# भारत का आठवाँ लोकसभा चुनाव 1984–85 : राजीव गांधी की ऐतिहासिक जीत, भाजपा की पहली परीक्षा और तेलुगु देशम का उभार

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — आठवाँ अध्याय

आठवाँ लोकसभा आम चुनाव 24, 27 और 28 दिसंबर 1984 को हुआ। यह स्वतंत्र भारत के चुनावी इतिहास का असाधारण दौर था। 31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने। उसके दो महीने के भीतर लोकसभा चुनाव कराए गए।

कांग्रेस ने दिसंबर 1984 में मतदान वाली 514 सीटों में से **404 सीटें** जीत लीं। बाद में सितंबर और दिसंबर 1985 में पंजाब तथा असम के स्थगित चुनाव पूरे होने पर कांग्रेस की कुल सीटें बढ़कर **414** हो गईं।

यह किसी एक राजनीतिक दल द्वारा भारतीय लोकसभा चुनाव में हासिल की गई अब तक की सर्वाधिक सीटें थीं। दूसरी ओर, एन. टी. रामाराव की तेलुगु देशम पार्टी 30 सीटें जीतकर लोकसभा में सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी।

अप्रैल 1980 में बनी भारतीय जनता पार्टी का यह पहला लोकसभा आम चुनाव था। पार्टी ने 224 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन केवल दो सीटें जीत सकी।

दिसंबर 1984 की सीटें

## 514

1984–85 में निर्वाचित सीटें

## 541

कांग्रेस की कुल सीटें

## 414

तेलुगु देशम की सीटें

## 30

## 1. आठवें लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

| विषय | विवरण |
| --- | --- |
| लोकसभा | आठवीं |
| मुख्य मतदान | 24, 27 और 28 दिसंबर 1984 |
| पंजाब का स्थगित चुनाव | सितंबर 1985 |
| असम का स्थगित चुनाव | दिसंबर 1985 |
| दिसंबर 1984 में निर्वाचित सीटें | 514 |
| 1985 में अतिरिक्त निर्वाचित सीटें | 27 |
| कुल निर्वाचित सीटें | 541 |
| बहुमत के लिए | 271 सीटें (541 के आधार पर) |
| कांग्रेस की दिसंबर 1984 की जीत | 404 सीटें |
| कांग्रेस का अंतिम परिणाम | 414 सीटें |
| मुख्य 1984 चुनाव में कांग्रेस का वोट शेयर | 49.10% |
| 1984–85 का संयुक्त कांग्रेस वोट शेयर | लगभग 48.12% |
| मुख्य 1984 चुनाव में मतदान | लगभग 63.56% |
| सबसे बड़ा विपक्षी दल | तेलुगु देशम पार्टी — 30 |
| प्रधानमंत्री | राजीव गांधी |
| लोकसभा का गठन | 31 दिसंबर 1984 |

एक महत्वपूर्ण अंतर है: **1984 की मूल परिणाम तालिका में 404 सीटें और 49.10% कांग्रेस वोट शेयर दर्ज है**, जबकि 1985 के स्थगित चुनाव जोड़ने पर 414 सीटें और लगभग 48.12% संयुक्त वोट शेयर प्राप्त होता है। इन्हें एक ही समयावधि का आँकड़ा समझना गलत होगा।

## 2. 1984 का चुनाव किन राजनीतिक परिस्थितियों में हुआ?

1980 से 1984 के बीच देश में कई बड़ी घटनाएँ हुईं। इनमें पंजाब में बढ़ती आतंकवादी हिंसा, जून 1984 का ऑपरेशन ब्लू स्टार, इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद सिख-विरोधी हिंसा महत्वपूर्ण थीं।

1. **जून 1984 — ऑपरेशन ब्लू स्टार**

भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे हथियारबंद उग्रवादियों के विरुद्ध अभियान चलाया। यह अभियान देश में गहरे राजनीतिक और सामाजिक विवाद का विषय बना। 2. **31 अक्टूबर 1984 — इंदिरा गांधी की हत्या**

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी। उसी दिन राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 3. **31 अक्टूबर से नवंबर 1984 — सिख-विरोधी हिंसा**

दिल्ली और कई अन्य स्थानों पर सिख समुदाय के लोगों पर हमले हुए। हजारों लोगों की जान गई। बाद की जाँचों और अदालती मामलों में राजनीतिक संरक्षण, पुलिस की निष्क्रियता और कुछ नेताओं की संलिप्तता के प्रश्न उठे। 4. **दिसंबर 1984 — लोकसभा चुनाव**

इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद व्यापक शोक और राष्ट्रीय राजनीतिक वातावरण के बीच चुनाव हुए। कांग्रेस ने राजीव गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा। 5. **1985 — पंजाब और असम में चुनाव**

सुरक्षा तथा आंदोलन-संबंधी परिस्थितियों के कारण दोनों राज्यों में चुनाव टाले गए थे। वहाँ अगले वर्ष मतदान हुआ।

## 3. किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें थीं और कौन जीता?

नीचे 1984–85 के पूरे चुनाव की राज्यवार स्थिति दी गई है। इसमें 1985 में संपन्न असम की 14 और पंजाब की 13 सीटें भी शामिल हैं।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | कांग्रेस | अन्य |
| --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 85 | 83 | 2 |
| बिहार | 54 | 48 | 6 |
| महाराष्ट्र | 48 | 43 | 5 |
| आंध्र प्रदेश | 42 | 6 | 36 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 16 | 26 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 40 | 0 |
| तमिलनाडु | 39 | 25 | 14 |
| कर्नाटक | 28 | 24 | 4 |
| गुजरात | 26 | 24 | 2 |
| राजस्थान | 25 | 25 | 0 |
| ओडिशा (उड़ीसा) | 21 | 20 | 1 |
| केरल | 20 | 13 | 7 |
| असम (1985) | 14 | 4 | 10 |
| पंजाब (1985) | 13 | 6 | 7 |
| हरियाणा | 10 | 10 | 0 |
| दिल्ली | 7 | 7 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 3 | 3 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 4 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 2 | 0 |
| गोवा, दमन और दीव | 2 | 2 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 2 | 0 |
| मेघालय | 2 | 2 | 0 |
| त्रिपुरा | 2 | 0 | 2 |
| नगालैंड | 1 | 1 | 0 |
| मिजोरम | 1 | — | — |
| सिक्किम | 1 | 0 | 1 |
| अंडमान-निकोबार | 1 | 1 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 1 | 0 |
| दादरा-नगर हवेली | 1 | 0 | 1 |
| लक्षद्वीप | 1 | 1 | 0 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 1 | 0 |
| **कुल निर्धारित सीटें** | **542** |  |  |
| **कुल निर्वाचित सीटें** | **541** | **414** | **127** |

मिजोरम की सीट इस 1984–85 की संयुक्त परिणाम सूची में शामिल नहीं है; इसलिए 542 निर्धारित सीटों और 541 के पूर्ण चुनाव परिणाम में एक सीट का अंतर है।

## सबसे महत्वपूर्ण राज्यवार परिणाम

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने 85 में से 83 सीटें और मध्य प्रदेश की सभी 40 सीटें जीतीं। राजस्थान में भी कांग्रेस सभी 25 सीटों पर विजयी हुई।

इसके विपरीत आंध्र प्रदेश की 42 में से 30 सीटें तेलुगु देशम पार्टी ने जीतीं। पश्चिम बंगाल में वाम मोर्चे के दलों को 26 और कांग्रेस को 16 सीटें मिलीं।

## 4. कौन-कौन से राजनीतिक दल चुनाव मैदान में थे और उनके प्रमुख नेता कौन थे?

1984 में कांग्रेस के सामने कोई एक राष्ट्रीय विपक्षी गठबंधन नहीं था। जनता पार्टी, लोकदल, भाजपा तथा वामपंथी दल अलग-अलग राजनीतिक पहचान के साथ चुनाव मैदान में थे।

| राजनीतिक दल | तत्कालीन प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | राजीव गांधी |
| तेलुगु देशम पार्टी | एन. टी. रामाराव |
| भारतीय जनता पार्टी | अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी |
| जनता पार्टी | चंद्रशेखर |
| लोकदल | चौधरी चरण सिंह |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | ई. एम. एस. नंबूदरीपाद, ज्योति बसु |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | सी. राजेश्वर राव, एस. ए. डांगे |
| अन्नाद्रमुक | एम. जी. रामचंद्रन |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट) | शरद पवार |
| कांग्रेस (जगजीवन) | जगजीवन राम |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | फारूक अब्दुल्ला |
| शिरोमणि अकाली दल | हरचंद सिंह लोंगोवाल, प्रकाश सिंह बादल |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | इब्राहिम सुलेमान सैत |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | त्रिदीब चौधरी |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | चित्त बसु |
| केरल कांग्रेस (जोसेफ) | पी. जे. जोसेफ |

