# भारत का सोलहवाँ लोकसभा चुनाव 2014 : नरेंद्र मोदी का उदय, भाजपा को पूर्ण बहुमत और कांग्रेस की ऐतिहासिक पराजय

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — सोलहवाँ अध्याय

भारत का सोलहवाँ लोकसभा आम चुनाव 7 अप्रैल से 12 मई 2014 के बीच नौ चरणों में हुआ। 16 मई को परिणाम घोषित हुए। इस चुनाव ने भारत की राजनीति में बड़ा परिवर्तन किया। दस वर्षों से केंद्र में शासन कर रहे कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को पराजय मिली और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने पहली बार अपने दम पर लोकसभा में पूर्ण बहुमत हासिल किया।

**भाजपा ने 543 में से 282 सीटें जीतीं**, जबकि कांग्रेस 2009 की 206 सीटों से घटकर केवल 44 पर आ गई। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को कुल 336 सीटें प्राप्त हुईं।

भाजपा को 31.00 प्रतिशत और कांग्रेस को 19.31 प्रतिशत राष्ट्रीय मत मिले। लगभग 66.44 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो उस समय तक के सभी लोकसभा चुनावों में सर्वाधिक था।

26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 1984 के बाद पहली बार किसी एक राजनीतिक दल को लोकसभा में अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त हुआ था।

कुल लोकसभा सीटें

## 543

भाजपा की सीटें

## 282

कांग्रेस की सीटें

## 44

एनडीए की सीटें

## 336

## 1. सोलहवें लोकसभा चुनाव के प्रमुख आँकड़े

| चुनाव संबंधी विवरण | आँकड़े |
| --- | --- |
| लोकसभा | सोलहवीं |
| मतदान की अवधि | 7 अप्रैल–12 मई 2014 |
| मतदान के चरण | 9 |
| मतगणना | 16 मई 2014 |
| निर्वाचित लोकसभा सीटें | 543 |
| बहुमत का आँकड़ा | 272 |
| सामान्य सीटें | 412 |
| अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित | 84 |
| अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित | 47 |
| पंजीकृत मतदाता | 83,40,82,814 |
| मतदान करने वाले | 55,41,75,255 |
| मतदान प्रतिशत | 66.44% |
| चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार | 8,251 |
| महिला उम्मीदवार | 668 |
| निर्वाचित महिला सांसद | 62 |
| भाग लेने वाले राजनीतिक दल | 464 |
| राष्ट्रीय दल | 6 |
| राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त दल | 39 |
| अन्य पंजीकृत दल | 419 |
| मतदान केंद्र | लगभग 9.28 लाख |
| भाजपा की सीटें | 282 |
| कांग्रेस की सीटें | 44 |
| चुनाव से पहले प्रधानमंत्री | डॉ. मनमोहन सिंह |
| चुनाव के बाद प्रधानमंत्री | नरेंद्र मोदी |
| मुख्य निर्वाचन आयुक्त | वी. एस. संपत |

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग का 2014 चुनाव सांख्यिकीय विवरण तथा लोकसभा सचिवालय।

## 2. 2014 के चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि

2004 से 2014 तक केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। डॉ. मनमोहन सिंह लगातार दस वर्ष प्रधानमंत्री रहे। 2009 में कांग्रेस ने 206 सीटें जीती थीं और यूपीए दूसरी बार सत्ता में आया था।

लेकिन 2009 से 2014 के बीच कई राजनीतिक और आर्थिक घटनाएँ चुनावी बहस का केंद्र बनीं।

1. **2010 — राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के आरोप**

खेल आयोजन में विभिन्न ठेकों और खर्च को लेकर जाँचें तथा राजनीतिक विवाद सामने आए। 2. **2010–12 — 2जी स्पेक्ट्रम और कोयला आवंटन विवाद**

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्टों से दूरसंचार स्पेक्ट्रम तथा कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े सवाल राष्ट्रीय राजनीति में प्रमुख बने। आरोपों और बाद के न्यायिक निर्णयों में अंतर है। 3. **2011 — अन्ना हजारे का भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन**

