + 25 = 200 निर्वाचित सीटों में कांग्रेस शून्य
और विधानसभा वोट लगभग 2% से भी कम।
यहाँ कांग्रेस की जगह सीधे BJP ने नहीं ली। राज्य विभाजन, क्षेत्रीय राजनीति और TDP-YSRCP ध्रुवीकरण ने कांग्रेस को हाशिये पर पहुँचाया।
यही इस अध्ययन का केंद्रीय निष्कर्ष पुष्ट करता है—कांग्रेस का संकुचन और भाजपा का विस्तार हमेशा एक ही प्रक्रिया नहीं हैं।
उत्तर प्रदेश : राष्ट्रीय राजनीति की सबसे बड़ी संगठनात्मक समस्या
उत्तर प्रदेश में:
विधानसभा — 403
कांग्रेस विधायक — 2
2022 विधानसभा वोट:
लगभग 2.3%
लेकिन 2024 लोकसभा में कांग्रेस:
6/80
जीती।
इस वापसी में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और सीमित सीटों पर कांग्रेस की उम्मीदवारी महत्वपूर्ण थी।
इसलिए UP में दो वास्तविकताएँ साथ-साथ मौजूद हैं:
विधानसभा संगठन अत्यंत कमजोर।
लोकसभा में गठबंधन आधारित पुनरुत्थान।
UP में कांग्रेस स्वयं भाजपा की मुख्य प्रतिद्वंद्वी नहीं है। मुख्य विपक्षी शक्ति समाजवादी पार्टी है।
बिहार : राष्ट्रीय दल लेकिन राज्य में जूनियर विपक्षी शक्ति
2025 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस:
6/243
पर सिमट गई।
उसका वोट शेयर लगभग:
8.71%
2024 लोकसभा में कांग्रेस ने:
3/40
सीटें जीती थीं।
इसलिए बिहार में कांग्रेस की स्थिति UP से कुछ बेहतर है, लेकिन वह अपने दम पर सत्ता की मुख्य दावेदार नहीं है। RJD विपक्षी गठबंधन की प्रमुख राज्य शक्ति है।
2026 का बड़ा राजनीतिक परिवर्तन यह रहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के बाद सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद संभाला, और बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिला।
गुजरात : सीटों में संकट, वोटों में नहीं
2022 विधानसभा:
Congress — 17/182
लेकिन वोट शेयर:
लगभग 27%
था।
2024 लोकसभा:
1/26
इसलिए गुजरात में कांग्रेस को राजनीतिक रूप से समाप्त कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है।
उसके पास अभी भी लाखों मतदाताओं का बड़ा आधार है, लेकिन:
Vote → Seat conversion
बेहद खराब है।
यह आंध्र प्रदेश से बिल्कुल अलग प्रकार की कमजोरी है।
मध्य प्रदेश : 40% विधानसभा वोट, लोकसभा में शून्य
2023 विधानसभा:
Congress — 66/230
वोट:
लगभग 40%
फिर भी 2024 लोकसभा:
0/29
इसलिए मध्य प्रदेश कांग्रेस की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक विडंबनाओं में है—वह राज्य की निर्विवाद दूसरी बड़ी पार्टी है और बहुत बड़ा वोट आधार रखती है, लेकिन संसद में राज्य से उसका प्रतिनिधित्व शून्य है।
राजस्थान : 2024 की बड़ी वापसी
2014:
Congress 0/25
2019:
0/25
लेकिन 2024:
8 सीट
कांग्रेस ने जीतीं।
इसलिए राजस्थान उस धारणा को तोड़ता है कि 2014 के बाद कांग्रेस का पतन अपरिवर्तनीय रहा।
राजस्थान अभी भी भारत के सबसे स्पष्ट:
BJP बनाम Congress
राज्यों में है।
छत्तीसगढ़ : स्पष्ट द्विदलीय प्रतिस्पर्धा
यहाँ कांग्रेस और भाजपा राज्य राजनीति की दो मुख्य शक्तियाँ हैं।
कांग्रेस 2018 में भारी बहुमत से सत्ता में आई, लेकिन 2023 में भाजपा ने सरकार वापस हासिल कर ली।
2024 लोकसभा में कांग्रेस केवल:
1 सीट
जीत सकी।
फिर भी विधानसभा वोट आधार इतना बड़ा है कि उसे कमजोर तीसरी शक्ति नहीं कहा जा सकता।
