# भारत का बारहवाँ लोकसभा चुनाव 1998 : भाजपा की 182 सीटें, वाजपेयी की गठबंधन सरकार और एक वोट से सत्ता का पतन

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — बारहवाँ अध्याय

भारत का बारहवाँ लोकसभा आम चुनाव फरवरी–मार्च 1998 में हुआ। महज दो वर्ष पहले, 1996 में चुनी गई ग्यारहवीं लोकसभा अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी थी। अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार के बाद कांग्रेस के बाहरी समर्थन से बनी एच. डी. देवेगौड़ा और इंद्र कुमार गुजराल की सरकारें भी गिर गईं।

1998 के चुनाव में **भारतीय जनता पार्टी ने 543 में से 182 सीटें जीतीं** और लगातार दूसरी बार लोकसभा की सबसे बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस 141 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।

भाजपा को 25.59 प्रतिशत और कांग्रेस को 25.82 प्रतिशत वोट मिले। अर्थात कांग्रेस का राष्ट्रीय वोट प्रतिशत थोड़ा अधिक था, लेकिन भाजपा ने 41 सीटें अधिक जीतीं।

भाजपा ने अन्नाद्रमुक, समता पार्टी, बीजू जनता दल, शिवसेना, शिरोमणि अकाली दल और दूसरे क्षेत्रीय दलों के समर्थन से सरकार बनाई। 19 मार्च 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।

लेकिन यह सरकार भी पाँच वर्ष नहीं चल सकी। अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता के समर्थन वापस लेने के बाद **17 अप्रैल 1999 को वाजपेयी सरकार लोकसभा में केवल एक वोट से विश्वास मत हार गई—पक्ष में 269 और विपक्ष में 270 वोट पड़े।**

निर्वाचित लोकसभा सीटें

## 543

भाजपा की सीटें

## 182

कांग्रेस की सीटें

## 141

मतदान प्रतिशत

## 61.97%

## 1. बारहवें लोकसभा चुनाव के प्रमुख आँकड़े

| विषय | विवरण |
| --- | --- |
| चुनाव की घोषणा | 1 जनवरी 1998 |
| प्रमुख मतदान | 16–28 फरवरी 1998 |
| जम्मू-कश्मीर में अतिरिक्त मतदान | 7 मार्च 1998 |
| लोकसभा | बारहवीं |
| कुल निर्वाचित सीटें | 543 |
| बहुमत के लिए | 272 |
| कुल पंजीकृत मतदाता | 60,58,80,192 |
| मतदान करने वाले | लगभग 37.54 करोड़ |
| मतदान प्रतिशत | 61.97% |
| कुल वैध मत | 36,83,76,700 |
| चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार | 4,750 |
| निर्दलीय उम्मीदवार | 1,915 |
| राष्ट्रीय राजनीतिक दल | 7 |
| भाजपा की सीटें | 182 |
| कांग्रेस की सीटें | 141 |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 32 |
| समाजवादी पार्टी | 20 |
| अन्नाद्रमुक | 18 |
| राष्ट्रीय जनता दल | 17 |
| प्रधानमंत्री बने | अटल बिहारी वाजपेयी |
| लोकसभा का गठन | 10 मार्च 1998 |
| मुख्य निर्वाचन आयुक्त | डॉ. एम. एस. गिल |

मतदान प्रतिशत के लिए निर्वाचन आयोग की अंतिम सांख्यिकीय गणना 61.97 प्रतिशत है। कुछ अंतरराष्ट्रीय चुनावी विवरणों में प्रारंभिक अथवा अलग गणना के आधार पर लगभग 62.04 प्रतिशत दर्ज है।

## 2. 1998 में मध्यावधि चुनाव क्यों कराने पड़े?

1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा 161 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने, लेकिन 13 दिन में सरकार गिर गई।

इसके बाद संयुक्त मोर्चे की दो सरकारें बनीं।

1. **16 मई 1996 — वाजपेयी की पहली सरकार**

भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन पूर्ण बहुमत नहीं जुटा सकी। 28 मई को वाजपेयी ने इस्तीफा दिया। 2. **1 जून 1996 — एच. डी. देवेगौड़ा प्रधानमंत्री**

जनता दल और अन्य दलों के संयुक्त मोर्चे ने कांग्रेस के बाहरी समर्थन से सरकार बनाई। 3. **अप्रैल 1997 — कांग्रेस ने समर्थन वापस लिया**