लोकपाल कानून की माँग को लेकर देश के विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हुए। इस आंदोलन से अरविंद केजरीवाल सहित कई नेताओं की राजनीतिक पहचान बढ़ी। 4. **2012 — निर्भया घटना और देशव्यापी आंदोलन**

दिल्ली में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद व्यापक प्रदर्शन हुए। 2013 में आपराधिक कानून में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए। 5. **2012–13 — आर्थिक चुनौतियाँ**

महँगाई, रुपये की विनिमय दर, आर्थिक वृद्धि और रोजगार से जुड़े प्रश्नों पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस हुई। 6. **सितंबर 2013 — नरेंद्र मोदी भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित**

भाजपा ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया। 7. **2013 — पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव**

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, दिल्ली और मिजोरम में चुनाव हुए। भाजपा ने राजस्थान और मध्य प्रदेश में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया तथा छत्तीसगढ़ में भी सरकार बनाई। 8. **फरवरी 2014 — आंध्र प्रदेश पुनर्गठन कानून**

संसद ने तेलंगाना के गठन का कानून पारित किया। इस कारण आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की राजनीतिक परिस्थितियाँ चुनाव में महत्वपूर्ण थीं।

## 3. चुनाव मैदान में प्रमुख राजनीतिक दल और उनके नेता

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण जेटली |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | सोनिया गांधी, राहुल गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह |
| बहुजन समाज पार्टी | मायावती |
| समाजवादी पार्टी | मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव |
| आम आदमी पार्टी | अरविंद केजरीवाल |
| अन्नाद्रमुक | जे. जयललिता |
| तृणमूल कांग्रेस | ममता बनर्जी |
| बीजू जनता दल | नवीन पटनायक |
| तेलुगु देशम पार्टी | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| तेलंगाना राष्ट्र समिति | के. चंद्रशेखर राव |
| वाईएसआर कांग्रेस पार्टी | वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी |
| शिवसेना | उद्धव ठाकरे |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | शरद पवार |
| लोक जनशक्ति पार्टी | रामविलास पासवान |
| राष्ट्रीय जनता दल | लालू प्रसाद यादव |
| जनता दल (यूनाइटेड) | नीतीश कुमार, शरद यादव |
| राष्ट्रीय लोक समता पार्टी | उपेंद्र कुशवाहा |
| अपना दल | अनुप्रिया पटेल |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | प्रकाश करात, सीताराम येचुरी |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | ए. बी. बर्धन |
| डीएमके | एम. करुणानिधि, एम. के. स्टालिन |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल |
| इंडियन नेशनल लोकदल | ओमप्रकाश चौटाला |
| असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | बदरुद्दीन अजमल |
| जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी | मुफ्ती मोहम्मद सईद, महबूबा मुफ्ती |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | शिबू सोरेन, हेमंत सोरेन |
| ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन | असदुद्दीन ओवैसी |

इन नामों में संबंधित दलों के औपचारिक अध्यक्षों के साथ प्रमुख प्रचारक, मुख्यमंत्री और संसदीय नेता भी शामिल हैं।

**एक महत्वपूर्ण तथ्य:** 2014 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह थे। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी थे। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी थीं, जबकि राहुल गांधी पार्टी के उपाध्यक्ष और प्रमुख चुनाव प्रचारकों में थे।

## 4. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट शेयर मिला?

2014 में भाजपा ने 282 सीटें जीतकर लोकसभा की 51.93 प्रतिशत निर्वाचित सीटें हासिल कीं। राष्ट्रीय वोट शेयर 31 प्रतिशत था।

