# भारत का तेरहवाँ लोकसभा चुनाव 1999 : कारगिल युद्ध के बाद का जनादेश, एनडीए की सरकार और वाजपेयी का पाँच वर्षीय कार्यकाल

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — तेरहवाँ अध्याय

भारत का तेरहवाँ लोकसभा आम चुनाव 5 सितंबर से 3 अक्टूबर 1999 के बीच पाँच चरणों में हुआ। यह लगातार तीसरा अवसर था जब लोकसभा ने अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं किया और देश में मध्यावधि चुनाव कराने पड़े।

अप्रैल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार लोकसभा में केवल एक वोट से विश्वास मत हार गई थी। उसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं जुटा सकीं। परिणामस्वरूप बारहवीं लोकसभा भंग कर दी गई।

इसी बीच मई से जुलाई 1999 तक कारगिल में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष हुआ। भारतीय सेना के अभियान और कारगिल में भारत की सैन्य सफलता के बाद सितंबर–अक्टूबर में चुनाव कराए गए।

चुनाव परिणाम में **भारतीय जनता पार्टी ने 182 और कांग्रेस ने 114 सीटें जीतीं।** भाजपा की सीटें 1998 जितनी ही रहीं, लेकिन सहयोगी दलों के साथ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को सरकार बनाने के लिए पर्याप्त बहुमत मिला।

13 अक्टूबर 1999 को अटल बिहारी वाजपेयी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उनकी सरकार मई 2004 तक चली और स्वतंत्र भारत में पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा करने वाली पहली गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकार बनी।

निर्वाचित लोकसभा सीटें

## 543

भाजपा की सीटें

## 182

कांग्रेस की सीटें

## 114

एनडीए की सीटें

## 296

एनडीए की 296 सीटें अंतर-संसदीय संघ के चुनावी वर्गीकरण के अनुसार हैं। कुछ समकालीन विवरण सहयोगियों की गणना के अंतर के कारण 298 सीटें बताते हैं।

## 1. तेरहवें लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

| चुनाव संबंधी विवरण | आँकड़े |
| --- | --- |
| लोकसभा | तेरहवीं |
| मतदान की अवधि | 5 सितंबर–3 अक्टूबर 1999 |
| चुनाव के चरण | 5 |
| निर्धारित सीटें | 543 |
| चुनाव संपन्न सीटें | 543 |
| बहुमत का आँकड़ा | 272 |
| पंजीकृत मतदाता | लगभग 61.96 करोड़ |
| मतदान प्रतिशत | लगभग 60% |
| कुल उम्मीदवार | 4,648 |
| निर्वाचित महिला सांसद | 49 |
| राष्ट्रीय राजनीतिक दल | 7 |
| भाजपा की सीटें | 182 |
| भाजपा का वोट शेयर | 23.75% |
| कांग्रेस की सीटें | 114 |
| कांग्रेस का वोट शेयर | 28.30% |
| तीसरी सबसे बड़ी पार्टी | मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी — 33 |
| चौथी सबसे बड़ी पार्टी | तेलुगु देशम — 29 |
| प्रधानमंत्री | अटल बिहारी वाजपेयी |
| नई सरकार का गठन | 13 अक्टूबर 1999 |
| मुख्य निर्वाचन आयुक्त | डॉ. एम. एस. गिल |

निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट पर आधारित सरकारी सांख्यिकी प्रकाशन में 59.99 प्रतिशत मतदान दर्ज है। कुछ चुनावी डेटाबेस लगभग 58.8 प्रतिशत दिखाते हैं; इस अध्ययन में आयोग के सरकारी सांख्यिकीय प्रकाशन को प्राथमिकता दी गई है।

## 2. मध्यावधि चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि

## वाजपेयी सरकार केवल एक वोट से गिरी

1998 के चुनाव में भाजपा 182 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। अन्नाद्रमुक, समता पार्टी, बीजू जनता दल, शिवसेना, अकाली दल सहित अनेक सहयोगियों के समर्थन से अटल बिहारी वाजपेयी ने सरकार बनाई।