देवेगौड़ा सरकार लोकसभा में विश्वास मत हार गई। 4. **21 अप्रैल 1997 — इंद्र कुमार गुजराल प्रधानमंत्री**

संयुक्त मोर्चे की नई सरकार बनी। कांग्रेस ने फिर बाहर से समर्थन दिया। 5. **नवंबर 1997 — जैन आयोग की रिपोर्ट पर विवाद**

राजीव गांधी हत्या की जाँच से जुड़े जैन आयोग की अंतरिम रिपोर्ट और संयुक्त मोर्चे की सरकार में डीएमके की भागीदारी पर विवाद बढ़ा। कांग्रेस ने गुजराल सरकार से समर्थन वापस लिया। 6. **4 दिसंबर 1997 — लोकसभा भंग**

ग्यारहवीं लोकसभा भंग हुई और नए चुनाव का रास्ता खुला।

इसी अस्थिर राजनीतिक पृष्ठभूमि में 1998 का चुनाव हुआ।

## 3. कौन-कौन से राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे और उनके नेता कौन थे?

1998 के चुनाव में राष्ट्रीय दलों के साथ अनेक क्षेत्रीय पार्टियों की भूमिका महत्वपूर्ण थी। विशेष रूप से ओडिशा में बीजू जनता दल, पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल जैसे नए संगठनों ने चुनाव लड़ा।

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | सीताराम केसरी, सोनिया गांधी प्रमुख प्रचारक |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | हरकिशन सिंह सुरजीत, ज्योति बसु |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | ए. बी. बर्धन, इंद्रजीत गुप्त |
| समाजवादी पार्टी | मुलायम सिंह यादव |
| बहुजन समाज पार्टी | कांशीराम, मायावती |
| जनता दल | एच. डी. देवेगौड़ा, आई. के. गुजराल सहित तत्कालीन नेतृत्व |
| राष्ट्रीय जनता दल | लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी |
| समता पार्टी | जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार |
| तेलुगु देशम पार्टी | एन. चंद्रबाबू नायडू |
| अन्नाद्रमुक | जे. जयललिता |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| बीजू जनता दल | नवीन पटनायक |
| शिवसेना | बाल ठाकरे, मनोहर जोशी |
| तृणमूल कांग्रेस | ममता बनर्जी |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | डॉ. एस. रामदास |
| मरुमलार्ची डीएमके | वाइको |
| तमिल मनीला कांग्रेस | जी. के. मूपनार |
| हरियाणा लोकदल (राष्ट्रीय) | ओमप्रकाश चौटाला |
| लोकशक्ति | रामकृष्ण हेगड़े |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | फारूक अब्दुल्ला |

**कांग्रेस नेतृत्व का एक महत्वपूर्ण तथ्य:** 1998 के चुनाव के समय कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी थे। सोनिया गांधी ने पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया, लेकिन वह चुनाव के दौरान कांग्रेस की अध्यक्ष नहीं थीं। 14 मार्च 1998 को चुनाव के बाद उन्होंने पार्टी की कमान संभाली।

## 4. किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं और कितना वोट प्रतिशत?

1998 के चुनाव की राष्ट्रीय दलवार परिणाम तालिका इस प्रकार थी। मत प्रतिशत देशभर में पड़े वैध मतों के आधार पर है, न कि केवल उस पार्टी द्वारा लड़ी गई सीटों के आधार पर।

| राजनीतिक दल | सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | 182 | 25.59% |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 141 | 25.82% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 32 | 5.16% |
| समाजवादी पार्टी | 20 | 4.93% |
| अन्नाद्रमुक | 18 | 1.83% |
| राष्ट्रीय जनता दल | 17 | 2.78% |
| समता पार्टी | 12 | 1.76% |
| तेलुगु देशम पार्टी | 12 | 2.77% |
| बीजू जनता दल | 9 | 1.00% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 9 | 1.75% |
| शिरोमणि अकाली दल | 8 | 0.81% |
| तृणमूल कांग्रेस | 7 | 2.42% |
| जनता दल | 6 | 3.24% |
| शिवसेना | 6 | 1.77% |
| डीएमके | 6 | 1.44% |
| बहुजन समाज पार्टी | 5 | 4.67% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 5 | 0.55% |
| हरियाणा लोकदल (राष्ट्रीय) | 4 | 0.53% |
| पट्टाली मक्कल कच्ची | 4 | 0.42% |
| रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया | 4 | 0.37% |
| तमिल मनीला कांग्रेस | 3 | 1.40% |
| लोकशक्ति | 3 | 0.69% |
| मरुमलार्ची डीएमके | 3 | 0.44% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 3 | 0.21% |
| अन्य छोटे दल | 18 | दलवार अलग |
| निर्दलीय | 6 | 2.37% |
| **कुल निर्वाचित** | **543** |  |