हरियाणा : कांग्रेस मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनी हुई है
हरियाणा में क्षेत्रीय दल मौजूद हैं, लेकिन हाल के चुनावों ने मुकाबले को काफी हद तक:
BJP बनाम Congress
में केंद्रित कर दिया है।
BJP 5
Congress 5
कांग्रेस ने 2019 के शून्य से:
0 → 5
की वापसी की।
यह 2024 के सबसे उल्लेखनीय राज्यवार पुनरुत्थानों में था।
असम : कांग्रेस की चुनौती कायम, लेकिन 2026 में BJP मजबूत
2026 विधानसभा चुनाव में ECI के अनुसार:
BJP — 82
Congress — 19
BOPF — 10
AGP — 10
रहे। (Election Commission of India"))
लोकसभा में कांग्रेस:
2014 — 3 2019 — 3 2024 — 3
यानी संसदीय संख्या आश्चर्यजनक रूप से स्थिर रही।
लेकिन विधानसभा में भाजपा की बढ़ी हुई शक्ति बताती है कि कांग्रेस के सामने असम में राज्य सत्ता की राह कठिन हुई है।
पश्चिम बंगाल : 2026 ने पुरानी राजनीतिक तस्वीर बदल दी
BJP — 207
TMC — 80
Congress — 2
अन्य — 5
इसलिए कांग्रेस बंगाल की मुख्य सत्ता-प्रतिस्पर्धा से लगभग बाहर है।
लोकसभा में भी उसका क्रम:
4 → 2 → 1
अर्थात 2014 से 2024 तक कांग्रेस का संसदीय आधार भी लगातार घटा।
लेकिन यहाँ कांग्रेस के पतन का इतिहास मुख्यतः TMC के उभार से जुड़ा है; बाद के चरण में BJP ने राज्य की दूसरी और फिर 2026 में प्रमुख सत्ता शक्ति के रूप में विस्तार किया।
तमिलनाडु : कांग्रेस की गठबंधन-निर्भर शक्ति
2026 विधानसभा चुनाव ने तमिलनाडु की राजनीति बदल दी।
ECI परिणाम:
TVK — 108
DMK — 59
AIADMK — 47
Congress — 5
विजय 10 मई 2026 से मुख्यमंत्री हैं; तमिलनाडु राजभवन की आधिकारिक विज्ञप्ति भी उन्हें मुख्यमंत्री दर्ज करती है।
लेकिन लोकसभा में कांग्रेस की स्थिति काफी बेहतर रही:
2014 — 0
2019 — 8
2024 — 9
इससे एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने आता है:
गठबंधन कांग्रेस को संसदीय रूप से मजबूत बना सकता है, जबकि उसी राज्य में उसकी स्वतंत्र विधानसभा शक्ति बहुत सीमित हो सकती है।
पंजाब : विधानसभा AAP की, लोकसभा में कांग्रेस सबसे बड़ी
2017 विधानसभा में कांग्रेस:
77
सीटों पर थी।
2022 में:
18
और बाद के बदलावों के बाद उसकी संख्या और सीमित हुई।
लेकिन 2024 लोकसभा में:
Congress — 7/13
और AAP — 3 रही।
इसलिए पंजाब में कांग्रेस की स्थिति को केवल विधानसभा से नहीं मापा जा सकता।
यहाँ कांग्रेस का प्रमुख राज्य प्रतिद्वंद्वी:
AAP
है, BJP नहीं।
झारखंड : सत्ता में कांग्रेस, लेकिन नेतृत्व JMM का
2024 विधानसभा:
JMM — 34
Congress — 16
BJP — 21
RJD — 4
CPI(ML) — 2
कांग्रेस सत्ता गठबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है लेकिन मुख्यमंत्री JMM के हेमंत सोरेन हैं।
इसलिए झारखंड:
Congress as junior governing partner
का प्रमुख उदाहरण है।
Congress — 2
JMM — 3
BJP — 8
AJSU — 1
जम्मू-कश्मीर : कांग्रेस सहयोगी, NC प्रमुख शक्ति
2024 विधानसभा चुनाव के बाद:
NC — 41
BJP — 29
Congress — 6
PDP — 4
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला हैं।
इसलिए कांग्रेस सत्ता-समर्थक राजनीतिक खेमे में है लेकिन सरकार की केंद्रीय शक्ति NC है।
यहाँ सबसे नाटकीय गिरावट वास्तव में PDP की हुई:
2014 — 28
से
2024 — 4
जबकि NC:
15 → 41
पर पहुँची।
ओडिशा : BJP और BJD के बीच कांग्रेस तीसरी शक्ति
2024 विधानसभा में कांग्रेस:
