# भारत का चौदहवाँ लोकसभा चुनाव 2004 : एनडीए की पराजय, कांग्रेस की वापसी और मनमोहन सिंह सरकार का गठन

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — चौदहवाँ अध्याय

भारत का चौदहवाँ लोकसभा आम चुनाव 20 अप्रैल से 10 मई 2004 के बीच चार चरणों में हुआ। इस चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सत्ता से बाहर हो गया और कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार बनी।

भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने लगभग पाँच वर्ष शासन किया था। अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए ने समय से पहले चुनाव कराने का निर्णय लिया। चुनाव प्रचार में आर्थिक विकास, राष्ट्रीय राजमार्ग, दूरसंचार, बुनियादी ढाँचे और ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान की प्रमुख भूमिका थी।

दूसरी ओर कांग्रेस ने सोनिया गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। उसने रोजगार, किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति से जुड़े मुद्दे उठाए।

**चुनाव में कांग्रेस ने 145 और भाजपा ने 138 सीटें जीतीं।** कांग्रेस को 26.53 प्रतिशत और भाजपा को 22.16 प्रतिशत राष्ट्रीय मत मिले। कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन उसके पास अपने दम पर बहुमत नहीं था।

यूपीए ने वामपंथी दलों और अन्य सहयोगियों के समर्थन से सरकार बनाई। 22 मई 2004 को डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

निर्वाचित लोकसभा सीटें

## 543

कांग्रेस की सीटें

## 145

भाजपा की सीटें

## 138

मतदान प्रतिशत

## 58.07%

## 1. चौदहवें लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

| चुनाव संबंधी विषय | विवरण |
| --- | --- |
| लोकसभा | चौदहवीं |
| मतदान | 20 अप्रैल–10 मई 2004 |
| मतदान के चरण | 4 |
| मतगणना | 13 मई 2004 |
| कुल निर्वाचित सीटें | 543 |
| बहुमत के लिए | 272 |
| सामान्य सीटें | 423 |
| अनुसूचित जाति आरक्षित | 79 |
| अनुसूचित जनजाति आरक्षित | 41 |
| पंजीकृत मतदाता | 67,14,87,930 |
| मतदान करने वाले | 38,99,48,330 |
| मतदान प्रतिशत | 58.07% |
| वैध मत | 38,97,79,784 |
| कांग्रेस की सीटें | 145 |
| भाजपा की सीटें | 138 |
| माकपा की सीटें | 43 |
| समाजवादी पार्टी की सीटें | 36 |
| राष्ट्रीय जनता दल की सीटें | 24 |
| बहुजन समाज पार्टी की सीटें | 19 |
| निर्वाचित महिला सांसद | 45 |
| प्रधानमंत्री (चुनाव से पहले) | अटल बिहारी वाजपेयी |
| प्रधानमंत्री (चुनाव के बाद) | डॉ. मनमोहन सिंह |
| मुख्य निर्वाचन आयुक्त | टी. एस. कृष्णमूर्ति |

## 2. 2004 में समय से पहले चुनाव क्यों हुए?

तेरहवीं लोकसभा अक्टूबर 1999 में गठित हुई थी और उसका सामान्य कार्यकाल अक्टूबर 2004 तक चल सकता था। लेकिन एनडीए सरकार ने फरवरी 2004 में लोकसभा भंग करने की सिफारिश की।

इस निर्णय की राजनीतिक पृष्ठभूमि में कई घटनाएँ थीं।

- 1999 के कारगिल युद्ध के बाद वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए ने स्थिर गठबंधन सरकार बनाई थी।

- पोखरण परमाणु परीक्षणों के बाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों और प्रतिबंधों से जुड़ी परिस्थितियों में परिवर्तन आया।

- स्वर्णिम चतुर्भुज और राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएँ, दूरसंचार विस्तार तथा आर्थिक सुधार सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रचारित किए गए।

- 2003 के अंत में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों में भाजपा ने सरकारें बनाईं।

- ‘इंडिया शाइनिंग’ प्रचार अभियान में भारत की आर्थिक वृद्धि और विकास पर जोर दिया गया।

हालाँकि चुनाव में मतदाताओं की प्राथमिकताएँ अलग-अलग राज्यों में भिन्न रहीं। इसलिए परिणाम को केवल एक प्रचार अभियान की सफलता या विफलता से समझना पर्याप्त नहीं है।

