# भारत का सातवाँ लोकसभा चुनाव 1980 : जनता पार्टी का बिखराव और इंदिरा गांधी की सत्ता में वापसी

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारतीय संसदीय चुनावों का इतिहास — सातवाँ अध्याय

भारत का सातवाँ लोकसभा आम चुनाव 3 और 6 जनवरी 1980 को हुआ। यह स्वतंत्र भारत का दूसरा मध्यावधि लोकसभा चुनाव था। मार्च 1977 में ऐतिहासिक जीत हासिल करने वाली जनता पार्टी की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई। मोरारजी देसाई की सरकार गिरने और चौधरी चरण सिंह के अल्पकालिक प्रधानमंत्रित्व के बाद देश को तीन वर्ष से भी कम समय में दोबारा लोकसभा चुनाव का सामना करना पड़ा।

इस चुनाव में इंदिरा गांधी ने राजनीतिक वापसी की। 1977 में स्वयं रायबरेली से चुनाव हारने और केंद्र की सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने कांग्रेस (इंदिरा) के नेतृत्व में व्यापक जीत हासिल की।

**कांग्रेस (इंदिरा) ने 529 चुनाव-संपन्न सीटों में से 353 सीटें जीतीं।** उसे 42.69 प्रतिशत राष्ट्रीय मत प्राप्त हुए। जनता पार्टी महज 31 सीटों पर सिमट गई, जबकि चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व वाली जनता पार्टी (सेक्युलर) ने 41 सीटें जीतीं।

14 जनवरी 1980 को इंदिरा गांधी ने पुनः प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

चुनाव-संपन्न सीटें

## 529

कांग्रेस (इंदिरा) की सीटें

## 353

कांग्रेस का वोट शेयर

## 42.69%

मतदान प्रतिशत

## 56.92%

## 1. सातवें लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

| विषय | विवरण |
| --- | --- |
| मतदान | 3 और 6 जनवरी 1980 |
| लोकसभा | सातवीं |
| निर्धारित निर्वाचित सीटें | 542 |
| जिन सीटों के परिणाम दर्ज हुए | 529 |
| मतदान स्थगित/नहीं हुआ | 13 सीटें |
| सामान्य निर्वाचन क्षेत्र (निर्धारित) | 422 |
| अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित | 79 |
| अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित | 41 |
| कुल पंजीकृत मतदाता | 35,62,05,329 |
| कुल मतदान | 20,27,52,893 |
| मतदान प्रतिशत | 56.92% |
| वैध मत | 19,78,24,274 |
| कुल उम्मीदवार | 4,629 |
| चुनाव मैदान में राजनीतिक दल | 36 |
| राष्ट्रीय राजनीतिक दल | 6 |
| कांग्रेस (इंदिरा) की सीटें | 353 |
| कांग्रेस (इंदिरा) का मत प्रतिशत | 42.69% |
| चुनाव से पहले प्रधानमंत्री | चौधरी चरण सिंह |
| चुनाव के बाद प्रधानमंत्री | इंदिरा गांधी |
| सातवीं लोकसभा का गठन | 10 जनवरी 1980 |

यहाँ 542 और 529 का अंतर महत्वपूर्ण है। निर्वाचन आयोग के अनुसार देश में 542 निर्वाचित सीटें निर्धारित थीं, लेकिन तत्कालीन असम की 14 सीटों में से केवल दो और मेघालय की दो सीटों में से एक का परिणाम दर्ज हुआ। असम आंदोलन से उत्पन्न परिस्थितियों में शेष 13 सीटों पर मतदान नहीं हो सका। इसलिए जनवरी 1980 के मुख्य आम चुनाव में 529 सीटों के परिणाम घोषित हुए।

## 2. चुनाव से पहले जनता पार्टी की सरकार कैसे गिरी?

1977 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में आई थी। उसके अंतर्गत पूर्व भारतीय जनसंघ, भारतीय लोकदल, समाजवादी धारा और कांग्रेस (संगठन) के नेता एकत्र हुए थे। लेकिन वैचारिक तथा नेतृत्व संबंधी मतभेदों के चलते सरकार के भीतर संघर्ष बढ़ा।

1. **मार्च 1977 — जनता पार्टी की सरकार**

मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने। चौधरी चरण सिंह, जगजीवन राम, अटल बिहारी वाजपेयी और अन्य नेता सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। 2. **1978–79 — आंतरिक मतभेद**

मोरारजी देसाई और चरण सिंह के बीच राजनीतिक तथा प्रशासनिक मतभेद बढ़े। पूर्व जनसंघ नेताओं की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्धता को लेकर दोहरी सदस्यता का विवाद भी गहराया। 3. **जुलाई 1979 — मोरारजी देसाई का इस्तीफा**