14/147
और लोकसभा:
1/21
कांग्रेस का वोट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ, लेकिन राज्य की मुख्य राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लंबे समय तक BJD और बाद में BJP-BJD के बीच केंद्रित रही।
इसलिए कांग्रेस यहाँ न भाजपा की अकेली मुख्य प्रतिद्वंद्वी है, न राज्य सत्ता की तत्काल प्रमुख दावेदार।
पूर्वोत्तर : कांग्रेस के पुराने साम्राज्य का सबसे बड़ा संकुचन
पूर्वोत्तर कभी कांग्रेस की सबसे बड़ी क्षेत्रीय ताकतों में था।
आज तस्वीर राज्य-दर-राज्य अलग है।
असम
Congress अभी भी मुख्य विपक्षी शक्ति, लेकिन 2026 में केवल 19/126। (Election Commission of India"))
अरुणाचल प्रदेश
विधानसभा में कांग्रेस लगभग एक सीट की शक्ति तक सिमटी।
नागालैंड
विधानसभा:
0
लेकिन 2024 लोकसभा:
1/1
इसलिए संगठन और संसदीय जनादेश में भारी अंतर।
मिजोरम
कांग्रेस का क्रम:
2013 — 34/40
2018 — 5
2023 — 1
34 → 1
यह भारत में कांग्रेस के सबसे बड़े राज्य-स्तरीय संकुचनों में है।
लेकिन कांग्रेस की जमीन यहाँ BJP से अधिक MNF और फिर ZPM ने ली।
सिक्किम
कांग्रेस:
विधानसभा — 0
लोकसभा — 0
और विधानसभा वोट लगभग नगण्य।
त्रिपुरा
विधानसभा — 3
लोकसभा — 0
विधानसभा वोट लगभग 9% से कम।
मणिपुर
विधानसभा में कांग्रेस कमजोर है, लेकिन 2024 लोकसभा में:
2/2
जीतना उसके लिए महत्वपूर्ण पुनरुत्थान था।
मेघालय
कांग्रेस की पुरानी संगठनात्मक शक्ति काफी कम हुई है और NPP सहित क्षेत्रीय दल केंद्रीय भूमिका में हैं।
कहाँ कांग्रेस का BJP से सीधा मुकाबला है?
2026 की राजनीतिक स्थिति के आधार पर सबसे स्पष्ट राज्य हैं:
मध्य प्रदेश राजस्थान छत्तीसगढ़ हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड गुजरात हरियाणा कर्नाटक असम
तेलंगाना को उभरती हुई त्रिकोणीय/परिवर्तनशील श्रेणी में रखा जा सकता है, जहाँ Congress, BJP और BRS तीनों महत्वपूर्ण हैं।
इन राज्यों में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि उसे पहले किसी क्षेत्रीय दल को विस्थापित करके मुख्य विपक्ष बनने की जरूरत नहीं। वह पहले से ही सत्ता या मुख्य विपक्ष की प्रमुख दावेदार है।
जहाँ क्षेत्रीय दल कांग्रेस की राह में केंद्रीय हैं
यह दूसरी भारत-व्यापी पट्टी है:
उत्तर प्रदेश — SP
बिहार — RJD/JD(U) की मजबूत क्षेत्रीय राजनीति
पंजाब — AAP
आंध्र प्रदेश — TDP/YSRCP
तमिलनाडु — TVK/DMK/AIADMK
झारखंड — JMM
जम्मू-कश्मीर — NC/PDP
मिजोरम — ZPM/MNF
सिक्किम — SKM
मेघालय — NPP
नागालैंड — NDPP
पुडुचेरी — AINRC/DMK
यह कांग्रेस की राष्ट्रीय चुनौती का वह हिस्सा है जिसे BJP बनाम Congress आंकड़ों से नहीं समझा जा सकता।
क्षेत्रीय दल की जूनियर सहयोगी बनी कांग्रेस
तीन महत्वपूर्ण मॉडल हैं।
झारखंड
JMM 34 बनाम Congress 16।
जम्मू-कश्मीर
NC 41 बनाम Congress 6।
उत्तर प्रदेश
सरकार में नहीं, लेकिन विपक्षी चुनावी गठबंधन में SP स्पष्ट रूप से बड़ी शक्ति।
इसके अतिरिक्त बिहार में RJD और तमिलनाडु में लंबे समय तक DMK के साथ कांग्रेस की स्थिति इसी प्रकार गठबंधन-निर्भर रही है।
यह राष्ट्रीय पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक प्रश्न पैदा करता है—क्या गठबंधन उसे सीटें दिला रहे हैं लेकिन स्वतंत्र राज्य संगठन को छोटा भी कर रहे हैं?