अप्रैल 1999 में जयललिता की अन्नाद्रमुक ने समर्थन वापस ले लिया। 17 अप्रैल को लोकसभा में विश्वास मत हुआ।

## 17 अप्रैल 1999 : विश्वास मत

सरकार के पक्ष में

## 269

सरकार के विरोध में

## 270

परिणाम : सरकार एक वोट से पराजित

26 अप्रैल 1999 को राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने लोकसभा भंग कर दी। वाजपेयी चुनाव तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहे।

## कारगिल युद्ध : चुनाव से पहले बड़ा घटनाक्रम

मई 1999 में पाकिस्तान की सेना से जुड़े सैनिकों और घुसपैठियों ने कारगिल क्षेत्र में भारतीय नियंत्रण वाले ऊँचाई के ठिकानों पर कब्जा जमाया। भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय चलाया। भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन सफेद सागर के अंतर्गत अभियान में भाग लिया।

26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल में अपना अभियान सफलतापूर्वक पूरा करने की घोषणा की। युद्ध में आधिकारिक भारतीय आँकड़ों के अनुसार 527 सैनिक शहीद हुए।

कारगिल की घटनाएँ लोकसभा चुनाव से पहले हुई थीं। यह युद्ध चुनावी अभियान का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा विषय बना। हालांकि किसी एक घटना के कारण कितने मतदाताओं ने किसी दल को वोट दिया, इसकी सटीक गणना संभव नहीं है।

## 3. कौन-कौन से राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे और उनके प्रमुख नेता कौन थे?

1999 के चुनाव की विशेषता यह थी कि भाजपा के नेतृत्व में एनडीए ने चुनाव-पूर्व गठबंधन के रूप में मैदान में उतरने की रणनीति अपनाई। दूसरी ओर कांग्रेस ने कई राज्यों में स्वतंत्र रूप से और कुछ स्थानों पर सहयोगी दलों के साथ चुनाव लड़ा।

1999 में जनता दल का पुनर्गठन भी महत्वपूर्ण था। जनता दल (यूनाइटेड) और जनता दल (सेक्युलर) अलग राजनीतिक दलों के रूप में चुनाव लड़ रहे थे।

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | सोनिया गांधी |
| तेलुगु देशम पार्टी | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| समाजवादी पार्टी | मुलायम सिंह यादव |
| बहुजन समाज पार्टी | कांशीराम, मायावती |
| जनता दल (यूनाइटेड) | शरद यादव, जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार |
| जनता दल (सेक्युलर) | एच. डी. देवेगौड़ा |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | हरकिशन सिंह सुरजीत, ज्योति बसु |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | ए. बी. बर्धन |
| शिवसेना | बाल ठाकरे |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| अन्नाद्रमुक | जे. जयललिता |
| बीजू जनता दल | नवीन पटनायक |
| तृणमूल कांग्रेस | ममता बनर्जी |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | शरद पवार, पी. ए. संगमा, तारिक अनवर |
| राष्ट्रीय जनता दल | लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी |
| इंडियन नेशनल लोकदल | ओमप्रकाश चौटाला |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | डॉ. एस. रामदास |
| मरुमलार्ची डीएमके | वाइको |
| राष्ट्रीय लोकदल | अजित सिंह |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | फारूक अब्दुल्ला, उमर अब्दुल्ला |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | जी. एम. बनातवाला, ई. अहमद |
| ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन | सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी |

इनमें कुछ पार्टी अध्यक्ष थे, जबकि अन्य प्रमुख संसदीय, संगठनात्मक या चुनावी नेता थे।

## शरद पवार ने कांग्रेस क्यों छोड़ी?

1999 के चुनाव से कुछ महीने पहले कांग्रेस में एक बड़ा विभाजन हुआ।

मई 1999 में शरद पवार, पी. ए. संगमा और तारिक अनवर ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल से संबंधित प्रश्न उठाया। कांग्रेस नेतृत्व के साथ मतभेद के बाद उन्होंने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) बनाई।

इस नए दल ने 1999 में 132 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवार उतारे और आठ सीटें जीतीं। राष्ट्रीय स्तर पर उसे 2.27 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।