## 3. कौन-कौन से राजनीतिक दल मैदान में थे और उनके प्रमुख नेता कौन थे?

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | सोनिया गांधी, डॉ. मनमोहन सिंह |
| भारतीय जनता पार्टी | अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | हरकिशन सिंह सुरजीत, ज्योति बसु, प्रकाश करात |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | ए. बी. बर्धन, गुरुदास दासगुप्ता |
| समाजवादी पार्टी | मुलायम सिंह यादव, अमर सिंह |
| बहुजन समाज पार्टी | मायावती, कांशीराम |
| राष्ट्रीय जनता दल | लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | शरद पवार |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| अन्नाद्रमुक | जे. जयललिता |
| तेलुगु देशम पार्टी | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| तेलंगाना राष्ट्र समिति | के. चंद्रशेखर राव |
| शिवसेना | बाल ठाकरे, उद्धव ठाकरे |
| बीजू जनता दल | नवीन पटनायक |
| जनता दल (यूनाइटेड) | जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, शरद यादव |
| लोक जनशक्ति पार्टी | रामविलास पासवान |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | शिबू सोरेन |
| तृणमूल कांग्रेस | ममता बनर्जी |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | डॉ. एस. रामदास |
| मरुमलार्ची डीएमके | वाइको |
| राष्ट्रीय लोकदल | अजित सिंह |
| असम गण परिषद | प्रफुल्ल कुमार महंत |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला |
| जम्मू-कश्मीर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी | मुफ्ती मोहम्मद सईद, महबूबा मुफ्ती |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | ई. अहमद |
| ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन | असदुद्दीन ओवैसी |

सभी व्यक्ति उस समय दलों के औपचारिक अध्यक्ष नहीं थे। इस सूची में प्रमुख संगठनात्मक, संसदीय और चुनावी नेताओं को भी सम्मिलित किया गया है।

**विशेष तथ्य:** 2004 में तेलंगाना राष्ट्र समिति का यही नाम था। बाद में इसका नाम भारत राष्ट्र समिति हुआ। ऐतिहासिक चुनावी विवरण में 2004 का मूल नाम इस्तेमाल करना उचित है।

## 4. किस राजनीतिक दल को कितनी सीटें और कितना वोट प्रतिशत मिला?

निर्वाचन आयोग के आधिकारिक परिणामों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी। वामपंथी दलों को भी उल्लेखनीय सफलता मिली। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने 43 और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने दस सीटें जीतीं।

| राजनीतिक दल | सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 145 | 26.53% |
| भारतीय जनता पार्टी | 138 | 22.16% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 43 | 5.66% |
| समाजवादी पार्टी | 36 | लगभग 4.3% |
| राष्ट्रीय जनता दल | 24 | लगभग 2.5% |
| बहुजन समाज पार्टी | 19 | 5.33% |
| द्रविड़ मुनेत्र कड़गम | 16 | 1.81% |
| शिवसेना | 12 | लगभग 1.8% |
| बीजू जनता दल | 11 | 1.30% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 10 | 1.41% |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | 9 | 1.80% |
| शिरोमणि अकाली दल | 8 | लगभग 0.9% |
| जनता दल (यूनाइटेड) | 8 | लगभग 2.4% |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | 6 | लगभग 0.6% |
| तेलुगु देशम पार्टी | 5 | लगभग 3.0% |
| तेलंगाना राष्ट्र समिति | 5 | लगभग 0.6% |
| झारखंड मुक्ति मोर्चा | 5 | लगभग 0.5% |
| लोक जनशक्ति पार्टी | 4 | लगभग 0.7% |
| मरुमलार्ची डीएमके | 4 | लगभग 0.4% |
| राष्ट्रीय लोकदल | 3 | लगभग 0.5% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 3 | लगभग 0.4% |
| फॉरवर्ड ब्लॉक | 3 | 0.35% |
| जनता दल (सेक्युलर) | 3 | लगभग 0.5% |
| तृणमूल कांग्रेस | 2 | 2.07% |
| असम गण परिषद | 2 | 0.53% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 2 | लगभग 0.2% |
| निर्दलीय उम्मीदवार | 5 | लगभग 4.25% |
| अन्य विजयी दल | 12 | — |

जहाँ ‘लगभग’ लिखा गया है, वहाँ प्रतिशत एक दशमलव तक पूर्णांकित है। तालिका में छोटी एक-सीट वाली पार्टियों को शामिल नहीं किया गया है। स्रोत: निर्वाचन आयोग की अंतिम दलवार रिपोर्ट और चुनाव परिणाम अभिलेख।