उत्तर हर राज्य में अलग होगा।
जहाँ क्षेत्रीय दलों ने कांग्रेस की पुरानी जमीन ले ली
सबसे स्पष्ट उदाहरण:
आंध्र प्रदेश
Congress → क्षेत्रीय ध्रुव TDP/YSRCP।
पंजाब
Congress की 2017 की 77 सीटों वाली सरकार → AAP का भारी बहुमत।
मिजोरम
Congress 34 → MNF → ZPM।
सिक्किम
राजनीति लगभग पूर्णतः क्षेत्रीय दल-केंद्रित।
पश्चिम बंगाल
पहले Left और Congress की जमीन का बड़ा हिस्सा TMC ने लिया; बाद में BJP का उभार।
उत्तर प्रदेश
कांग्रेस का पुराना सामाजिक गठबंधन कई दशकों में SP, BSP और BJP के बीच बँट गया।
इसलिए कांग्रेस के पतन का कारण पूरे भारत में एक समान नहीं है।
विधानसभा और लोकसभा दोनों में सबसे गंभीर कमजोरी
सबसे स्पष्ट समूह:
आंध्र प्रदेश
MLA 0/175 | MP 0/25
सिक्किम
MLA 0/32 | MP 0/1
दिल्ली
MLA 0/70 | MP 0/7
अरुणाचल प्रदेश
MLA लगभग 1/60 | MP 0/2
त्रिपुरा
MLA 3/60 | MP 0/2
इन राज्यों में केवल चुनावी हार नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व का गंभीर संकट दिखाई देता है।
जहाँ सीटें कम लेकिन वोट आधार बचा हुआ है
यह अलग श्रेणी है और इसे उपरोक्त राज्यों के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
मध्य प्रदेश
Assembly vote \~40%, लेकिन LS 0।
उत्तराखंड
Assembly vote \~38%, LS 0।
गुजरात
Assembly vote \~27%, LS 1।
इन राज्यों में कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए शून्य से संगठन खड़ा करने की जरूरत नहीं। बड़ा मतदाता आधार पहले से मौजूद है।
चुनौती उसे सीटों में बदलने की है।
पुडुचेरी : विधानसभा में एक, लोकसभा में एक
2026 में ECI के अनुसार:
AINRC 12 DMK 5 BJP 4 TVK 2 Congress 1
रहे।
इसलिए कांग्रेस:
Assembly 1/30
लेकिन उसकी संसदीय उपस्थिति अधिक महत्वपूर्ण रही है।
यह फिर साबित करता है कि विधानसभा सीटों से अकेले कांग्रेस की राष्ट्रीय शक्ति नहीं मापी जा सकती।
कांग्रेस की दक्षिण भारत रणनीतिक शक्ति
यदि 2026 के भारत का नक्शा देखें तो कांग्रेस की सबसे मजबूत भौगोलिक पट्टी दक्षिण में दिखाई देती है।
कर्नाटक
कांग्रेस सरकार।
तेलंगाना
केरल
2026 में UDF/Congress सत्ता में।
तमिलनाडु
स्वतंत्र विधानसभा शक्ति सीमित, लेकिन 2024 में 9 लोकसभा सांसद।
इसके विपरीत:
आंध्र प्रदेश
लगभग पूर्ण राजनीतिक हाशिया।
इसलिए “दक्षिण भारत में कांग्रेस मजबूत/कमजोर” दोनों सामान्यीकरण गलत होंगे।
वास्तविक स्थिति है:
कर्नाटक–तेलंगाना–केरल में मजबूत; तमिलनाडु में गठबंधन-आधारित संसदीय ताकत; आंध्र में गंभीर संकट।
हिंदी पट्टी : सबसे विरोधाभासी तस्वीर
मध्य प्रदेश
वोट मजबूत, सत्ता और लोकसभा कमजोर।
राजस्थान
मुख्य विपक्ष और 2024 में संसदीय वापसी।
छत्तीसगढ़
मुख्य विपक्ष।
उत्तर प्रदेश
स्वतंत्र विधानसभा आधार अत्यंत कमजोर, लेकिन SP गठबंधन से LS वापसी।
बिहार
RJD-निर्भर विपक्षी गठबंधन में सीमित शक्ति।
हिमाचल
सरकार कांग्रेस की, लोकसभा BJP की।
उत्तराखंड
बड़ा वोट आधार, लोकसभा लगातार शून्य।
हरियाणा
BJP की सीधी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी।
इसलिए हिंदी पट्टी में कांग्रेस की एक समान स्थिति नहीं है।
पश्चिम भारत
महाराष्ट्र
2
1
2024:
13
यह कांग्रेस की सबसे बड़ी लोकसभा राज्यवार वापसी थी।
गुजरात
सीटों में बेहद कमजोर, लेकिन वोट आधार अभी भी उल्लेखनीय।
गोवा