स्रोत: भारत निर्वाचन आयोग, *Statistical Report on General Elections, 1998*, राष्ट्रीय दलवार मत और सीट तालिका। शून्य सीट जीतने वाले दल शामिल नहीं हैं; छोटे दलों की सीटें समेकित दिखाई गई हैं।

## चुनाव परिणामों से चार महत्वपूर्ण तथ्य

पहला, कांग्रेस को भाजपा से लगभग 8.45 लाख अधिक वोट मिले, लेकिन भाजपा ने 41 अतिरिक्त सीटें जीतीं।

दूसरा, भाजपा ने 388 सीटों पर चुनाव लड़ा और उनमें से 182 जीतीं। कांग्रेस ने 477 सीटों पर चुनाव लड़ा और 141 जीतीं। चुनावी तालमेल के कारण दोनों दलों की उम्मीदवार संख्या अलग थी।

तीसरा, 1996 में 46 सीटें जीतने वाला जनता दल 1998 में केवल छह सीटें जीत पाया। उसके अनेक प्रमुख नेता अलग-अलग क्षेत्रीय दलों में जा चुके थे।

चौथा, क्षेत्रीय दलों की संसदीय भूमिका बढ़ी। अन्नाद्रमुक को 18, राजद को 17, समता पार्टी और तेलुगु देशम को 12-12, बीजू जनता दल को नौ तथा तृणमूल कांग्रेस को सात सीटें मिलीं।

## 5. राज्यवार सीटें : भाजपा, कांग्रेस और दूसरे दलों का प्रदर्शन

1998 में झारखंड, छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड अलग राज्य नहीं थे। इसलिए बिहार की 54, मध्य प्रदेश की 40 और उत्तर प्रदेश की 85 सीटों में उनके वर्तमान क्षेत्रों की सीटें भी शामिल थीं।

नीचे उस समय के सभी 25 राज्यों और सात केंद्रशासित प्रदेशों का ब्यौरा है।

| तत्कालीन राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | भाजपा | कांग्रेस | अन्य |
| --- | --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 85 | 57 | 0 | 28 |
| बिहार | 54 | 20 | 5 | 29 |
| महाराष्ट्र | 48 | 4 | 33 | 11 |
| आंध्र प्रदेश | 42 | 4 | 22 | 16 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 1 | 1 | 40 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 30 | 10 | 0 |
| तमिलनाडु | 39 | 3 | 0 | 36 |
| कर्नाटक | 28 | 13 | 9 | 6 |
| गुजरात | 26 | 19 | 7 | 0 |
| राजस्थान | 25 | 5 | 19 | 1 |
| ओडिशा | 21 | 7 | 5 | 9 |
| केरल | 20 | 0 | 8 | 12 |
| असम | 14 | 1 | 10 | 3 |
| पंजाब | 13 | 3 | 0 | 10 |
| हरियाणा | 10 | 1 | 3 | 6 |
| दिल्ली | 7 | 6 | 1 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 2 | 1 | 3 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 3 | 1 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 0 | 0 | 2 |
| गोवा | 2 | 0 | 2 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 0 | 0 | 2 |
| मेघालय | 2 | 0 | 2 | 0 |
| त्रिपुरा | 2 | 0 | 0 | 2 |
| मिजोरम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| नगालैंड | 1 | 0 | 1 | 0 |
| सिक्किम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| अंडमान एवं निकोबार | 1 | 0 | 1 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दादरा एवं नगर हवेली | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दमन और दीव | 1 | 1 | 0 | 0 |
| लक्षद्वीप | 1 | 0 | 1 | 0 |
| पांडिचेरी | 1 | 0 | 0 | 1 |
| **कुल** | **543** | **182** | **141** | **220** |