यह उल्लेखनीय है कि चुनाव के बाद महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी ने मिलकर सरकार भी बनाई।

## 4. पार्टीवार चुनाव परिणाम : सीटें और राष्ट्रीय वोट शेयर

नीचे निर्वाचन आयोग की 1999 की मूल सांख्यिकीय रिपोर्ट के आधार पर सीट जीतने वाले राजनीतिक दलों का विवरण है।

| राजनीतिक दल | जीती सीटें | वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | 182 | 23.75% |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 114 | 28.30% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 33 | 5.40% |
| तेलुगु देशम पार्टी | 29 | 3.65% |
| समाजवादी पार्टी | 26 | 3.76% |
| जनता दल (यूनाइटेड) | 21 | 3.10% |
| शिवसेना | 15 | 1.56% |
| बहुजन समाज पार्टी | 14 | 4.16% |
| डीएमके | 12 | 1.73% |
| अन्नाद्रमुक | 10 | 1.93% |
| बीजू जनता दल | 10 | 1.20% |
| तृणमूल कांग्रेस | 8 | 2.57% |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | 8 | 2.27% |
| राष्ट्रीय जनता दल | 7 | 2.79% |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | 5 | 0.65% |
| इंडियन नेशनल लोकदल | 5 | 0.55% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 4 | 1.48% |
| मरुमलार्ची डीएमके | 4 | 0.44% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 4 | 0.12% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 3 | 0.41% |
| शिरोमणि अकाली दल | 2 | 0.69% |
| राष्ट्रीय लोकदल | 2 | 0.37% |
| फॉरवर्ड ब्लॉक | 2 | 0.35% |
| मुस्लिम लीग | 2 | 0.23% |
| अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस | 2 | 0.22% |
| जनता दल (सेक्युलर) | 1 | 0.91% |
| भाकपा (माले) लिबरेशन | 1 | 0.33% |
| भारिप बहुजन महासंघ | 1 | 0.19% |
| एमआईएम | 1 | 0.12% |
| केरल कांग्रेस | 1 | 0.10% |
| केरल कांग्रेस (एम) | 1 | 0.10% |
| अकाली दल (मान) | 1 | 0.08% |
| समाजवादी जनता पार्टी (राष्ट्रीय) | 1 | 0.08% |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | 1 | 0.08% |
| हिमाचल विकास कांग्रेस | 1 | 0.07% |
| मणिपुर स्टेट कांग्रेस पार्टी | 1 | 0.06% |
| महाराष्ट्रवादी जनता पार्टी | 1 | लगभग 0.11% |
| सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट | 1 | 0.03% |
| निर्दलीय | 6 | 2.74% |

राष्ट्रीय वोट शेयर पूरे देश के वैध मतों का प्रतिशत है। छोटे दलों के मत प्रतिशत पूर्णांकित हैं। शून्य सीट जीतने वाले दल इस सूची में नहीं हैं। स्रोत: निर्वाचन आयोग की 1999 सांख्यिकीय रिपोर्ट, राष्ट्रीय दलवार मत तालिका।

## परिणामों के पाँच उल्लेखनीय तथ्य

**पहला:** कांग्रेस को भाजपा से 4.55 प्रतिशत अंक अधिक वोट मिले, लेकिन भाजपा ने कांग्रेस से 68 सीटें अधिक जीतीं।

**दूसरा:** भाजपा की सीटें 1998 और 1999 में समान रहीं—182। फिर भी दोनों चुनावों में सरकार की स्थिरता अलग रही। इसका महत्वपूर्ण कारण गठबंधन के सहयोगियों की संख्या और समर्थन व्यवस्था थी।

**तीसरा:** तेलुगु देशम पार्टी ने 29 सीटें जीतीं और वह चौथी सबसे बड़ी संसदीय पार्टी बनी। चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार को बाहर से समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

**चौथा:** उत्तर प्रदेश में सपा को 26 और बसपा को 14 सीटें मिलीं। भाजपा को राज्य में 1998 की 57 सीटों के मुकाबले केवल 29 सीटें मिलीं।