2014 में शून्य, 2019 और 2024 में कांग्रेस एक-एक सीट जीतने में सफल रही।
इस क्षेत्र में महाराष्ट्र कांग्रेस की 2024 वापसी का मुख्य केंद्र था।
पूर्वी भारत
यह कांग्रेस के लिए कठिन भूगोल है।
पश्चिम बंगाल
2026 विधानसभा में केवल 2। (Election Commission of India"))
ओडिशा
तीसरी शक्ति।
बिहार
6 विधायक।
झारखंड
16 विधायक और सत्ता गठबंधन में भागीदारी।
इसलिए पूर्वी भारत में कांग्रेस की सबसे मजबूत संस्थागत स्थिति झारखंड में है—वह भी JMM के नेतृत्व में।
कांग्रेस की वापसी को नजरअंदाज करना भी गलत होगा
2014–26 की कहानी केवल पतन की नहीं है।
प्रमुख वापसी:
कर्नाटक — 2023
तेलंगाना — 2023
केरल — 2026
राजस्थान — 2024 लोकसभा
महाराष्ट्र — 2024 लोकसभा
हरियाणा — 2024 लोकसभा
उत्तर प्रदेश — 2024 लोकसभा
मणिपुर — 2024 लोकसभा
इसी कारण 2024 में कांग्रेस 52 से:
99
लेकिन 99 का अर्थ 2009 जैसी अखिल भारतीय कांग्रेस नहीं
यह शायद इस पूरे अध्ययन का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष है।
कांग्रेस ने 2024 में अपनी सीटें लगभग दोगुनी कीं, लेकिन उसकी सीटें अत्यधिक केंद्रित हैं।
99 में 79 सीटें केवल नौ राज्यों से।
दूसरी तरफ कई बड़े राजनीतिक क्षेत्रों में कांग्रेस:
शून्य, एक अंक या गठबंधन-निर्भर स्थिति
में है।
इसलिए 2024 को:
राष्ट्रीय पुनरुत्थान की शुरुआत
कहा जा सकता है, लेकिन:
पूर्ण भौगोलिक पुनर्स्थापना
नहीं।
वोट शेयर बनाम सीट : कांग्रेस की स्थिति के चार मॉडल
कांग्रेस को चार वर्गों में बाँटना सबसे उपयोगी है।
मॉडल 1 — वोट भी मजबूत, सीट भी मजबूत
कर्नाटक, तेलंगाना, केरल जैसे राज्य।
मॉडल 2 — वोट मजबूत, सीट conversion कमजोर
मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड।
मॉडल 3 — गठबंधन के कारण लोकसभा में शक्ति, स्वतंत्र विधानसभा आधार कमजोर
उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु जैसे उदाहरण।
मॉडल 4 — वोट और सीट दोनों गंभीर संकट में
आंध्र प्रदेश, सिक्किम, दिल्ली, अरुणाचल और कुछ हद तक त्रिपुरा।
यही वर्गीकरण केवल “कांग्रेस मजबूत/कमजोर” कहने से कहीं अधिक उपयोगी है।
Master Data Table — अगस्त 2026
नीचे की तालिका शोध के भविष्य के अपडेट का आधार बन सकती है। “INC MLA” मुख्यतः नवीनतम चुनाव/उपलब्ध वर्तमान स्थिति को दर्शाता है; दलबदल वाले राज्यों में विधानसभा के आधिकारिक live record को अंतिम प्रकाशन से पहले देखना चाहिए।
| राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | विधानसभा | कांग्रेस विधायक/चुनावी शक्ति | लोकसभा | कांग्रेस सांसद 2024 | कांग्रेस की स्थिति |
|---|---|---|---|---|---|
| आंध्र प्रदेश | 175 | 0 | 25 | 0 | अत्यंत कमजोर |
| अरुणाचल | 60 | 1 | 2 | 0 | अत्यंत कमजोर |
| असम | 126 | 19 (2026) | 14 | 3 | मुख्य विपक्ष |
| बिहार | 243 | 6 | 40 | 3 | RJD-प्रधान विपक्ष |
| छत्तीसगढ़ | 90 | 35 चुनाव में | 11 | 1 | BJP से सीधा मुकाबला |
| गोवा | 40 | सीमित | 2 | 1 | विपक्ष |
| गुजरात | 182 | 17 चुनाव में | 26 | 1 | बड़ा वोट, कम सीट |
| हरियाणा | 90 | 37 चुनाव में | 10 | 5 | BJP से सीधा मुकाबला |
| हिमाचल | 68 | सरकार | 4 | 0 | Congress-BJP द्विध्रुवीय |
| झारखंड | 81 | 16 | 14 | 2 | JMM की सहयोगी |
| कर्नाटक | 224 | 135 चुनाव में | 28 | 9 | कांग्रेस सरकार |
| केरल | 140 | 63 | 20 | 14 | कांग्रेस/UDF सरकार |