यह संबंधित दलों के राजनीतिक नेतृत्व की सूची है, जिसमें अध्यक्षों के अलावा प्रमुख संसदीय और संगठनात्मक नेता भी शामिल हैं।

## 5. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट प्रतिशत मिला?

सबसे पहले दिसंबर 1984 के मूल चुनाव परिणाम देखें। इसमें पंजाब और असम के 1985 के चुनाव शामिल नहीं हैं।

| राजनीतिक दल | सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 404 | 49.10% |
| तेलुगु देशम पार्टी | 30 | 4.31% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 22 | 5.87% |
| अन्नाद्रमुक | 12 | 1.69% |
| जनता पार्टी | 10 | 6.89% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 6 | 2.71% |
| इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट) | 4 | 1.52% |
| लोकदल | 3 | 5.97% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 3 | 0.43% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 3 | 0.50% |
| भारतीय जनता पार्टी | 2 | 7.74% |
| डीएमके | 2 | 2.42% |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | 2 | 0.45% |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | 2 | 0.28% |
| केरल कांग्रेस (जोसेफ) | 2 | 0.25% |
| कांग्रेस (जगजीवन) | 1 | 0.64% |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | 1 | 0.20% |
| निर्दलीय उम्मीदवार | 5 | 7.92% |
| **कुल** | **514** |  |

इन मत प्रतिशतों का आधार केवल दिसंबर 1984 के चुनाव में पड़े राष्ट्रीय वैध मत हैं। शून्य सीट जीतने वाले दल सूची में नहीं हैं, इसलिए प्रतिशत का योग 100 नहीं होगा।

## 1985 में असम और पंजाब के परिणाम जोड़ने पर

| दल / श्रेणी | दिसंबर 1984 | अतिरिक्त 1985 | कुल |
| --- | --- | --- | --- |
| कांग्रेस | 404 | 10 | 414 |
| तेलुगु देशम | 30 | 0 | 30 |
| माकपा | 22 | 0 | 22 |
| अन्नाद्रमुक | 12 | 0 | 12 |
| जनता पार्टी | 10 | 0 | 10 |
| अकाली दल | 0 | 7 | 7 |
| भाकपा | 6 | 0 | 6 |
| कांग्रेस (सोशलिस्ट) | 4 | 1 | 5 |
| भाजपा | 2 | 0 | 2 |
| निर्दलीय | 5 | 8 | 13 |

अन्य दलों की सीटें यथावत रहीं; असम की प्लेन्स ट्राइबल्स काउंसिल को एक अतिरिक्त सीट मिली।

## 6. आठवें लोकसभा चुनाव की सात महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएँ

**1. राजीव गांधी की पहली आम चुनावी परीक्षा**

राजीव गांधी ने उत्तर प्रदेश की अमेठी सीट से चुनाव जीता। प्रधानमंत्री बनने के दो महीने के भीतर उन्होंने कांग्रेस को 400 से अधिक सीटों वाला जनादेश दिलाया।

कांग्रेस को मुख्य चुनाव में 49.10 प्रतिशत वोट मिले। यह कांग्रेस के 1980 के 42.69 प्रतिशत से लगभग 6.41 प्रतिशत अंक अधिक था।

**2. एन. टी. रामाराव की तेलुगु देशम सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी**

1982 में स्थापित तेलुगु देशम पार्टी ने आंध्र प्रदेश की 42 में से 30 सीटें जीत लीं। उसने राज्य में लगभग 44.82 प्रतिशत मत हासिल किए।

राष्ट्रीय स्तर पर मात्र 4.31 प्रतिशत वोट मिलने के बावजूद टीडीपी 30 सांसदों के साथ सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी। यह एक क्षेत्रीय दल के राष्ट्रीय संसद में इतने बड़े प्रतिनिधित्व का ऐतिहासिक उदाहरण था।

**3. भारतीय जनता पार्टी पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ी**

भाजपा ने 224 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लगभग 1.82 करोड़ वोट प्राप्त किए, लेकिन केवल दो सीटें जीत सकी।

पार्टी की जीत गुजरात की मेहसाणा सीट पर ए. के. पटेल और आंध्र प्रदेश की हनमकोंडा सीट पर सी. जंगा रेड्डी ने दर्ज की। जंगा रेड्डी ने कांग्रेस के पी. वी. नरसिंह राव को 54,198 मतों से हराया।