जनता पार्टी के विभाजन और बहुमत संकट के बाद 15 जुलाई 1979 को मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया। 4. **28 जुलाई 1979 — चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री**

कांग्रेस के बाहरी समर्थन के आश्वासन पर चरण सिंह प्रधानमंत्री बने। लेकिन विश्वास मत से पहले ही कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया। 5. **20 अगस्त 1979 — चरण सिंह का इस्तीफा**

चरण सिंह ने लोकसभा में विश्वास मत का सामना किए बिना इस्तीफा दे दिया। वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहे। 6. **जनवरी 1980 — मध्यावधि चुनाव**

विभाजित विपक्ष के बीच कांग्रेस (इंदिरा) को स्पष्ट बहुमत मिला और इंदिरा गांधी सत्ता में लौट आईं।

## 3. कौन-कौन सी पार्टियाँ मैदान में थीं और उनके नेता कौन थे?

1980 में 1977 की जनता पार्टी अब एकजुट नहीं थी। चौधरी चरण सिंह का गुट अलग होकर जनता पार्टी (सेक्युलर) के रूप में मैदान में था। कांग्रेस भी दो अलग-अलग दलों के रूप में चुनाव लड़ रही थी।

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| कांग्रेस (इंदिरा) — INC(I) | इंदिरा गांधी, संजय गांधी |
| जनता पार्टी — JNP | जगजीवन राम, चंद्रशेखर, अटल बिहारी वाजपेयी |
| जनता पार्टी (सेक्युलर) — JNP(S) | चौधरी चरण सिंह, राजनारायण |
| कांग्रेस (उर्स) — INC(U) | देवराज उर्स, शरद पवार, वाई. बी. चव्हाण |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | ई. एम. एस. नंबूदरीपाद, ज्योति बसु, ए. के. गोपालन |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | सी. राजेश्वर राव, एस. ए. डांगे |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| अन्नाद्रमुक | एम. जी. रामचंद्रन |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल, जगदेव सिंह तलवंडी |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | शेख अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | त्रिदीब चौधरी |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | चित्त बसु |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | इब्राहिम सुलेमान सैत सहित वरिष्ठ नेता |
| केरल कांग्रेस | के. एम. मणि सहित राज्य नेतृत्व |
| महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी | शशिकला काकोडकर |
| झारखंड पार्टी | क्षेत्रीय आदिवासी नेतृत्व |
| सिक्किम जनता परिषद | नर बहादुर भंडारी |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | महाराष्ट्र का किसान-मजदूर नेतृत्व |

भारतीय जनता पार्टी का गठन अप्रैल 1980 में हुआ था। इसलिए **जनवरी 1980 के लोकसभा चुनाव में भाजपा नाम से कोई उम्मीदवार नहीं था।** पूर्व जनसंघ के नेता उस समय जनता पार्टी में थे।

## 4. दलवार परिणाम : किसको कितनी सीटें और कितना वोट शेयर?

निर्वाचन आयोग की 1980 की मूल सांख्यिकीय रिपोर्ट में दर्ज राष्ट्रीय मत प्रतिशत और सीटों के आधार पर परिणाम निम्न हैं।

| राजनीतिक दल | सीटें | वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| कांग्रेस (इंदिरा) | 353 | 42.69% |
| जनता पार्टी (सेक्युलर) | 41 | 9.39% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 37 | 6.24% |
| जनता पार्टी | 31 | 18.97% |
| डीएमके | 16 | 2.14% |
| कांग्रेस (उर्स) | 13 | 5.28% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 10 | 2.49% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 4 | 0.65% |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | 3 | 0.51% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 3 | 0.25% |
| अन्नाद्रमुक | 2 | 2.36% |
| मुस्लिम लीग | 2 | 0.24% |
| शिरोमणि अकाली दल | 1 | 0.71% |
| केरल कांग्रेस | 1 | 0.18% |
| झारखंड पार्टी | 1 | 0.13% |
| महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी | 1 | 0.06% |
| सिक्किम जनता परिषद | 1 | 0.02% |
| निर्दलीय | 9 | 6.43% |
| **कुल** | **529** |  |

यहाँ वोट शेयर राष्ट्रीय वैध मतों का प्रतिशत है। शून्य सीट पाने वाले दलों के मत इस सूची में अलग से नहीं दिखाए गए हैं। स्रोत: निर्वाचन आयोग, 1980, खंड I, पृष्ठ 91–93।