**पाँचवाँ:** कांग्रेस की सीटें 1998 की 141 से घटकर 1999 में 114 रह गईं, हालांकि राष्ट्रीय मत प्रतिशत 25.82 से बढ़कर 28.30 प्रतिशत हुआ।

## 5. किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें थीं? राज्यवार परिणाम

1999 में भारत में वर्तमान उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं थे। उत्तर प्रदेश में 85, बिहार में 54 और मध्य प्रदेश में 40 लोकसभा सीटें थीं।

तेरहवें लोकसभा चुनाव की राज्यवार सीटें और भाजपा-कांग्रेस का प्रदर्शन इस प्रकार था।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | भाजपा | कांग्रेस |
| --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 85 | 29 | 10 |
| बिहार | 54 | 23 | 4 |
| महाराष्ट्र | 48 | 13 | 10 |
| आंध्र प्रदेश | 42 | 7 | 5 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 2 | 3 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 29 | 11 |
| तमिलनाडु | 39 | 4 | 0 |
| कर्नाटक | 28 | 7 | 18 |
| गुजरात | 26 | 20 | 6 |
| राजस्थान | 25 | 16 | 9 |
| ओडिशा | 21 | 9 | 2 |
| केरल | 20 | 0 | 8 |
| असम | 14 | 2 | 10 |
| पंजाब | 13 | 1 | 8 |
| हरियाणा | 10 | 5 | 0 |
| दिल्ली | 7 | 7 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 2 | 0 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 3 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 0 | 2 |
| गोवा | 2 | 2 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 0 | 0 |
| मेघालय | 2 | 0 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 0 | 0 |
| मिजोरम | 1 | 0 | 0 |
| नगालैंड | 1 | 0 | 1 |
| सिक्किम | 1 | 0 | 0 |
| अंडमान-निकोबार | 1 | 1 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 0 | 1 |
| दादरा-नगर हवेली | 1 | 0 | 0 |
| दमन और दीव | 1 | 0 | 1 |
| लक्षद्वीप | 1 | 0 | 1 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 0 | 1 |
| **कुल** | **543** | **182** | **114** |

## प्रमुख राज्यों में अन्य दलों की सीटें

| राज्य | दलवार प्रमुख परिणाम |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | भाजपा 29, सपा 26, बसपा 14, कांग्रेस 10, राष्ट्रीय लोकदल 2, अखिल भारतीय लोकतांत्रिक कांग्रेस 2, समाजवादी जनता पार्टी 1, निर्दलीय 1 |
| बिहार | भाजपा 23, जदयू 18, राजद 7, कांग्रेस 4, माकपा 1, निर्दलीय 1 |
| महाराष्ट्र | शिवसेना 15, भाजपा 13, कांग्रेस 10, एनसीपी 6, अन्य 4 |
| आंध्र प्रदेश | तेलुगु देशम 29, भाजपा 7, कांग्रेस 5, एमआईएम 1 |
| पश्चिम बंगाल | माकपा 21, तृणमूल कांग्रेस 8, कांग्रेस 3, भाकपा 3, आरएसपी 3, भाजपा 2, फॉरवर्ड ब्लॉक 2 |
| मध्य प्रदेश | भाजपा 29, कांग्रेस 11 |
| तमिलनाडु | डीएमके 12, अन्नाद्रमुक 10, पीएमके 5, भाजपा 4, एमडीएमके 4, अन्य 4 |
| कर्नाटक | कांग्रेस 18, भाजपा 7, जदयू 3 |
| गुजरात | भाजपा 20, कांग्रेस 6 |
| राजस्थान | भाजपा 16, कांग्रेस 9 |
| ओडिशा | बीजद 10, भाजपा 9, कांग्रेस 2 |
| केरल | कांग्रेस 8, माकपा 8, मुस्लिम लीग 2, केरल कांग्रेस (एम) 1, केरल कांग्रेस 1 |
| असम | कांग्रेस 10, भाजपा 2, भाकपा (माले) लिबरेशन 1, निर्दलीय 1 |
| पंजाब | कांग्रेस 8, अकाली दल 2, भाजपा 1, अकाली दल (मान) 1, भाकपा 1 |
| हरियाणा | भाजपा 5, इंडियन नेशनल लोकदल 5 |
| दिल्ली | भाजपा 7 |
| जम्मू-कश्मीर | नेशनल कॉन्फ्रेंस 4, भाजपा 2 |