## चुनाव के चार उल्लेखनीय निष्कर्ष

पहला, कांग्रेस को भाजपा से 4.37 प्रतिशत अंक अधिक वोट और सात अतिरिक्त सीटें मिलीं।

दूसरा, माकपा ने 43 सीटें जीतकर अपनी संसदीय स्थिति मजबूत की। भाकपा की दस सीटें मिलाने पर दोनों प्रमुख कम्युनिस्ट दलों की 53 सीटें थीं। अन्य वाम दल जोड़ने पर वामपंथी दलों की संख्या और बढ़ गई।

तीसरा, समाजवादी पार्टी 36 सांसदों के साथ लोकसभा की चौथी सबसे बड़ी पार्टी बनी। बसपा को 19 सीटें मिलीं। उत्तर प्रदेश में इन दोनों दलों का प्रदर्शन भाजपा और कांग्रेस से आगे रहा।

चौथा, तेलुगु देशम की सीटें 1999 की 29 से घटकर पाँच रह गईं। दूसरी ओर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश में 29 सीटें हासिल कीं।

## 5. राज्यवार लोकसभा सीटें : कांग्रेस, भाजपा और अन्य दलों का प्रदर्शन

2004 तक छत्तीसगढ़, झारखंड और उत्तराखंड अलग राज्य बन चुके थे। इसलिए 1999 की तुलना में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की लोकसभा सीटों की संख्या घट गई थी।

इस चुनाव में उत्तर प्रदेश में 80, बिहार में 40, मध्य प्रदेश में 29, छत्तीसगढ़ में 11, झारखंड में 14 और उत्तराखंड में पाँच सीटें थीं।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | कांग्रेस | भाजपा | अन्य |
| --- | --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 80 | 9 | 10 | 61 |
| महाराष्ट्र | 48 | 13 | 13 | 22 |
| आंध्र प्रदेश (अविभाजित) | 42 | 29 | 0 | 13 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 6 | 0 | 36 |
| बिहार | 40 | 3 | 5 | 32 |
| तमिलनाडु | 39 | 10 | 0 | 29 |
| मध्य प्रदेश | 29 | 4 | 25 | 0 |
| कर्नाटक | 28 | 8 | 18 | 2 |
| गुजरात | 26 | 12 | 14 | 0 |
| राजस्थान | 25 | 4 | 21 | 0 |
| ओडिशा | 21 | 2 | 7 | 12 |
| केरल | 20 | 0 | 0 | 20 |
| असम | 14 | 9 | 2 | 3 |
| झारखंड | 14 | 6 | 1 | 7 |
| पंजाब | 13 | 2 | 3 | 8 |
| छत्तीसगढ़ | 11 | 1 | 10 | 0 |
| हरियाणा | 10 | 9 | 1 | 0 |
| दिल्ली | 7 | 6 | 1 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 2 | 0 | 4 |
| उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरांचल) | 5 | 1 | 3 | 1 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 3 | 1 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 0 | 2 | 0 |
| गोवा | 2 | 1 | 1 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 1 | 0 | 1 |
| मेघालय | 2 | 1 | 0 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 0 | 0 | 2 |
| मिजोरम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| नगालैंड | 1 | 0 | 0 | 1 |
| सिक्किम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| अंडमान एवं निकोबार | 1 | 1 | 0 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दादरा एवं नगर हवेली | 1 | 0 | 0 | 1 |
| दमन और दीव | 1 | 1 | 0 | 0 |
| लक्षद्वीप | 1 | 0 | 0 | 1 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 0 | 0 | 1 |
| **कुल** | **543** | **145** | **138** | **260** |

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, 2004 सांख्यिकीय रिपोर्ट, राज्यवार दलवार सीटों की सूची, पृष्ठ 105–109।