## मत प्रतिशत का सबसे महत्वपूर्ण तथ्य

जनता पार्टी को 18.97 प्रतिशत वोट मिले और केवल 31 सीटें मिलीं। दूसरी ओर जनता पार्टी (सेक्युलर) को 9.39 प्रतिशत वोट पर 41 सीटें मिलीं।

दोनों जनता गुटों का सम्मिलित मत प्रतिशत 28.36 था। लेकिन इसे संयुक्त चुनाव लड़ने पर संभावित सीटों की संख्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि दोनों दलों के उम्मीदवार अनेक क्षेत्रों में अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे और मतों का क्षेत्रवार वितरण अलग था।

कांग्रेस (इंदिरा) को 42.69 प्रतिशत वोट मिले, लेकिन उसने चुनाव-संपन्न 529 सीटों में से लगभग 66.7 प्रतिशत जीत लीं।

## 5. किस राज्य में कितनी लोकसभा सीटें थीं और कांग्रेस को कितनी मिलीं?

नीचे 1980 के चुनाव में राज्यवार निर्धारित सीटें, चुनाव संपन्न होने वाली सीटें तथा कांग्रेस (इंदिरा) का प्रदर्शन दिया गया है।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | निर्धारित सीटें | चुनाव-संपन्न सीटें | कांग्रेस (इंदिरा) |
| --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 85 | 85 | 51 |
| बिहार | 54 | 54 | 30 |
| महाराष्ट्र | 48 | 48 | 39 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 42 | 4 |
| आंध्र प्रदेश | 42 | 42 | 41 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 40 | 35 |
| तमिलनाडु | 39 | 39 | 20 |
| कर्नाटक | 28 | 28 | 27 |
| गुजरात | 26 | 26 | 25 |
| राजस्थान | 25 | 25 | 18 |
| ओडिशा | 21 | 21 | 20 |
| केरल | 20 | 20 | 5 |
| असम | 14 | 2 | 2 |
| पंजाब | 13 | 13 | 12 |
| हरियाणा | 10 | 10 | 5 |
| दिल्ली | 7 | 7 | 6 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 6 | 1 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 4 | 4 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 2 | 2 |
| गोवा, दमन एवं दीव | 2 | 2 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 2 | 1 |
| मेघालय | 2 | 1 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 2 | 0 |
| मिजोरम | 1 | 1 | 0 |
| नगालैंड | 1 | 1 | 0 |
| सिक्किम | 1 | 1 | 0 |
| अंडमान एवं निकोबार | 1 | 1 | 1 |
| चंडीगढ़ | 1 | 1 | 1 |
| दादरा एवं नगर हवेली | 1 | 1 | 1 |
| लक्षद्वीप | 1 | 1 | 0 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 1 | 1 |
| **कुल** | **542** | **529** | **353** |

स्रोत: निर्वाचन आयोग, 1980, खंड I, पृष्ठ 3 और 87–90। निर्धारित तथा चुनाव-संपन्न सीटों का अंतर विशेष रूप से असम और मेघालय में था।

## 6. प्रमुख राज्यों में सभी महत्वपूर्ण दलों को कितनी सीटें मिलीं?

| राज्य | प्रमुख दलों के परिणाम |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | कांग्रेस (इंदिरा) 51, जनता (सेक्युलर) 29, जनता पार्टी 3, भाकपा 1, निर्दलीय 1 |
| बिहार | कांग्रेस (इंदिरा) 30, जनता पार्टी 8, जनता (सेक्युलर) 5, कांग्रेस (उर्स) 4, भाकपा 4, निर्दलीय 2, झारखंड पार्टी 1 |
| महाराष्ट्र | कांग्रेस (इंदिरा) 39, जनता पार्टी 8, कांग्रेस (उर्स) 1 |
| मध्य प्रदेश | कांग्रेस (इंदिरा) 35, जनता पार्टी 4, निर्दलीय 1 |
| राजस्थान | कांग्रेस (इंदिरा) 18, जनता पार्टी 4, जनता (सेक्युलर) 2, कांग्रेस (उर्स) 1 |
| गुजरात | कांग्रेस (इंदिरा) 25, जनता पार्टी 1 |
| आंध्र प्रदेश | कांग्रेस (इंदिरा) 41, कांग्रेस (उर्स) 1 |
| कर्नाटक | कांग्रेस (इंदिरा) 27, जनता पार्टी 1 |
| तमिलनाडु | कांग्रेस (इंदिरा) 20, डीएमके 16, अन्नाद्रमुक 2, निर्दलीय 1 |
| पश्चिम बंगाल | माकपा 28, कांग्रेस (इंदिरा) 4, भाकपा 3, फॉरवर्ड ब्लॉक 3, आरएसपी 4 |
| केरल | माकपा 7, कांग्रेस (इंदिरा) 5, कांग्रेस (उर्स) 3, मुस्लिम लीग 2, भाकपा 1, केरल कांग्रेस 1, निर्दलीय 1 |
| ओडिशा | कांग्रेस (इंदिरा) 20, जनता (सेक्युलर) 1 |
| पंजाब | कांग्रेस (इंदिरा) 12, अकाली दल 1 |
| हरियाणा | कांग्रेस (इंदिरा) 5, जनता (सेक्युलर) 4, जनता पार्टी 1 |
| दिल्ली | कांग्रेस (इंदिरा) 6, जनता पार्टी 1 |
| जम्मू-कश्मीर | नेशनल कॉन्फ्रेंस 3, कांग्रेस (इंदिरा) 1, कांग्रेस (उर्स) 1, निर्दलीय 1 |
| त्रिपुरा | माकपा 2 |