## 6. 1999 के सबसे चर्चित राजनीतिक मुकाबले

**अटल बिहारी वाजपेयी — लखनऊ से जीत**

वाजपेयी ने लखनऊ से चुनाव जीता। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 182 सीटें बरकरार रखीं और एनडीए गठबंधन के रूप में पुनः केंद्र में सरकार बनाई।

**सोनिया गांधी — पहली बार लोकसभा चुनाव और दो सीटों पर जीत**

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने उत्तर प्रदेश की अमेठी और कर्नाटक की बेल्लारी सीट से चुनाव लड़ा तथा दोनों जीतीं।

अमेठी में उन्होंने भाजपा के डॉ. संजय सिंह को 3,00,012 मतों से पराजित किया। बेल्लारी में उनकी प्रतिद्वंद्वी भाजपा नेता सुषमा स्वराज थीं।

**सुषमा स्वराज — बेल्लारी में सोनिया गांधी से मुकाबला**

भाजपा ने सोनिया गांधी के मुकाबले सुषमा स्वराज को मैदान में उतारा। इस मुकाबले में राष्ट्रीय स्तर पर काफी रुचि रही। सुषमा स्वराज चुनाव हार गईं।

**शरद पवार — एनसीपी के पहले चुनाव में सफलता**

शरद पवार ने महाराष्ट्र की बारामती सीट से जीत हासिल की। उनकी नई पार्टी एनसीपी ने राष्ट्रीय स्तर पर आठ सीटें जीतीं।

**मुलायम सिंह यादव — समाजवादी पार्टी की 26 सीटें**

समाजवादी पार्टी 1996 की 17 और 1998 की 20 सीटों से बढ़कर 1999 में 26 सीटें जीतने में सफल रही। उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा दोनों के प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी हुई।

## 7. एनडीए की सरकार कैसे बनी?

1998 में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार को अन्नाद्रमुक का समर्थन प्राप्त था। 1999 में गठबंधन की संरचना बदल गई। अन्नाद्रमुक एनडीए से बाहर थी और डीएमके उसके साथ आ गई।

इसके अलावा तेलुगु देशम, जदयू, शिवसेना, बीजू जनता दल, तृणमूल कांग्रेस और अन्य दलों ने गठबंधन को समर्थन दिया।

| प्रमुख दल | सीटें | सरकार से संबंध |
| --- | --- | --- |
| भाजपा | 182 | नेतृत्वकर्ता दल |
| तेलुगु देशम | 29 | बाहर से समर्थन |
| जनता दल (यूनाइटेड) | 21 | सरकार में भागीदारी |
| शिवसेना | 15 | सरकार में भागीदारी |
| डीएमके | 12 | सरकार में भागीदारी |
| बीजू जनता दल | 10 | सरकार में भागीदारी |
| तृणमूल कांग्रेस | 8 | सरकार में भागीदारी |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | 5 | गठबंधन सहयोगी |
| इंडियन नेशनल लोकदल | 5 | सहयोगी दल |
| मरुमलार्ची डीएमके | 4 | गठबंधन सहयोगी |

सभी सहयोगियों का दलवार योग निकालते समय चुनाव-पूर्व और चुनाव-पश्चात समर्थन में अंतर रखना जरूरी है। अंतर-संसदीय संघ ने एनडीए के लिए 296 सीटें दर्ज की हैं।