कांग्रेस को 19.31 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन वह 44 सीटों पर सिमट गई। अन्नाद्रमुक 37 सीटों के साथ तीसरे और तृणमूल कांग्रेस 34 सीटों के साथ चौथे स्थान पर रही।

| राजनीतिक दल | सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | 282 | 31.00% |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 44 | 19.31% |
| अन्नाद्रमुक | 37 | 3.27% |
| तृणमूल कांग्रेस | 34 | 3.84% |
| बीजू जनता दल | 20 | 1.80% |
| शिवसेना | 18 | 1.85% |
| तेलुगु देशम पार्टी | 16 | 2.55% |
| तेलंगाना राष्ट्र समिति | 11 | 1.34% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 9 | 3.25% |
| वाईएसआर कांग्रेस पार्टी | 9 | 2.53% |
| लोक जनशक्ति पार्टी | 6 | 0.41% |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | 6 | 1.56% |
| समाजवादी पार्टी | 5 | 3.47% |
| आम आदमी पार्टी | 4 | 2.05% |
| राष्ट्रीय जनता दल | 4 | 1.34% |
| शिरोमणि अकाली दल | 4 | 0.66% |
| असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट | 3 | 0.42% |
| राष्ट्रीय लोक समता पार्टी | 3 | 0.19% |
| जम्मू-कश्मीर पीडीपी | 3 | 0.13% |
| जनता दल (यूनाइटेड) | 2 | 1.08% |
| जनता दल (सेक्युलर) | 2 | 0.67% |
| इंडियन नेशनल लोकदल | 2 | 0.51% |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | 2 | 0.30% |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | 2 | 0.27% |
| अपना दल | 2 | 0.15% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 1 | 0.78% |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | 1 | 0.33% |
| एमआईएम | 1 | 0.15% |
| बहुजन समाज पार्टी | 0 | 4.14% |
| अन्य विजयी दल और निर्दलीय | 10 | — |

अन्य सीट जीतने वालों में आरएसपी, स्वाभिमानी पक्ष, नगालैंड पीपुल्स फ्रंट, नेशनल पीपुल्स पार्टी, केरल कांग्रेस (एम), ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस और सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट शामिल थे। तीन निर्दलीय उम्मीदवार भी निर्वाचित हुए।

राष्ट्रीय मत प्रतिशत पूर्णांकित हैं और कुछ क्षेत्रीय दलों के लिए स्रोतों में मामूली अंतर संभव है। सीटों की मूल पुष्टि निर्वाचन आयोग के दलवार आँकड़ों से होती है।

## मत प्रतिशत और सीटों के चार विशेष तथ्य

**पहला:** भाजपा को 31 प्रतिशत मत प्राप्त हुए, लेकिन उसने 51.93 प्रतिशत लोकसभा सीटें जीतीं। उसे बहुमत के लिए आवश्यक 272 से दस अधिक सीटें मिलीं।

**दूसरा:** कांग्रेस को भाजपा की तुलना में लगभग 11.69 प्रतिशत अंक कम वोट मिले, लेकिन सीटों में अंतर 238 का रहा।

**तीसरा:** बहुजन समाज पार्टी को 4.14 प्रतिशत राष्ट्रीय वोट मिले, जो अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस से अधिक थे। फिर भी बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी।

**चौथा:** अन्नाद्रमुक और तृणमूल कांग्रेस ने सीमित राज्यों में चुनाव लड़ते हुए क्रमशः 37 और 34 सीटें जीतीं। इससे क्षेत्रीय दलों के मतों के भौगोलिक संकेंद्रण का महत्व स्पष्ट होता है।

## 5. किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें थीं और किस पार्टी को कितनी मिलीं?

2014 के चुनाव में एक विशेष प्रशासनिक परिस्थिति थी। तेलंगाना के गठन का कानून पारित हो चुका था, लेकिन राज्य औपचारिक रूप से **2 जून 2014** को अस्तित्व में आया। मतदान के समय आंध्र प्रदेश अविभाजित था। इसलिए निर्वाचन आयोग की मूल चुनाव तालिका में उसकी 42 सीटों का संयुक्त विवरण मिलता है।