स्रोत: निर्वाचन आयोग की 1998 राज्यवार दलवार तालिका, पृष्ठ 96–100; राज्यवार परिणामों का मिलान।

## 6. महत्वपूर्ण राज्यों में सभी प्रमुख दलों के परिणाम

| राज्य | दलवार प्रमुख परिणाम |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | भाजपा 57, सपा 20, बसपा 4, समता पार्टी 2, अन्य 2 |
| बिहार | भाजपा 20, राजद 17, समता पार्टी 10, कांग्रेस 5, जनता दल 1, अन्य 1 |
| महाराष्ट्र | कांग्रेस 33, शिवसेना 6, भाजपा 4, रिपब्लिकन पार्टी 4, पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी 1 |
| मध्य प्रदेश | भाजपा 30, कांग्रेस 10 |
| राजस्थान | कांग्रेस 19, भाजपा 5, ऑल इंडिया इंदिरा कांग्रेस (सेक्युलर) 1 |
| गुजरात | भाजपा 19, कांग्रेस 7 |
| आंध्र प्रदेश | कांग्रेस 22, तेलुगु देशम 12, भाजपा 4, भाकपा 2, जनता दल 1, एमआईएम 1 |
| कर्नाटक | भाजपा 13, कांग्रेस 9, जनता दल 3, लोकशक्ति 3 |
| तमिलनाडु | अन्नाद्रमुक 18, डीएमके 5, भाजपा 3, एमडीएमके 3, तमिल मनीला कांग्रेस 3, पीएमके 4, अन्य 3 |
| पश्चिम बंगाल | माकपा 24, तृणमूल कांग्रेस 7, आरएसपी 4, भाकपा 3, फॉरवर्ड ब्लॉक 2, कांग्रेस 1, भाजपा 1 |
| ओडिशा | बीजू जनता दल 9, भाजपा 7, कांग्रेस 5 |
| पंजाब | अकाली दल 8, भाजपा 3, जनता दल 1, निर्दलीय 1 |
| दिल्ली | भाजपा 6, कांग्रेस 1 |
| जम्मू-कश्मीर | नेशनल कॉन्फ्रेंस 3, भाजपा 2, कांग्रेस 1 |
| केरल | कांग्रेस 8, माकपा 6, भाकपा 2, मुस्लिम लीग 2, केरल कांग्रेस (एम) 1, आरएसपी 1 |
| हरियाणा | हरियाणा लोकदल (राष्ट्रीय) 4, कांग्रेस 3, भाजपा 1, बसपा 1, हरियाणा विकास पार्टी 1 |

1998 में उत्तर प्रदेश ने भाजपा को 57 सांसद दिए। बिहार में उसे 20, मध्य प्रदेश में 30 और गुजरात में 19 सीटें मिलीं। इसके विपरीत महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में कांग्रेस ने उल्लेखनीय सफलता हासिल की।

विशेष रूप से तमिलनाडु में भाजपा और अन्नाद्रमुक के गठबंधन का प्रदर्शन केंद्रीय सरकार गठन के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ।

## 7. चुनाव की सात महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएँ

**1. अटल बिहारी वाजपेयी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने**

1996 में मात्र 13 दिन प्रधानमंत्री रहने वाले वाजपेयी ने 19 मार्च 1998 को दोबारा शपथ ली। इस बार भाजपा ने व्यापक गठबंधन बनाकर सरकार गठित की।

28 मार्च 1998 को लोकसभा में सरकार ने 275 मतों के समर्थन और 260 मतों के विरोध से विश्वास मत जीता।

**2. सोनिया गांधी का सक्रिय चुनाव प्रचार में प्रवेश**

कांग्रेस में संगठनात्मक संकट के बीच सोनिया गांधी ने चुनाव प्रचार शुरू किया। उन्होंने लगभग 130 सार्वजनिक सभाओं को संबोधित किया।

लेकिन कांग्रेस 141 सीटें ही जीत सकी, जबकि 1996 में उसके 140 सांसद थे। चुनाव के बाद 14 मार्च को सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं।

**3. जयललिता की अन्नाद्रमुक को 18 सीटें**

1996 में अन्नाद्रमुक एक भी लोकसभा सीट नहीं जीत सकी थी। लेकिन 1998 में उसने 18 सीटें जीतीं और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार की महत्वपूर्ण सहयोगी बनी।