| मध्य प्रदेश | 230 | 66 चुनाव में | 29 | 0 | बड़ा वोट, LS शून्य |
| महाराष्ट्र | 288 | 16 चुनाव में | 48 | 13 | गठबंधन विपक्ष |
| मणिपुर | 60 | 5 के आसपास | 2 | 2 | विधानसभा कमजोर, LS मजबूत |
| मेघालय | 60 | सीमित | 2 | 1 | क्षेत्रीय दल प्रधान |
| मिजोरम | 40 | 1 | 1 | 0 | क्षेत्रीय दल प्रधान |
| नागालैंड | 60 | 0 | 1 | 1 | विधानसभा शून्य, LS विजेता |
| ओडिशा | 147 | 14 | 21 | 1 | तीसरी शक्ति |
| पंजाब | 117 | सीमित/मुख्य विपक्ष | 13 | 7 | AAP से मुकाबला |
| राजस्थान | 200 | 69 चुनाव में | 25 | 8 | BJP से सीधा मुकाबला |
| सिक्किम | 32 | 0 | 1 | 0 | लगभग हाशिये पर |
| तमिलनाडु | 234 | 5 (2026) | 39 | 9 | गठबंधन-निर्भर शक्ति |
| तेलंगाना | 119 | 64 चुनाव में | 17 | 8 | कांग्रेस सरकार |
| त्रिपुरा | 60 | 3 | 2 | 0 | कमजोर |
| उत्तर प्रदेश | 403 | 2 | 80 | 6 | SP-प्रधान विपक्षी गठबंधन |
| उत्तराखंड | 70 | 19 चुनाव में | 5 | 0 | BJP से सीधा मुकाबला |
| पश्चिम बंगाल | 294 | 2 (2026) | 42 | 1 | मुख्य मुकाबले से बाहर |
| दिल्ली | 70 | 0 | 7 | 0 | अत्यंत कमजोर |
| जम्मू-कश्मीर | 90 | 6 | 5 | 0 | NC सहयोगी |
| पुडुचेरी | 30 | 1 (2026) | 1 | 1 | क्षेत्रीय गठबंधन राजनीति |
ECI राज्यों की विधानसभा अवधि तथा विधानसभा/लोकसभा/राज्यसभा सीट संख्या की आधिकारिक सूची भी रखता है, जो इस मास्टर तालिका के भविष्य के रखरखाव में उपयोगी होगी।
वर्तमान कांग्रेस के राजनीतिक भूगोल के दस प्रमुख निष्कर्ष
पहला, कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व 2014 के 44 से 2024 में 99 हुआ है। इसलिए दस वर्षों को केवल निरंतर पतन कहना सही नहीं।
दूसरा, 2024 की वापसी अत्यधिक भौगोलिक रूप से केंद्रित है—99 में 79 सीटें नौ राज्यों से।
तीसरा, कांग्रेस का सबसे गंभीर बड़ा-राज्य संकट आंध्र प्रदेश में है—175 विधानसभा और 25 लोकसभा सीटों में उसका प्रतिनिधित्व शून्य है।
चौथा, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का स्वतंत्र विधानसभा आधार अत्यंत छोटा है, लेकिन 2024 में SP गठबंधन के जरिए संसदीय वापसी हुई।
पाँचवाँ, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड जैसे राज्यों में सीटों की कमजोरी को जनाधार समाप्त होना नहीं समझना चाहिए; विधानसभा वोट शेयर अभी भी बड़ा है।
छठा, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल कांग्रेस के दक्षिणी पुनरुत्थान की केंद्रीय धुरी बन चुके हैं।
सातवाँ, कांग्रेस की पुरानी जमीन हर जगह BJP ने नहीं ली। अनेक राज्यों में क्षेत्रीय दलों ने उसे विस्थापित किया।
आठवाँ, पूर्वोत्तर में कांग्रेस का ऐतिहासिक संकुचन बहुत बड़ा है, लेकिन मणिपुर और नागालैंड के 2024 परिणाम बताते हैं कि विधानसभा की कमजोरी हमेशा लोकसभा में शून्य में नहीं बदलती।
नौवाँ, कई राज्यों में कांग्रेस की भविष्य की राजनीति गठबंधन पर निर्भर है—UP में SP, Jharkhand में JMM, J&K में NC और अन्य राज्यों में क्षेत्रीय सहयोगी इसकी भूमिका निर्धारित करते हैं।
दसवाँ, कांग्रेस की सबसे बड़ी राष्ट्रीय चुनौती केवल BJP को हराना नहीं है; कई राज्यों में उसे पहले स्वयं को मुख्य राजनीतिक विकल्प के रूप में पुनर्स्थापित करना होगा।
क्या कांग्रेस राष्ट्रीय दल रहते हुए क्षेत्रीय pockets में सिमट रही है?