## 8. 1999 से 2004 : तेरहवीं लोकसभा के कार्यकाल की महत्वपूर्ण घटनाएँ

| तारीख / वर्ष | घटना |
| --- | --- |
| 13 अक्टूबर 1999 | वाजपेयी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने |
| दिसंबर 1999 | इंडियन एयरलाइंस की उड़ान IC-814 का अपहरण |
| नवंबर 2000 | छत्तीसगढ़, उत्तराखंड (तत्कालीन उत्तरांचल) और झारखंड राज्यों का गठन |
| जुलाई 2001 | आगरा में वाजपेयी–परवेज मुशर्रफ शिखर वार्ता |
| 13 दिसंबर 2001 | भारतीय संसद पर आतंकवादी हमला |
| 2001–02 | भारत-पाकिस्तान सीमा पर व्यापक सैन्य लामबंदी, ऑपरेशन पराक्रम |
| फरवरी–मार्च 2002 | गोधरा ट्रेन अग्निकांड और गुजरात में सांप्रदायिक हिंसा |
| 2002 | आतंकवाद निरोधक अधिनियम (POTA) लागू हुआ |
| 2003 | भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर संघर्षविराम संबंधी समझ |
| 2003 | राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं और स्वर्णिम चतुर्भुज पर कार्य जारी |
| जनवरी 2004 | सार्क सम्मेलन के दौरान वाजपेयी की पाकिस्तान यात्रा |
| फरवरी 2004 | तेरहवीं लोकसभा समय से पहले भंग |
| अप्रैल–मई 2004 | चौदहवाँ लोकसभा चुनाव |

## पाँच वर्ष तक सरकार का नेतृत्व

वाजपेयी ने अक्टूबर 1999 से मई 2004 तक गठबंधन सरकार का नेतृत्व किया। इस अवधि में केंद्र में अनेक दलों की भागीदारी वाली सरकार ने लगभग पाँच वर्ष पूरे किए।

फरवरी 2004 में लोकसभा समय से पहले भंग की गई, इसलिए तकनीकी रूप से उसने पूर्ण निर्धारित पाँच वर्ष नहीं पूरे किए थे। फिर भी यह उस समय तक सबसे लंबे समय तक चलने वाली गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकार थी।

## 9. बारहवीं और तेरहवीं लोकसभा के परिणामों की तुलना

| राजनीतिक दल | 1998 | 1999 | परिवर्तन |
| --- | --- | --- | --- |
| भाजपा | 182 | 182 | 0 |
| कांग्रेस | 141 | 114 | −27 |
| माकपा | 32 | 33 | \+1 |
| समाजवादी पार्टी | 20 | 26 | \+6 |
| बसपा | 5 | 14 | \+9 |
| तेलुगु देशम | 12 | 29 | \+17 |
| शिवसेना | 6 | 15 | \+9 |
| डीएमके | 6 | 12 | \+6 |
| अन्नाद्रमुक | 18 | 10 | −8 |
| बीजू जनता दल | 9 | 10 | \+1 |
| तृणमूल कांग्रेस | 7 | 8 | \+1 |
| राजद | 17 | 7 | −10 |
| राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी | अस्तित्व में नहीं | 8 | नया दल |

## उत्तर प्रदेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन

| दल | 1998 | 1999 |
| --- | --- | --- |
| भाजपा | 57 | 29 |
| समाजवादी पार्टी | 20 | 26 |
| बहुजन समाज पार्टी | 4 | 14 |
| कांग्रेस | 0 | 10 |

1999 में उत्तर प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई दिया। भाजपा की सीटें लगभग आधी रह गईं। सपा और बसपा दोनों की सीटें बढ़ीं और कांग्रेस को भी दस सीटें मिलीं।

बिहार में भाजपा ने 23 और जनता दल (यूनाइटेड) ने 18 सीटें जीतीं। आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम और भाजपा ने मिलकर 36 सीटें हासिल कीं। ओडिशा में बीजद और भाजपा ने 21 में से 19 सीटें जीतीं।

इन राज्यवार गठबंधनों ने एनडीए की राष्ट्रीय संसदीय स्थिति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