## 6. प्रमुख राज्यों में सभी महत्वपूर्ण दलों को कितनी सीटें मिलीं?

| राज्य | दलवार चुनाव परिणाम |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | सपा 35, बसपा 19, भाजपा 10, कांग्रेस 9, रालोद 3, जदयू 1, नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी 1, समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) 1, निर्दलीय 1 |
| बिहार | राजद 22, जदयू 6, भाजपा 5, लोक जनशक्ति पार्टी 4, कांग्रेस 3 |
| महाराष्ट्र | कांग्रेस 13, भाजपा 13, शिवसेना 12, एनसीपी 9, रिपब्लिकन पार्टी (आठवले) 1 |
| आंध्र प्रदेश | कांग्रेस 29, तेलुगु देशम 5, तेलंगाना राष्ट्र समिति 5, भाकपा 1, माकपा 1, एमआईएम 1 |
| पश्चिम बंगाल | माकपा 26, कांग्रेस 6, भाकपा 3, आरएसपी 3, फॉरवर्ड ब्लॉक 3, तृणमूल कांग्रेस 1 |
| तमिलनाडु | डीएमके 16, कांग्रेस 10, पीएमके 5, एमडीएमके 4, भाकपा 2, माकपा 2 |
| मध्य प्रदेश | भाजपा 25, कांग्रेस 4 |
| कर्नाटक | भाजपा 18, कांग्रेस 8, जद (सेक्युलर) 2 |
| गुजरात | भाजपा 14, कांग्रेस 12 |
| राजस्थान | भाजपा 21, कांग्रेस 4 |
| ओडिशा | बीजद 11, भाजपा 7, कांग्रेस 2, झामुमो 1 |
| केरल | माकपा 12, भाकपा 3, मुस्लिम लीग 1, केरल कांग्रेस 1, जद (सेक्युलर) 1, इंडियन फेडरल डेमोक्रेटिक पार्टी 1, निर्दलीय 1 |
| झारखंड | कांग्रेस 6, झामुमो 4, राजद 2, भाजपा 1, भाकपा 1 |
| पंजाब | अकाली दल 8, भाजपा 3, कांग्रेस 2 |
| छत्तीसगढ़ | भाजपा 10, कांग्रेस 1 |
| हरियाणा | कांग्रेस 9, भाजपा 1 |
| दिल्ली | कांग्रेस 6, भाजपा 1 |

## 2004 के चार बड़े क्षेत्रीय परिणाम

**तमिलनाडु:** कांग्रेस, डीएमके और उनके सहयोगियों ने राज्य की सभी 39 लोकसभा सीटें जीतीं। अन्नाद्रमुक और भाजपा गठबंधन को कोई सीट नहीं मिली।

**आंध्र प्रदेश:** कांग्रेस को 29 सीटें मिलीं। सहयोगी तेलंगाना राष्ट्र समिति ने पाँच सीटें जीतीं। तेलुगु देशम पाँच सीटों पर सिमट गई। इसी समय के विधानसभा चुनाव में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली सरकार पराजित हुई और वाई. एस. राजशेखर रेड्डी मुख्यमंत्री बने।

**उत्तर प्रदेश:** सपा और बसपा ने मिलकर 54 सीटें जीतीं। कांग्रेस को नौ और भाजपा को दस सीटें मिलीं। सपा राज्य की सबसे बड़ी लोकसभा पार्टी बनी।

**केरल:** कांग्रेस स्वयं एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी। वाम लोकतांत्रिक मोर्चे से जुड़े दलों ने व्यापक सफलता हासिल की। कांग्रेस के लिए राज्य के परिणाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर उसके नेतृत्व में सरकार बनी, लेकिन केरल से उसका कोई निर्वाचित सांसद नहीं था।

## 7. चौदहवें लोकसभा चुनाव की प्रमुख राजनीतिक घटनाएँ

**1. वाजपेयी के नेतृत्व में एनडीए की पराजय**

भाजपा ने आर्थिक वृद्धि, बुनियादी ढाँचे और राष्ट्रीय उपलब्धियों को अपने चुनाव प्रचार में प्रमुखता दी। ‘इंडिया शाइनिंग’ अभियान व्यापक रूप से चर्चा में रहा।

भाजपा की सीटें 1999 की 182 से घटकर 138 रह गईं। सरकार के कई सहयोगी दलों को भी सीटों का नुकसान हुआ।

**2. सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सत्ता में वापसी**

सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से चुनाव जीता। इससे पहले 1999 में वह अमेठी से निर्वाचित हुई थीं।

चुनाव के बाद उन्हें कांग्रेस संसदीय दल का नेता चुना गया। प्रधानमंत्री पद को लेकर चर्चा के बीच उन्होंने स्वयं प्रधानमंत्री न बनने का निर्णय लिया और डॉ. मनमोहन सिंह का नाम प्रस्तावित किया।

**3. डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने**

22 मई 2004 को राष्ट्रपति डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम ने मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई।