अटल बिहारी वाजपेयी स्वयं ग्वालियर में कांग्रेस के माधवराव सिंधिया से चुनाव हार गए।

**4. तमिलनाडु में कांग्रेस-अन्नाद्रमुक गठबंधन की जीत**

एम. जी. रामचंद्रन की अन्नाद्रमुक और राजीव गांधी की कांग्रेस ने गठबंधन किया। तमिलनाडु की 39 सीटों में कांग्रेस ने 25 और अन्नाद्रमुक ने 12 सीटें जीतीं। गठबंधन को कुल 37 सीटें मिलीं, जबकि डीएमके केवल दो सीटें जीत सकी।

**5. अमिताभ बच्चन ने हेमवती नंदन बहुगुणा को हराया**

कांग्रेस उम्मीदवार और अभिनेता अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद में वरिष्ठ नेता हेमवती नंदन बहुगुणा को 1,87,795 मतों से पराजित किया।

अमिताभ को 2,97,461 तथा बहुगुणा को 1,09,666 मत मिले।

**6. असम में कांग्रेस के अलावा निर्दलीय उम्मीदवारों की सफलता**

दिसंबर 1985 में हुए चुनावों में असम की 14 सीटों में कांग्रेस चार, निर्दलीय आठ, इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट) एक और प्लेन्स ट्राइबल्स काउंसिल ऑफ असम एक सीट पर विजयी हुई।

अगस्त 1985 के असम समझौते के बाद हुए इन चुनावों का संबंध असम आंदोलन की राजनीतिक परिणति से था।

**7. पंजाब में अकाली दल की जीत**

सितंबर 1985 में पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में अकाली दल ने सात और कांग्रेस ने छह सीटें जीतीं। 24 जुलाई 1985 का राजीव–लोंगोवाल समझौता इस चुनाव की प्रमुख राजनीतिक पृष्ठभूमि था।

## 7. चर्चित निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम

| निर्वाचन क्षेत्र | विजेता | पराजित प्रमुख उम्मीदवार |
| --- | --- | --- |
| अमेठी, उत्तर प्रदेश | राजीव गांधी, कांग्रेस | मेनका गांधी, निर्दलीय |
| इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश | अमिताभ बच्चन, कांग्रेस | हेमवती नंदन बहुगुणा, लोकदल |
| ग्वालियर, मध्य प्रदेश | माधवराव सिंधिया, कांग्रेस | अटल बिहारी वाजपेयी, भाजपा |
| हनमकोंडा, आंध्र प्रदेश | सी. जंगा रेड्डी, भाजपा | पी. वी. नरसिंह राव, कांग्रेस |
| मेहसाणा, गुजरात | ए. के. पटेल, भाजपा | कांग्रेस उम्मीदवार |

## अमेठी में राजीव गांधी बनाम मेनका गांधी

यह चुनाव गांधी परिवार के भीतर राजनीतिक मुकाबले के कारण चर्चा में रहा। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी कांग्रेस का नेतृत्व कर रहे थे। दूसरी ओर संजय गांधी की पत्नी मेनका गांधी ने अमेठी से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा।

राजीव गांधी ने उन्हें बड़े अंतर से हराया।

## ग्वालियर में वाजपेयी की पराजय

1984 में भाजपा के अध्यक्ष अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से मैदान में थे। कांग्रेस ने उनके मुकाबले माधवराव सिंधिया को उतारा। सिंधिया चुनाव जीत गए।

इस पराजय के बाद भाजपा के भीतर चुनावी रणनीति और संगठन की समीक्षा का दौर शुरू हुआ। आगे चलकर पार्टी ने अपनी राजनीतिक दिशा और संगठनात्मक अभियान में परिवर्तन किए।

## 8. 1980 और 1984–85 के चुनावों की तुलना

| दल | 1980 सीटें | 1984–85 सीटें |
| --- | --- | --- |
| कांग्रेस | 353 | 414 |
| जनता पार्टी | 31 | 10 |
| लोकदल / जनता (सेक्युलर) धारा | 41 | 3 |
| भाजपा | तब गठित नहीं | 2 |
| तेलुगु देशम | तब गठित नहीं | 30 |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 37 | 22 |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 10 | 6 |
| डीएमके | 16 | 2 |
| अन्नाद्रमुक | 2 | 12 |