आगे चलकर जयललिता और केंद्र सरकार के बीच अनेक मुद्दों पर मतभेद पैदा हुए, जो 1999 में सरकार के पतन से जुड़े।

**4. तृणमूल कांग्रेस का पहला लोकसभा चुनाव**

ममता बनर्जी ने जनवरी 1998 में कांग्रेस से अलग होकर अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस बनाई।

पहले ही लोकसभा चुनाव में पार्टी ने पश्चिम बंगाल की सात सीटें जीतीं। वह राज्य में कांग्रेस और वाम मोर्चे से अलग एक नई राजनीतिक शक्ति के रूप में सामने आई।

**5. बीजू जनता दल का उभार**

बीजू पटनायक के निधन के बाद नवीन पटनायक ने दिसंबर 1997 में बीजू जनता दल की स्थापना की।

पार्टी ने 1998 में ओडिशा की नौ लोकसभा सीटें जीतीं। भाजपा के साथ उसका चुनावी तालमेल आगे चलकर ओडिशा की राजनीति में भी महत्वपूर्ण रहा।

**6. राष्ट्रीय जनता दल का पहला लोकसभा आम चुनाव**

लालू प्रसाद यादव ने 1997 में जनता दल से अलग होकर राष्ट्रीय जनता दल बनाया।

1998 में राजद ने 17 सीटें जीतीं। बिहार में भाजपा को 20 और समता पार्टी को दस सीटें मिलीं। कांग्रेस के खाते में पाँच सीटें आईं।

**7. समता पार्टी की गठबंधन राजनीति में भूमिका**

जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार की समता पार्टी ने 12 लोकसभा सीटें जीतीं। यह दल भाजपा का महत्वपूर्ण सहयोगी था।

बिहार में समता पार्टी को दस सीटें मिलीं। केंद्र में सरकार गठन के दौरान जॉर्ज फर्नांडिस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

## 8. बारहवीं लोकसभा के सबसे बड़े घटनाक्रम

## पोखरण-II : भारत के परमाणु परीक्षण

11 और 13 मई 1998 को भारत ने राजस्थान के पोखरण परीक्षण क्षेत्र में पाँच परमाणु परीक्षण किए। इन्हें ऑपरेशन शक्ति कहा गया।

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में हुए इन परीक्षणों के बाद भारत की परमाणु नीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर व्यापक प्रभाव पड़ा। अमेरिका सहित कई देशों ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए।

डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. आर. चिदंबरम की इस अभियान में प्रमुख भूमिका थी।

## लाहौर बस यात्रा और घोषणा

फरवरी 1999 में प्रधानमंत्री वाजपेयी बस यात्रा के माध्यम से पाकिस्तान के लाहौर पहुँचे। 21 फरवरी 1999 को वाजपेयी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने लाहौर घोषणा पर हस्ताक्षर किए।

इसमें भारत-पाकिस्तान संबंधों को बेहतर बनाने, परमाणु जोखिम कम करने और संवाद बढ़ाने जैसे विषय शामिल थे।

## 9. जयललिता ने समर्थन क्यों वापस लिया और सरकार एक वोट से कैसे गिरी?

यह बारहवीं लोकसभा के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण संसदीय घटनाक्रम था।

अन्नाद्रमुक के 18 सांसद सरकार के समर्थन में थे। जयललिता और वाजपेयी सरकार के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हुए। इनमें तमिलनाडु की डीएमके सरकार को लेकर जयललिता की माँगें, रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडिस को हटाने का प्रश्न तथा नौसेना प्रमुख एडमिरल विष्णु भागवत की बर्खास्तगी से संबंधित विवाद शामिल थे।

अप्रैल 1999 में अन्नाद्रमुक ने सरकार से समर्थन वापस लिया। राष्ट्रपति के. आर. नारायणन ने प्रधानमंत्री से लोकसभा में बहुमत साबित करने को कहा।