उत्तर सीधा “हाँ” या “नहीं” नहीं है।
कांग्रेस आज भी अखिल भारतीय उपस्थिति वाला दल है। उसका संगठन लगभग पूरे भारत में मौजूद है; वह चार महत्वपूर्ण राज्यों में सत्ता में है; 2024 में 99 लोकसभा सीटें जीती; और दक्षिण से उत्तर तक अनेक राज्यों में मुख्य विपक्षी शक्ति है।
लेकिन चुनावी शक्ति की दृष्टि से उसका भूगोल पहले की तुलना में अधिक असमान हो गया है।
एक तरफ:
Kerala + Karnataka + Telangana + Maharashtra + Tamil Nadu + Rajasthan + Punjab + UP + Haryana
उसकी 2024 की लगभग 80% लोकसभा शक्ति देते हैं।
दूसरी तरफ:
Andhra Pradesh + Delhi + Sikkim + Tripura + Arunachal
जैसे क्षेत्रों में विधानसभा और लोकसभा दोनों स्तरों पर गंभीर कमजोरी है।
इसलिए अधिक सटीक निष्कर्ष होगा:
कांग्रेस राष्ट्रीय दल बनी हुई है, लेकिन उसकी प्रभावी चुनावी शक्ति अब समान अखिल भारतीय विस्तार के बजाय कुछ मजबूत राज्यीय क्षेत्रों में अधिक केंद्रित है।
कांग्रेस के लिए असली प्रश्न : वोट की समस्या या संगठन की?
उत्तर राज्य के अनुसार बदलता है।
आंध्र प्रदेश
वोट + संगठन + सीट—तीनों संकट।
उत्तर प्रदेश
स्वतंत्र संगठन और वोट संकट, लेकिन गठबंधन से संसदीय अवसर।
गुजरात
वोट मौजूद, सीट conversion संकट।
मध्य प्रदेश
बहुत बड़ा वोट मौजूद, लेकिन सत्ता और संसदीय conversion कमजोर।
उत्तराखंड
वोट मौजूद, लोकसभा conversion शून्य।
तमिलनाडु
गठबंधन से राष्ट्रीय शक्ति, स्वतंत्र राज्य शक्ति सीमित।
कर्नाटक/तेलंगाना/केरल
संगठन + वोट + सत्ता—तीनों में मजबूत स्थिति।
इसलिए कांग्रेस के लिए कोई एक राष्ट्रीय चुनावी उपचार संभव नहीं है।
भविष्य में इस शोध को कैसे अपडेट किया जाए
इस अध्याय को स्थायी वेबसाइट शोध सामग्री बनाए रखने के लिए पुराने आंकड़ों को कभी हटाना नहीं चाहिए।
हर राज्य के लिए क्रम होना चाहिए:
पिछला चुनाव → नवीनतम चुनाव → वर्तमान स्थिति
उदाहरण:
Kerala: 2016 → 2021 → 2026
Bihar: 2020 → 2025 → वर्तमान
West Bengal: 2021 → 2026
इससे नया चुनाव आने पर पुरानी सामग्री “गलत” नहीं होती; वह ऐतिहासिक डेटा बन जाती है।
हर राज्य के ऊपर केवल:
Current Position — Updated DD/MM/YYYY
बदलना होगा।
स्रोत और शोध-पद्धति
इस अध्ययन के लिए प्राथमिक स्रोत-क्रम इस प्रकार रखा जाना चाहिए:
1. Election Commission of India — लोकसभा और विधानसभा परिणाम तथा statistical reports. ECI का केंद्रीय statistical archive पुराने और नए चुनावों की आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध कराता है।