कांग्रेस की सीटें 61 बढ़ीं। 1980 की तुलना में 1984–85 के चुनाव में मतदान संपन्न होने वाली सीटों की संख्या भी अलग थी।

## 9. पहले आठ लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन

| चुनाव वर्ष | कांग्रेस सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| 1951–52 | 364 | 44.99% |
| 1957 | 371 | 47.78% |
| 1962 | 361 | 44.72% |
| 1967 | 283 | 40.78% |
| 1971 | 352 | 43.68% |
| 1977 | 154 | 34.52% |
| 1980 | 353 | 42.69% |
| 1984–85 | 414 | 48.12% |

## 10. आठवीं लोकसभा के कार्यकाल की महत्वपूर्ण घटनाएँ (1985–1989)

राजीव गांधी के कार्यकाल में कई बड़े राजनीतिक, सामाजिक, संवैधानिक और प्रशासनिक घटनाक्रम हुए।

- **1985:** 52वाँ संविधान संशोधन — दल-बदल विरोधी कानून लागू हुआ।

- **1985:** असम समझौता और राजीव–लोंगोवाल समझौता हुआ।

- **1985:** शाहबानो मामले में सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया; इसके बाद 1986 में मुस्लिम महिला (तलाक पर अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम पारित हुआ।

- **1986:** अयोध्या में विवादित ढाँचे के ताले खुलवाए गए।

- **1987:** बोफोर्स तोप सौदे को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए और बड़े राजनीतिक विवाद की शुरुआत हुई।

- **1987:** वी. पी. सिंह और राजीव गांधी के बीच मतभेद बढ़े; आगे चलकर वी. पी. सिंह कांग्रेस से अलग हुए।

- **1988:** जनता दल का गठन हुआ और राष्ट्रीय मोर्चे की राजनीति ने आकार लिया।

- **1989:** नौवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस बहुमत खो बैठी और वी. पी. सिंह प्रधानमंत्री बने।

इन घटनाओं ने 1989 के चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार की।

## 11. आधिकारिक ऐतिहासिक स्रोत

इस चुनाव के दो अलग-अलग सांख्यिकीय अभिलेख हैं और दोनों को साथ पढ़ना आवश्यक है।

[निर्वाचन आयोग — 1984 और 1985 की लोकसभा चुनाव रिपोर्टें](https://www.eci.gov.in/statistical-reports)

[1984 लोकसभा चुनाव — मूल सांख्यिकीय रिपोर्ट, खंड I](https://ceomadhyapradesh.nic.in/Links/Books/84_Vol_I.pdf)

[1984 निर्वाचन क्षेत्रवार परिणाम — खंड II](https://www.ceo.kerala.gov.in/ceokerala/pdf/LOKSABHA-HISTORY/1984-LS.pdf)

1984 और 1985 के परिणामों को एक साथ इस्तेमाल करते समय वोट शेयर की आधार-अवधि स्पष्ट लिखना जरूरी है।

## 12. ऐतिहासिक निष्कर्ष

आठवाँ लोकसभा चुनाव पाँच कारणों से संसदीय इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय है।

पहला, कांग्रेस ने 414 सीटों के साथ अब तक का सर्वाधिक संसदीय प्रतिनिधित्व हासिल किया। दूसरा, एन. टी. रामाराव की तेलुगु देशम पहली बार किसी क्षेत्रीय दल के रूप में लोकसभा का सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी। तीसरा, भाजपा को अपने पहले लोकसभा चुनाव में केवल दो सीटें मिलीं, जबकि राष्ट्रीय मत प्रतिशत 7.74 था।

चौथा, उत्तर और मध्य भारत में कांग्रेस को बहुत व्यापक सफलता मिली, लेकिन आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में क्षेत्रीय तथा वामपंथी दलों ने अलग राजनीतिक शक्ति दिखाई।

पाँचवाँ, राजीव गांधी को मिले विशाल संसदीय बहुमत के बावजूद अगले पाँच वर्षों में बोफोर्स विवाद, वी. पी. सिंह का कांग्रेस से अलग होना और राष्ट्रीय मोर्चे का गठन भारतीय राजनीति में नए परिवर्तन लेकर आए।

**1984 में 414 सीटें जीतने वाली कांग्रेस 1989 में केवल 197 सीटों पर आ गई।** यही परिवर्तन नौवें लोकसभा चुनाव और केंद्र में गठबंधन सरकारों के अगले दौर को समझने का आधार है।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-8