नीचे तुलनात्मक सुविधा के लिए आंध्र प्रदेश की 25 और तेलंगाना क्षेत्र की 17 सीटें अलग दिखाई गई हैं।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | भाजपा | कांग्रेस | अन्य |
| --- | --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 80 | 71 | 2 | 7 |
| महाराष्ट्र | 48 | 23 | 2 | 23 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 2 | 4 | 36 |
| बिहार | 40 | 22 | 2 | 16 |
| तमिलनाडु | 39 | 1 | 0 | 38 |
| मध्य प्रदेश | 29 | 27 | 2 | 0 |
| कर्नाटक | 28 | 17 | 9 | 2 |
| गुजरात | 26 | 26 | 0 | 0 |
| आंध्र प्रदेश (शेष क्षेत्र) | 25 | 2 | 0 | 23 |
| राजस्थान | 25 | 25 | 0 | 0 |
| ओडिशा | 21 | 1 | 0 | 20 |
| केरल | 20 | 0 | 8 | 12 |
| तेलंगाना क्षेत्र | 17 | 1 | 2 | 14 |
| असम | 14 | 7 | 3 | 4 |
| झारखंड | 14 | 12 | 0 | 2 |
| पंजाब | 13 | 2 | 3 | 8 |
| छत्तीसगढ़ | 11 | 10 | 1 | 0 |
| हरियाणा | 10 | 7 | 1 | 2 |
| दिल्ली | 7 | 7 | 0 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 3 | 0 | 3 |
| उत्तराखंड | 5 | 5 | 0 | 0 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 4 | 0 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 1 | 1 | 0 |
| गोवा | 2 | 2 | 0 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 0 | 2 | 0 |
| मेघालय | 2 | 0 | 1 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 0 | 0 | 2 |
| मिजोरम | 1 | 0 | 1 | 0 |
| नगालैंड | 1 | 0 | 0 | 1 |
| सिक्किम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| अंडमान एवं निकोबार | 1 | 1 | 0 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दादरा एवं नगर हवेली | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दमन और दीव | 1 | 1 | 0 | 0 |
| लक्षद्वीप | 1 | 0 | 0 | 1 |
| पुडुचेरी | 1 | 0 | 0 | 1 |
| **कुल** | **543** | **282** | **44** | **217** |

स्रोत: निर्वाचन आयोग के राज्यवार परिणाम। आंध्र प्रदेश–तेलंगाना को अलग दिखाने का आधार संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति है।

## भाजपा ने किन राज्यों की सभी सीटें जीतीं?

गुजरात की सभी 26, राजस्थान की सभी 25, दिल्ली की सभी सात, उत्तराखंड की सभी पाँच और हिमाचल प्रदेश की सभी चार सीटें भाजपा ने जीतीं। गोवा की दोनों सीटों पर भी भाजपा को विजय मिली।

उत्तर प्रदेश में भाजपा और उसके सहयोगी अपना दल ने मिलकर 80 में से 73 सीटें हासिल कीं।

## 6. महत्वपूर्ण राज्यों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों का प्रदर्शन

| राज्य | प्रमुख दलों को मिली सीटें |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | भाजपा 71, सपा 5, कांग्रेस 2, अपना दल 2 |
| बिहार | भाजपा 22, लोजपा 6, राजद 4, रालोसपा 3, कांग्रेस 2, जदयू 2, एनसीपी 1 |
| महाराष्ट्र | भाजपा 23, शिवसेना 18, एनसीपी 4, कांग्रेस 2, स्वाभिमानी पक्ष 1 |
| पश्चिम बंगाल | तृणमूल 34, कांग्रेस 4, माकपा 2, भाजपा 2 |
| मध्य प्रदेश | भाजपा 27, कांग्रेस 2 |
| तमिलनाडु | अन्नाद्रमुक 37, भाजपा 1, पीएमके 1 |
| आंध्र प्रदेश (शेष क्षेत्र) | तेलुगु देशम 15, वाईएसआर कांग्रेस 8, भाजपा 2 |
| तेलंगाना क्षेत्र | टीआरएस 11, कांग्रेस 2, तेलुगु देशम 1, भाजपा 1, वाईएसआर कांग्रेस 1, एमआईएम 1 |
| कर्नाटक | भाजपा 17, कांग्रेस 9, जद (सेक्युलर) 2 |
| गुजरात | भाजपा 26 |
| राजस्थान | भाजपा 25 |
| ओडिशा | बीजद 20, भाजपा 1 |
| केरल | कांग्रेस 8, माकपा 5, मुस्लिम लीग 2, निर्दलीय 2, भाकपा 1, आरएसपी 1, केरल कांग्रेस (एम) 1 |
| असम | भाजपा 7, कांग्रेस 3, एआईयूडीएफ 3, निर्दलीय 1 |
| झारखंड | भाजपा 12, झामुमो 2 |
| पंजाब | अकाली दल 4, आम आदमी पार्टी 4, कांग्रेस 3, भाजपा 2 |
| छत्तीसगढ़ | भाजपा 10, कांग्रेस 1 |
| हरियाणा | भाजपा 7, इनेलो 2, कांग्रेस 1 |
| दिल्ली | भाजपा 7 |
| जम्मू-कश्मीर | भाजपा 3, पीडीपी 3 |