2. ECI General Election 2024 Statistical Reports — राज्यवार सीट और valid votes।
3. ECI 2019 General Election Statistical Report.
4. Digital Sansad — वर्तमान लोकसभा सदस्य।
5. Digital Sansad — वर्तमान राज्यसभा सदस्य।
6. संबंधित राज्य विधानसभा/NeVA portals — वर्तमान विधायक और party position।
7. राज्य सरकार/मुख्यमंत्री सचिवालय/राजभवन — वर्तमान मुख्यमंत्री और नेतृत्व परिवर्तन।
उदाहरण के लिए बिहार मुख्यमंत्री सचिवालय 18 अगस्त 2026 तक अपडेट प्रोफाइल में सम्राट चौधरी को वर्तमान मुख्यमंत्री और 15 अप्रैल 2026 को पदभार ग्रहण करने वाला दर्ज करता है।
कर्नाटक में डी.के. शिवकुमार के 3 जून 2026 के शपथ ग्रहण की केंद्र सरकार ने आधिकारिक पुष्टि की है।
2026 के नए चुनावों के लिए सीधे ECI परिणाम उपयोग किए गए हैं—केरल में कांग्रेस 63, पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 2, तमिलनाडु में कांग्रेस 5 और पुडुचेरी में कांग्रेस 1 सीट पर रही।
निष्कर्ष
2014 से 2026 की कांग्रेस की कहानी एक सीधी गिरावट की रेखा नहीं है।
यह तीन समानांतर प्रक्रियाओं की कहानी है।
एक प्रक्रिया में कांग्रेस ने विशाल राजनीतिक भूगोल खोया। आंध्र प्रदेश इसका सबसे चरम उदाहरण है। उत्तर प्रदेश में उसका स्वतंत्र विधानसभा आधार अत्यंत छोटा हुआ। पूर्वोत्तर के कई पुराने गढ़ हाथ से निकले। पश्चिम बंगाल में वह मुख्य राजनीतिक मुकाबले से बाहर होती गई।
दूसरी प्रक्रिया में कांग्रेस का पुराना स्थान भाजपा ने नहीं बल्कि क्षेत्रीय दलों ने लिया। पंजाब में AAP, आंध्र में TDP-YSRCP, UP में SP-BSP के लंबे उभार, मिजोरम में MNF-ZPM, सिक्किम में क्षेत्रीय शक्तियाँ, झारखंड में JMM और जम्मू-कश्मीर में NC जैसे उदाहरण भारतीय राजनीति में कांग्रेस के संकुचन की अलग कहानी बताते हैं।
तीसरी प्रक्रिया पुनरुत्थान की है। 2023 में कर्नाटक और तेलंगाना, 2024 लोकसभा में महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश तथा 2026 में केरल ने दिखाया कि कांग्रेस का चुनावी आधार अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं हुआ है।
इसीलिए 44 → 52 → 99 केवल तीन संख्याएँ नहीं हैं।
वे बताती हैं कि कांग्रेस 2014 के ऐतिहासिक निम्न स्तर से ऊपर आई है।
लेकिन दूसरी संख्या उतनी ही महत्वपूर्ण है:
99 में 79 सीटें केवल नौ राज्यों से।
और तीसरा तथ्य कांग्रेस की संरचनात्मक चुनौती बताता है:
आंध्र प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड, त्रिपुरा, सिक्किम और दिल्ली में 2014, 2019 और 2024—तीनों लोकसभा चुनावों में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी।
इनमें भी कारण अलग-अलग हैं। हिमाचल और उत्तराखंड में कांग्रेस का बड़ा विधानसभा वोट आधार मौजूद है; आंध्र और सिक्किम में संकट कहीं अधिक गहरा है।
इसलिए 2026 में कांग्रेस को समझने के लिए “राष्ट्रीय वोट प्रतिशत” या “लोकसभा में 99 सांसद” पर्याप्त नहीं हैं। सही तस्वीर राज्यवार राजनीतिक भूगोल से निकलती है।
जहाँ BJP से सीधी लड़ाई है, वहाँ कांग्रेस का कार्य वोट को सत्ता में बदलना है। जहाँ वोट है लेकिन सीट नहीं, वहाँ conversion सुधारना है। जहाँ क्षेत्रीय दल प्रमुख हो चुका है, वहाँ स्वतंत्र राजनीतिक स्थान वापस बनाना है। और जहाँ वोट तथा संगठन दोनों लगभग समाप्त हो चुके हैं, वहाँ पुनर्निर्माण लगभग शून्य से करना होगा।
यही 2014–2026 के बीच कांग्रेस के बदलते राजनीतिक भूगोल की सबसे महत्वपूर्ण कहानी है।
प्राथमिक और आधिकारिक आधार
भारत निर्वाचन आयोग के लोकसभा व विधानसभा सांख्यिकीय प्रतिवेदन; निर्वाचन आयोग के 2026 राज्य चुनाव परिणाम; लोकसभा और राज्यसभा के आधिकारिक पोर्टल; संबंधित विधानसभाओं/NeVA के सदस्य अभिलेख; मुख्यमंत्री सचिवालयों और पत्र सूचना कार्यालय की आधिकारिक सूचनाएँ।
जहाँ किसी तथ्य पर आधिकारिक तथा द्वितीयक स्रोतों में अंतर है, वहाँ तिथि, चुनाव-परिणाम और वर्तमान स्थिति को अलग रखकर पढ़ा गया है।