## 17 अप्रैल 1999 : लोकसभा में विश्वास मत

सरकार के पक्ष में

## 269

सरकार के विरोध में

## 270

अंतर — केवल 1 वोट

स्रोत: लोकसभा सचिवालय, *The Journal of Parliamentary Information*, सितंबर 1999।

## एक वोट के विवाद में किन नेताओं की चर्चा हुई?

इस विश्वास मत में तीन घटनाएँ विशेष रूप से चर्चित रहीं।

**गिरिधर गमांग का मतदान:** ओडिशा के मुख्यमंत्री बन चुके गिरिधर गमांग अभी लोकसभा सदस्य भी थे। उन्होंने सरकार के विरुद्ध मतदान किया। मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए सांसद के रूप में मतदान करने के उनके अधिकार को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ।

**सैफुद्दीन सोज का विरोधी मतदान:** नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद सैफुद्दीन सोज ने अपनी पार्टी की घोषित स्थिति से अलग सरकार के खिलाफ मतदान किया।

**बहुजन समाज पार्टी का रुख:** मायावती और बसपा के सांसदों के मतदान संबंधी फैसले भी विश्वास मत के परिणाम के संदर्भ में महत्वपूर्ण रहे।

इन घटनाओं को अकेले सरकार गिरने का कारण नहीं माना जा सकता; अंतिम परिणाम 269 बनाम 270 के पूरे सदन के मतदान से निकला।

## सरकार गिरने के बाद सोनिया गांधी ने क्या दावा किया?

17 अप्रैल को सरकार गिरने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वैकल्पिक सरकार बनाने की संभावनाएँ तलाशीं। उन्होंने 272 सांसदों का समर्थन होने का दावा किया, लेकिन विभिन्न दलों का निश्चित समर्थन नहीं जुटा सकीं।

25 अप्रैल 1999 को उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि वह सरकार बनाने की स्थिति में नहीं हैं। इसके बाद 26 अप्रैल 1999 को बारहवीं लोकसभा भंग कर दी गई और नए चुनाव कराने का रास्ता खुला।

## 10. 1996 और 1998 के चुनावों की तुलना

| राजनीतिक दल | 1996 सीटें | 1998 सीटें | परिवर्तन |
| --- | --- | --- | --- |
| भारतीय जनता पार्टी | 161 | 182 | \+21 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 140 | 141 | \+1 |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 32 | 32 | 0 |
| समाजवादी पार्टी | 17 | 20 | \+3 |
| बहुजन समाज पार्टी | 11 | 5 | −6 |
| जनता दल | 46 | 6 | −40 |
| तेलुगु देशम | 16 | 12 | −4 |
| अन्नाद्रमुक | 0 | 18 | \+18 |
| डीएमके | 17 | 6 | −11 |
| शिवसेना | 15 | 6 | −9 |
| समता पार्टी | 8 | 12 | \+4 |

भाजपा की सीटों में 21 की वृद्धि हुई। कांग्रेस की सीटें लगभग स्थिर रहीं।

## मत प्रतिशत का तुलनात्मक अध्ययन

| राजनीतिक दल | 1996 वोट शेयर | 1998 वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| कांग्रेस | 28.80% | 25.82% |
| भाजपा | 20.29% | 25.59% |
| माकपा | 6.12% | 5.16% |
| सपा | 3.28% | 4.93% |
| बसपा | 4.02% | 4.67% |
| जनता दल | 8.08% | 3.24% |

1996 से 1998 के बीच भाजपा के मत प्रतिशत में 5.30 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई। कांग्रेस के मत प्रतिशत में 2.98 अंकों की गिरावट दर्ज हुई।

इसके साथ ही क्षेत्रीय दलों की संसदीय भूमिका और बढ़ी। कई गठबंधन सहयोगियों की सीटों के बिना किसी एक बड़े राष्ट्रीय दल के लिए सरकार बनाना संभव नहीं था।

## 11. पहले बारह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और जनसंघ/भाजपा की सीटें

| चुनाव वर्ष | कांग्रेस | जनसंघ / भाजपा |
| --- | --- | --- |
| 1951–52 | 364 | 3 |
| 1957 | 371 | 4 |
| 1962 | 361 | 14 |
| 1967 | 283 | 35 |
| 1971 | 352 | 22 |
| 1977 | 154 | जनता पार्टी में समाहित |
| 1980 | 353 | भाजपा का गठन चुनाव के बाद |
| 1984–85 | 414 | 2 |
| 1989 | 197 | 85 |
| 1991–92 | 244 | 120 |
| 1996 | 140 | 161 |
| 1998 | 141 | 182 |