## उत्तर प्रदेश : भाजपा और अपना दल को 73 सीटें

| दल | सीटें | राज्य में वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भाजपा | 71 | 42.32% |
| समाजवादी पार्टी | 5 | 22.18% |
| बहुजन समाज पार्टी | 0 | 19.62% |
| कांग्रेस | 2 | 7.47% |
| अपना दल | 2 | 1.00% |

2009 में उत्तर प्रदेश से कांग्रेस के 21, भाजपा के दस, सपा के 23 और बसपा के 20 सांसद निर्वाचित हुए थे।

2014 में भाजपा की सीटें दस से बढ़कर 71 हो गईं। कांग्रेस की संख्या 21 से घटकर दो, सपा की 23 से घटकर पाँच और बसपा की 20 से शून्य रह गई।

समाजवादी पार्टी के पाँचों निर्वाचित सांसद मुलायम सिंह यादव के परिवार से जुड़े थे। मुलायम सिंह ने मैनपुरी और आजमगढ़, दोनों सीटें जीती थीं; उन्होंने बाद में मैनपुरी सीट छोड़ी। इस कारण पाँच सीटों पर शुरुआती जीत और निर्वाचित व्यक्तियों की गणना को अलग समझना चाहिए।

## 7. चुनाव की आठ प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

**1. नरेंद्र मोदी पहली बार राष्ट्रीय चुनाव का नेतृत्व कर रहे थे**

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी सितंबर 2013 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित किए गए। उन्होंने देशभर में बड़ी संख्या में चुनावी सभाएँ कीं।

चुनाव प्रचार में विकास, रोजगार, महँगाई, भ्रष्टाचार और शासन संबंधी मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। ‘अबकी बार मोदी सरकार’ भाजपा का प्रमुख चुनावी नारा था।

**2. कांग्रेस की सीटें 206 से घटकर 44 हुईं**

सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने राहुल गांधी सहित अपने प्रमुख नेताओं के साथ चुनाव प्रचार किया।

कांग्रेस को 19.31 प्रतिशत राष्ट्रीय वोट मिले। दस वर्ष सत्ता में रहने के बाद पार्टी 44 सीटों पर रह गई। किसी आम चुनाव में यह उस समय तक कांग्रेस का सबसे कम संसदीय प्रतिनिधित्व था।

**3. आम आदमी पार्टी का पहला लोकसभा चुनाव**

2012 में स्थापित आम आदमी पार्टी ने 2014 में अपना पहला लोकसभा आम चुनाव लड़ा।

अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी से नरेंद्र मोदी के विरुद्ध चुनाव लड़ा, लेकिन पराजित हुए। पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर चार सीटें मिलीं और सभी पंजाब से थीं।

**4. जयललिता की अन्नाद्रमुक ने 37 सीटें जीतीं**

तमिलनाडु की 39 में से 37 सीटें अन्नाद्रमुक को मिलीं। भाजपा और पीएमके ने एक-एक सीट जीती।

कांग्रेस और डीएमके दोनों एक भी सीट नहीं जीत सके। अन्नाद्रमुक तीसरी सबसे बड़ी लोकसभा पार्टी बनी।

**5. पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को 34 सीटें**

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 42 में से 34 सीटें जीतीं।

2009 में तृणमूल को 19 सीटें मिली थीं। 2014 में उसकी संख्या 34 हो गई। वामपंथी दलों का प्रतिनिधित्व काफी घटा।