मनमोहन सिंह उस समय राज्यसभा सदस्य थे। वे भारत के पहले सिख प्रधानमंत्री बने।

**4. वामपंथी दलों की सरकार गठन में भूमिका**

माकपा को 43, भाकपा को दस, आरएसपी को तीन और फॉरवर्ड ब्लॉक को तीन सीटें मिलीं। इन चार दलों की संयुक्त संख्या 59 थी।

वाम दलों ने यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन दिया। वे सरकार में शामिल नहीं हुए, लेकिन न्यूनतम साझा कार्यक्रम और कई आर्थिक नीतियों पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही।

**5. आंध्र प्रदेश में सत्ता परिवर्तन**

कांग्रेस ने लोकसभा की 29 सीटें जीतीं। विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने सफलता हासिल की।

वाई. एस. राजशेखर रेड्डी मुख्यमंत्री बने और चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।

## 8. कुछ महत्वपूर्ण नेताओं के चुनाव परिणाम

| नेता | निर्वाचन क्षेत्र | परिणाम |
| --- | --- | --- |
| अटल बिहारी वाजपेयी | लखनऊ | भाजपा से विजयी |
| सोनिया गांधी | रायबरेली | कांग्रेस से विजयी |
| राहुल गांधी | अमेठी | कांग्रेस से पहली बार विजयी |
| लालकृष्ण आडवाणी | गांधीनगर | भाजपा से विजयी |
| मुलायम सिंह यादव | मैनपुरी | सपा से विजयी |
| मायावती | अकबरपुर | बसपा से विजयी |
| लालू प्रसाद यादव | छपरा और मधेपुरा | दोनों सीटों से विजयी |
| शरद पवार | बारामती | एनसीपी से विजयी |
| ममता बनर्जी | कोलकाता दक्षिण | तृणमूल से विजयी |
| असदुद्दीन ओवैसी | हैदराबाद | एमआईएम से पहली बार विजयी |

2004 के चुनाव से राहुल गांधी का संसदीय राजनीतिक जीवन आरंभ हुआ। उन्होंने अमेठी से चुनाव जीता। वहीं हैदराबाद से असदुद्दीन ओवैसी पहली बार लोकसभा पहुँचे।

## 9. यूपीए सरकार का गठन कैसे हुआ?

चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपने चुनावी सहयोगियों के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनाई। राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, लोक जनशक्ति पार्टी, तेलंगाना राष्ट्र समिति और कई दूसरे दल इस राजनीतिक व्यवस्था में शामिल थे।

यह चयनित दलों की सीटों का विवरण है, संपूर्ण यूपीए गठबंधन का योग नहीं। माकपा और भाकपा सरकार में शामिल नहीं थीं।

कांग्रेस के 145 सांसद थे, इसलिए सरकार चलाने के लिए सहयोगी दलों और बाहरी समर्थन की आवश्यकता थी। वामपंथी दलों ने सरकार को संसदीय समर्थन दिया, जबकि कई क्षेत्रीय दलों ने मंत्रिमंडल में भाग लिया।

## 10. 1999 और 2004 के चुनावों की तुलना

| राजनीतिक दल | 1999 | 2004 |
| --- | --- | --- |
| कांग्रेस | 114 | 145 |
| भाजपा | 182 | 138 |
| माकपा | 33 | 43 |
| भाकपा | 4 | 10 |
| समाजवादी पार्टी | 26 | 36 |
| बसपा | 14 | 19 |
| राजद | 7 | 24 |
| डीएमके | 12 | 16 |
| तेलुगु देशम | 29 | 5 |
| शिवसेना | 15 | 12 |
| बीजद | 10 | 11 |
| तृणमूल कांग्रेस | 8 | 2 |
| एनसीपी | 8 | 9 |

## वोट शेयर में क्या परिवर्तन हुआ?

| दल | 1999 | 2004 |
| --- | --- | --- |
| कांग्रेस | 28.30% | 26.53% |
| भाजपा | 23.75% | 22.16% |
| माकपा | 5.40% | 5.66% |
| बसपा | 4.16% | 5.33% |
| सपा | 3.76% | लगभग 4.32% |

यहाँ एक रोचक तथ्य है। कांग्रेस का राष्ट्रीय वोट शेयर 1999 की तुलना में 2004 में घटा, लेकिन उसकी सीटें 114 से बढ़कर 145 हो गईं। इसके विपरीत भाजपा का वोट प्रतिशत और सीटें दोनों घटे।