## 10. पहले तेरह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और जनसंघ/भाजपा की सीटें

| चुनाव वर्ष | कांग्रेस | जनसंघ / भाजपा |
| --- | --- | --- |
| 1951–52 | 364 | 3 |
| 1957 | 371 | 4 |
| 1962 | 361 | 14 |
| 1967 | 283 | 35 |
| 1971 | 352 | 22 |
| 1977 | 154 | जनता पार्टी में शामिल |
| 1980 | 353 | भाजपा का गठन चुनाव के बाद |
| 1984–85 | 414 | 2 |
| 1989 | 197 | 85 |
| 1991–92 | 244 | 120 |
| 1996 | 140 | 161 |
| 1998 | 141 | 182 |
| 1999 | 114 | 182 |

यह दीर्घकालिक तुलना है। भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी अलग ऐतिहासिक संगठन हैं; 1977 में जनसंघ जनता पार्टी में विलीन हुआ था।

## 11. मूल आधिकारिक ऐतिहासिक स्रोत

1999 के तेरहवें लोकसभा चुनाव का सबसे प्रामाणिक स्रोत भारत निर्वाचन आयोग की मूल सांख्यिकीय रिपोर्ट है।

[भारत निर्वाचन आयोग : Statistical Report on General Elections, 1999 — Thirteenth Lok Sabha](https://www.eci.gov.in/eci-backend/public/api/download?url=LMAhAK6sOPBp%2FNFF0iRfXbEB1EVSLT41NNLRjYNJJP1KivrUxbfqkDatmHy12e%2FzVx8fLfn2ReU7TfrqYobgIkUhbtp1jYSDOEh0putYIbkiZnCZWMJAWv5FOo8QaiJzbCrRQmR%2FvdHfl2oiLCgpBOFiQQw1DFUOpqPxvwifJXEZ%2FmEz%2F%2FSc%2FlW4LA3Se2g1&utm_source=chatgpt.com)

[निर्वाचन आयोग : सभी लोकसभा चुनावों के सांख्यिकीय अभिलेख](https://www.eci.gov.in/statistical-reports?utm_source=chatgpt.com)

[अंतर-संसदीय संघ : 1999 चुनाव और सरकार गठन का ऐतिहासिक विवरण](https://data.ipu.org/election-summary/HTML/2145_99.htm?utm_source=chatgpt.com)

मूल रिपोर्ट के पृष्ठ 76–89 पर विजयी उम्मीदवार, 91–99 पर दलों की राज्यवार सीटें तथा 100–108 पर राष्ट्रीय दलवार वोट शेयर दिए गए हैं।

## 12. तेरहवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक निष्कर्ष

1999 का आम चुनाव भारतीय गठबंधन राजनीति में स्थिर सरकार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव था।

भाजपा ने लगातार दूसरी बार 182 सीटें जीतीं। कांग्रेस 114 सीटों पर आ गई। तेलुगु देशम, जनता दल (यूनाइटेड), शिवसेना, डीएमके, बीजू जनता दल और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से एनडीए ने केंद्र में सरकार बनाई।

इस चुनाव से तीन उल्लेखनीय राजनीतिक तथ्य सामने आते हैं। पहला, केंद्र में सरकार बनाने के लिए केवल सबसे बड़ी पार्टी की सीटों से अधिक व्यापक गठबंधन का समर्थन महत्वपूर्ण था। दूसरा, क्षेत्रीय दलों ने राष्ट्रीय सत्ता-समीकरण में अपनी भूमिका बढ़ाई। तीसरा, 1996 से जारी अल्पकालिक सरकारों के बाद एक गठबंधन सरकार लगभग पाँच वर्ष तक चली।

**इस चुनाव का केंद्रीय ऐतिहासिक महत्व:** 1998 और 1999 में भाजपा को समान 182 सीटें मिलीं, लेकिन 1999 के गठबंधन ने कहीं अधिक स्थिर सरकार दी। यह भारत में चुनाव-पूर्व गठबंधन, साझा संसदीय समर्थन और गठबंधन प्रबंधन के विकसित होते स्वरूप का महत्वपूर्ण उदाहरण था।

इसके बाद 2004 का चौदहवाँ लोकसभा चुनाव हुआ, जिसमें एनडीए सत्ता से बाहर हुआ और कांग्रेस के नेतृत्व में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) की सरकार बनी। डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-13