**6. ओडिशा में नवीन पटनायक का प्रदर्शन**

बीजू जनता दल ने राज्य की 21 में से 20 लोकसभा सीटें जीतीं। भाजपा को एक सीट मिली और कांग्रेस कोई सीट नहीं जीत सकी।

उसी समय विधानसभा चुनाव में भी बीजद ने बहुमत हासिल किया और नवीन पटनायक मुख्यमंत्री बने रहे।

**7. आंध्र प्रदेश विभाजन और क्षेत्रीय दलों की सफलता**

अविभाजित आंध्र प्रदेश की 42 सीटों में तेलुगु देशम को 16, टीआरएस को 11 और वाईएसआर कांग्रेस को नौ सीटें मिलीं।

कांग्रेस को सिर्फ दो सीटें मिलीं, दोनों तेलंगाना क्षेत्र में। राज्य विभाजन इस चुनाव का महत्वपूर्ण राजनीतिक संदर्भ था।

**8. उत्तर प्रदेश में भाजपा का व्यापक विस्तार**

2014 में अमित शाह भाजपा के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी थे। पार्टी ने प्रदेश की 80 में से 71 सीटें जीतीं।

सहयोगी अपना दल की दो सीटों सहित एनडीए के पास उत्तर प्रदेश से 73 सांसद हो गए। इस राज्य के परिणाम ने भाजपा के राष्ट्रीय बहुमत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

## 8. प्रमुख नेताओं के चर्चित चुनावी मुकाबले

| निर्वाचन क्षेत्र | विजेता | प्रमुख प्रतिद्वंद्वी / परिणाम |
| --- | --- | --- |
| वाराणसी | नरेंद्र मोदी, भाजपा | अरविंद केजरीवाल पर जीत |
| वडोदरा | नरेंद्र मोदी, भाजपा | कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री पर जीत |
| अमेठी | राहुल गांधी, कांग्रेस | स्मृति ईरानी पर जीत |
| रायबरेली | सोनिया गांधी, कांग्रेस | भाजपा के अजय अग्रवाल पर जीत |
| लखनऊ | राजनाथ सिंह, भाजपा | कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी सहित प्रतिद्वंद्वी |
| गांधीनगर | लालकृष्ण आडवाणी, भाजपा | कांग्रेस प्रत्याशी पर जीत |
| मैनपुरी एवं आजमगढ़ | मुलायम सिंह यादव, सपा | दोनों सीटों से जीत |
| सुल्तानपुर | वरुण गांधी, भाजपा | विजय |
| पीलीभीत | मेनका गांधी, भाजपा | विजय |
| हैदराबाद | असदुद्दीन ओवैसी, एमआईएम | लगातार तीसरी जीत |

## वाराणसी : नरेंद्र मोदी बनाम अरविंद केजरीवाल

| प्रत्याशी | प्राप्त मत |
| --- | --- |
| नरेंद्र मोदी — भाजपा | 5,81,022 |
| अरविंद केजरीवाल — आप | 2,09,238 |
| अजय राय — कांग्रेस | 75,614 |

नरेंद्र मोदी की जीत का अंतर

## 3,71,784 वोट

नरेंद्र मोदी ने वडोदरा से भी चुनाव जीता। बाद में उन्होंने वडोदरा सीट छोड़कर वाराणसी सीट अपने पास रखी।

## अमेठी : राहुल गांधी बनाम स्मृति ईरानी

| प्रत्याशी | प्राप्त मत |
| --- | --- |
| राहुल गांधी — कांग्रेस | 4,08,651 |
| स्मृति ईरानी — भाजपा | 3,00,748 |
| कुमार विश्वास — आप | 25,527 |

राहुल गांधी की जीत का अंतर

## 1,07,903 वोट

यह मुकाबला इसलिए महत्वपूर्ण रहा कि 2009 में राहुल गांधी की अमेठी से जीत का अंतर लगभग 3.70 लाख वोट था, जो 2014 में घटकर करीब 1.08 लाख रह गया।