## 11. चौदहवीं लोकसभा के कार्यकाल की प्रमुख घटनाएँ (2004–2009)

| वर्ष | प्रमुख घटना |
| --- | --- |
| 2004 | मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार का गठन |
| 2005 | सूचना का अधिकार अधिनियम पारित |
| 2005 | राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम पारित |
| 2005 | भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग पर समझ की शुरुआत |
| 2006 | अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए केंद्रीय शिक्षण संस्थानों में आरक्षण विस्तार संबंधी कानून |
| 2007 | प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं |
| 2008 | भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को लेकर वाम दलों ने सरकार से समर्थन वापस लिया |
| 22 जुलाई 2008 | मनमोहन सिंह सरकार ने लोकसभा में विश्वास मत जीता |
| 26 नवंबर 2008 | मुंबई में आतंकवादी हमले हुए |
| 2009 | पंद्रहवाँ लोकसभा चुनाव संपन्न हुआ |

## जुलाई 2008 का विश्वास मत

भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते को लेकर वाम दलों ने मनमोहन सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

22 जुलाई 2008 को लोकसभा में विश्वास मत हुआ।

सरकार के पक्ष में

## 275

सरकार के विरोध में

## 256

समाजवादी पार्टी ने परमाणु समझौते के मुद्दे पर सरकार को समर्थन दिया। इसके चलते यूपीए सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर सकी।

## 12. पहले चौदह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और जनसंघ/भाजपा का प्रदर्शन

| चुनाव वर्ष | कांग्रेस की सीटें | जनसंघ / भाजपा की सीटें |
| --- | --- | --- |
| 1951–52 | 364 | 3 |
| 1957 | 371 | 4 |
| 1962 | 361 | 14 |
| 1967 | 283 | 35 |
| 1971 | 352 | 22 |
| 1977 | 154 | जनसंघ जनता पार्टी में समाहित |
| 1980 | 353 | भाजपा का गठन चुनाव के बाद |
| 1984–85 | 414 | 2 |
| 1989 | 197 | 85 |
| 1991–92 | 244 | 120 |
| 1996 | 140 | 161 |
| 1998 | 141 | 182 |
| 1999 | 114 | 182 |
| 2004 | 145 | 138 |

## 13. मूल आधिकारिक स्रोत

इस अध्ययन के लिए प्राथमिक स्रोत भारत निर्वाचन आयोग की 2004 की अंतिम सांख्यिकीय रिपोर्ट है।

[भारत निर्वाचन आयोग — 2004 लोकसभा चुनाव, संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट, खंड I](https://ceomadhyapradesh.nic.in/Links/Books/2004_Vol_I.pdf)

[निर्वाचन आयोग — सभी लोकसभा चुनावों की मूल रिपोर्टें](https://www.eci.gov.in/statistical-reports)

[अंतर-संसदीय संघ — 2004 चुनाव और सरकार गठन का ऐतिहासिक विवरण](https://data.ipu.org/election-summary/HTML/2145_04.htm)

निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट में पृष्ठ 99–109 पर सीट जीतने वाले दलों और उनके राज्यवार परिणाम तथा पृष्ठ 110 से आगे राष्ट्रीय मत प्रतिशत उपलब्ध हैं।

## 14. चौदहवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक महत्व

2004 के चुनाव ने गठबंधन आधारित भारतीय राजनीति में एक और सत्ता परिवर्तन दर्ज किया। भाजपा 138 और कांग्रेस 145 सीटें लेकर आईं। दोनों में से किसी को अपने दम पर बहुमत नहीं मिला, लेकिन चुनाव के बाद कांग्रेस ने अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने के लिए पर्याप्त संसदीय समर्थन जुटाया।

इस चुनाव के तीन महत्वपूर्ण परिणाम थे। पहला, एनडीए की लगभग पाँच वर्षीय सरकार के बाद केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ। दूसरा, क्षेत्रीय दलों और वामपंथी दलों का समर्थन नई सरकार के गठन में महत्वपूर्ण बना। तीसरा, मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।

**2004 का केंद्रीय ऐतिहासिक तथ्य यह है कि कांग्रेस केवल 145 सीटें जीतकर केंद्र में सरकार बनाने में सफल रही, जबकि 138 सीटों वाली भाजपा विपक्ष में बैठी।** यह बहुदलीय संसदीय प्रणाली में गठबंधन और सदन के बहुमत के महत्व का स्पष्ट उदाहरण था।

2009 के पंद्रहवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की सीटें 145 से बढ़कर 206 हुईं और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए ने दूसरी बार सरकार बनाई।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-14