## 12. बारहवीं लोकसभा की समयरेखा

| तारीख | प्रमुख घटना |
| --- | --- |
| 4 दिसंबर 1997 | ग्यारहवीं लोकसभा भंग |
| 1 जनवरी 1998 | आम चुनाव कार्यक्रम की घोषणा |
| फरवरी–मार्च 1998 | बारहवें लोकसभा चुनाव |
| 10 मार्च 1998 | बारहवीं लोकसभा का गठन |
| 19 मार्च 1998 | अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने |
| 28 मार्च 1998 | सरकार ने विश्वास मत जीता |
| 11 और 13 मई 1998 | पोखरण में परमाणु परीक्षण |
| 20–21 फरवरी 1999 | वाजपेयी की लाहौर यात्रा और लाहौर घोषणा |
| अप्रैल 1999 | अन्नाद्रमुक ने समर्थन वापस लिया |
| 17 अप्रैल 1999 | वाजपेयी सरकार विश्वास मत हारी |
| 26 अप्रैल 1999 | बारहवीं लोकसभा भंग |
| सितंबर–अक्टूबर 1999 | तेरहवें लोकसभा चुनाव |

## 13. मूल ऐतिहासिक स्रोत

निर्वाचन आयोग की 1998 की सांख्यिकीय रिपोर्ट में प्रत्याशियों से लेकर प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र के परिणाम तक का विवरण उपलब्ध है।

[भारत निर्वाचन आयोग — 1998 लोकसभा चुनाव, सांख्यिकीय रिपोर्ट, खंड I](https://ceomadhyapradesh.nic.in/Links/Books/98_Vol_I.pdf)

[निर्वाचन आयोग — सभी लोकसभा चुनावों की मूल रिपोर्टें](https://www.eci.gov.in/statistical-reports)

[लोकसभा सचिवालय — 17 अप्रैल 1999 को एक वोट से सरकार गिरने का आधिकारिक संसदीय विवरण](https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/763158/1/jpi_September_1999.pdf)

[अंतर-संसदीय संघ — 1998 भारतीय लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक विवरण](https://data.ipu.org/election-summary/HTML/2145_98.htm)

राज्यवार तालिका में एक छोटा सांख्यिकीय सुधार: राजस्थान में कांग्रेस की **18**, भाजपा की **5** और अन्य दलों की **2** सीटें थीं। इससे राष्ट्रीय कुल कांग्रेस 141, भाजपा 182 और अन्य 220 सीटों का सही योग बनता है।

## 14. बारहवें लोकसभा चुनाव का ऐतिहासिक निष्कर्ष

1998 का चुनाव भारत में गठबंधन आधारित राष्ट्रीय राजनीति के महत्वपूर्ण चरण का प्रतिनिधित्व करता है। भाजपा ने 182 सीटें हासिल कीं और अपने सहयोगियों के साथ केंद्र में सरकार बनाई। कांग्रेस की सीटें 141 रहीं, लेकिन उसका राष्ट्रीय मत प्रतिशत भाजपा से मामूली अधिक था।

इस चुनाव से तीन राजनीतिक प्रवृत्तियाँ सामने आईं। पहली, भाजपा का राष्ट्रीय संसदीय विस्तार जारी रहा। दूसरी, कांग्रेस का मत आधार व्यापक होने के बावजूद कई राज्यों में सीटों के रूप में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा। तीसरी, क्षेत्रीय दलों की भूमिका सरकार के गठन और उसकी स्थिरता, दोनों में निर्णायक हो गई।

वाजपेयी सरकार ने अपने 13 महीने के कार्यकाल में पोखरण परमाणु परीक्षण और पाकिस्तान के साथ लाहौर कूटनीतिक पहल जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए। लेकिन अंततः सहयोगी दलों के समर्थन में परिवर्तन के कारण उसे सत्ता छोड़नी पड़ी।

**बारहवीं लोकसभा का सबसे चर्चित संसदीय तथ्य 17 अप्रैल 1999 का विश्वास मत है, जिसमें सरकार केवल एक वोट से हार गई।** उसके बाद वैकल्पिक सरकार नहीं बन सकी और देश को लगातार तीसरी बार समय से पहले लोकसभा चुनाव की ओर जाना पड़ा।

1999 का तेरहवाँ लोकसभा चुनाव इसलिए विशेष महत्व रखता है कि उसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बनी सरकार ने अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा किया।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-12