निर्वाचन क्षेत्रवार मूल परिणाम निर्वाचन आयोग की सांख्यिकीय रिपोर्ट में उपलब्ध हैं।

## 9. एनडीए को 336 सीटें कैसे मिलीं?

2014 में भाजपा के पास अपने दम पर 282 सीटें थीं। उसके प्रमुख सहयोगियों के परिणाम इस प्रकार थे।

| एनडीए का प्रमुख दल | सीटें |
| --- | --- |
| भाजपा | 282 |
| शिवसेना | 18 |
| तेलुगु देशम पार्टी | 16 |
| लोक जनशक्ति पार्टी | 6 |
| शिरोमणि अकाली दल | 4 |
| राष्ट्रीय लोक समता पार्टी | 3 |
| अपना दल | 2 |
| अन्य छोटे सहयोगी दल एवं समर्थक | 5 |
| **एनडीए कुल** | **336** |

गठबंधन की गणना 2014 के चुनाव-समय के राजनीतिक वर्गीकरण के अनुसार है। बाद के वर्षों में सहयोगियों की स्थिति बदलती रही।

भाजपा को अकेले बहुमत मिलने का अर्थ था कि सरकार गठन के लिए उसे सहयोगियों की सीटें जोड़ने की अनिवार्यता नहीं थी। इसके बावजूद उसने एनडीए गठबंधन के रूप में सरकार बनाई।

26 मई 2014 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।

## 10. 2009 और 2014 के चुनावों की तुलना

| राजनीतिक दल | 2009 | 2014 | परिवर्तन |
| --- | --- | --- | --- |
| भाजपा | 116 | 282 | \+166 |
| कांग्रेस | 206 | 44 | −162 |
| अन्नाद्रमुक | 9 | 37 | \+28 |
| तृणमूल कांग्रेस | 19 | 34 | \+15 |
| बीजू जनता दल | 14 | 20 | \+6 |
| शिवसेना | 11 | 18 | \+7 |
| तेलुगु देशम | 6 | 16 | \+10 |
| माकपा | 16 | 9 | −7 |
| समाजवादी पार्टी | 23 | 5 | −18 |
| बसपा | 21 | 0 | −21 |
| डीएमके | 18 | 0 | −18 |
| जदयू | 20 | 2 | −18 |
| आम आदमी पार्टी | अस्तित्व में नहीं | 4 | नया दल |

## वोट शेयर की तुलना

| दल | 2009 | 2014 |
| --- | --- | --- |
| भाजपा | 18.80% | 31.00% |
| कांग्रेस | 28.55% | 19.31% |
| बसपा | 6.17% | 4.14% |
| माकपा | 5.33% | 3.25% |
| सपा | 3.42% | 3.47% |
| तृणमूल | 3.20% | 3.84% |

भाजपा के राष्ट्रीय वोट शेयर में 12.20 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई। कांग्रेस के वोट शेयर में 9.24 अंकों की गिरावट हुई।

## 11. सोलहवीं लोकसभा के कार्यकाल की महत्वपूर्ण घटनाएँ (2014–2019)

| वर्ष / तारीख | प्रमुख घटना |
| --- | --- |
| 26 मई 2014 | नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने |
| अगस्त 2014 | प्रधानमंत्री जन धन योजना शुरू |
| सितंबर 2014 | मेक इन इंडिया कार्यक्रम शुरू |
| अक्टूबर 2014 | स्वच्छ भारत मिशन शुरू |
| जनवरी 2015 | नीति आयोग का गठन |
| 2015 | डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत |
| सितंबर 2016 | उरी आतंकवादी हमले के बाद नियंत्रण रेखा पार लक्षित सैन्य कार्रवाई |
| 8 नवंबर 2016 | ₹500 और ₹1,000 के तत्कालीन नोटों का विमुद्रीकरण |
| जुलाई 2017 | वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू |
| 2018 | आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का शुभारंभ |
| सितंबर 2018 | सर्वोच्च न्यायालय ने समलैंगिक वयस्कों के सहमति-आधारित संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया |
| जनवरी 2019 | आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण संबंधी 103वाँ संविधान संशोधन |
| 14 फरवरी 2019 | पुलवामा आतंकवादी हमला |
| 26 फरवरी 2019 | बालाकोट में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई |
| अप्रैल–मई 2019 | सत्रहवाँ लोकसभा चुनाव |

ये घटनाएँ सोलहवीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान हुईं। इनमें से कई 2019 के अगले आम चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि का हिस्सा बनीं।

## 12. पहले सोलह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और जनसंघ/भाजपा का प्रदर्शन

| वर्ष | कांग्रेस की सीटें | जनसंघ / भाजपा की सीटें |
| --- | --- | --- |
| 1951–52 | 364 | 3 |
| 1957 | 371 | 4 |
| 1962 | 361 | 14 |
| 1967 | 283 | 35 |
| 1971 | 352 | 22 |
| 1977 | 154 | जनसंघ जनता पार्टी में समाहित |
| 1980 | 353 | भाजपा का गठन चुनाव बाद |
| 1984–85 | 414 | 2 |
| 1989 | 197 | 85 |
| 1991–92 | 244 | 120 |
| 1996 | 140 | 161 |
| 1998 | 141 | 182 |
| 1999 | 114 | 182 |
| 2004 | 145 | 138 |
| 2009 | 206 | 116 |
| 2014 | 44 | 282 |

## 13. मूल आधिकारिक स्रोत

2014 के चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण शोध सामग्री निर्वाचन आयोग के ऐतिहासिक अभिलेखों और लोकसभा सचिवालय की रिपोर्ट में उपलब्ध है।

- [निर्वाचन आयोग — सोलहवें लोकसभा चुनाव की संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट](https://www.eci.gov.in/statistical-reports)

- [निर्वाचन आयोग — Narrative and Statistical Report, General Election 2014](https://www.eci.gov.in/eci-publication/)

- [लोकसभा सचिवालय — General Elections 2014, तथ्य और विश्लेषण](https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/293/1/General_Elections_2014_English.pdf)

- [निर्वाचन आयोग — 1951 से लोकसभा चुनावों का तुलनात्मक मतदान इतिहास](https://www.eci.gov.in/about-eci/)

## 14. सोलहवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक महत्व

2014 का चुनाव भारतीय राजनीति में पाँच प्रमुख परिवर्तनों से जुड़ा था।

पहला, भारतीय जनता पार्टी ने 282 सीटों के साथ अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया। दूसरा, कांग्रेस 44 सीटों पर आ गई और दस वर्षों बाद केंद्र की सत्ता से बाहर हुई। तीसरा, भाजपा को उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश और अनेक अन्य राज्यों से व्यापक संसदीय समर्थन मिला।

चौथा, अन्नाद्रमुक, तृणमूल कांग्रेस और बीजू जनता दल जैसे क्षेत्रीय दलों ने अपने-अपने राज्यों में महत्वपूर्ण प्रतिनिधित्व हासिल किया। पाँचवाँ, आम आदमी पार्टी जैसी नई राजनीतिक शक्ति पहली बार लोकसभा में पहुँची।

एक संवैधानिक दृष्टि से उल्लेखनीय स्थिति यह भी बनी कि कांग्रेस के केवल 44 सांसद होने के कारण उसे लोकसभा में औपचारिक नेता प्रतिपक्ष का पद नहीं दिया गया। इस पद के लिए प्रचलित दस प्रतिशत सीटों की शर्त का हवाला दिया गया था, हालाँकि उस शर्त के विधिक आधार और अनिवार्यता पर मतभेद रहे हैं।

**2014 का केंद्रीय ऐतिहासिक तथ्य:** 1984 में कांग्रेस ने 400 से अधिक सीटें जीती थीं। उसके तीस वर्ष बाद 2014 में भाजपा ने 282 सीटों के साथ एकदलीय बहुमत हासिल किया। इस परिणाम के साथ केंद्र में दस वर्ष से चली आ रही यूपीए सरकार की जगह नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी।

इसके बाद 2019 के सत्रहवें लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें 282 से बढ़कर 303 हो गईं और नरेंद्र मोदी लगातार दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-16