## चार राज्यों का विशेष महत्व

आंध्र प्रदेश में कांग्रेस (इंदिरा) ने 42 में से 41 सीटें जीतीं। इसी प्रकार कर्नाटक में 28 में से 27, गुजरात में 26 में से 25 और ओडिशा में 21 में से 20 सीटें हासिल कीं।

पश्चिम बंगाल में इसके विपरीत स्थिति थी। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को 28 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस केवल चार सीटें जीत सकी। 1977 से ज्योति बसु के नेतृत्व में राज्य में वाम मोर्चे की सरकार थी।

तमिलनाडु में कांग्रेस (इंदिरा) और डीएमके के चुनावी गठबंधन को 39 में से 36 सीटें मिलीं। अन्नाद्रमुक को केवल दो सीटें मिलीं, हालांकि राज्य में एम. जी. रामचंद्रन मुख्यमंत्री बने हुए थे।

## 7. सातवें लोकसभा चुनाव के प्रमुख नेता और चर्चित मुकाबले

**इंदिरा गांधी — रायबरेली और मेडक से जीत**

1977 में रायबरेली से पराजित इंदिरा गांधी 1980 में रायबरेली के साथ आंध्र प्रदेश की मेडक सीट से भी चुनाव लड़ीं। उन्होंने दोनों सीटें जीतीं और बाद में मेडक सीट अपने पास रखी। उनके नेतृत्व वाली कांग्रेस ने 353 सीटें जीतीं।

**संजय गांधी — अमेठी से जीत**

1977 में अमेठी से पराजित संजय गांधी 1980 में इसी सीट से चुनाव जीते। कांग्रेस संगठन और नई सरकार में उनकी महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका थी। 23 जून 1980 को दिल्ली में विमान दुर्घटना में उनका निधन हो गया।

**चौधरी चरण सिंह — बागपत से जीत**

चरण सिंह बागपत से लोकसभा चुनाव जीते। जनता पार्टी से अलग होकर गठित उनका दल 41 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बना, जबकि मूल जनता पार्टी को केवल 31 सीटें मिलीं।

**जगजीवन राम — जनता पार्टी का नेतृत्व**

जगजीवन राम जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में थे। वे सासाराम से निर्वाचित हुए। जनता पार्टी को 18.97 प्रतिशत राष्ट्रीय वोट मिले, लेकिन सिर्फ 31 सीटें प्राप्त हुईं।

**अटल बिहारी वाजपेयी — नई दिल्ली से पराजय**

वाजपेयी 1980 में नई दिल्ली लोकसभा सीट से कांग्रेस के सी. एम. स्टीफन से चुनाव हार गए। इसके कुछ महीने बाद 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ और वाजपेयी उसके पहले अध्यक्ष बने।

## 8. 1980 के चुनाव की पाँच महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाएँ

**पहली — जनता पार्टी का विभाजन:** 1977 में जनता पार्टी को 295 सीटें मिली थीं। जनवरी 1980 में जनता पार्टी और जनता पार्टी (सेक्युलर) अलग-अलग मैदान में उतरीं। दोनों दलों को क्रमशः 31 और 41 सीटें मिलीं।

**दूसरी — कांग्रेस के दो गुट:** इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस (इंदिरा) ने 353 सीटें जीतीं, जबकि देवराज उर्स से जुड़े कांग्रेस (उर्स) गुट को 13 सीटें मिलीं। शरद पवार और वाई. बी. चव्हाण जैसे नेता भी कांग्रेस (उर्स) से जुड़े थे।

**तीसरी — तमिलनाडु में राजनीतिक गठबंधन:** डीएमके और कांग्रेस (इंदिरा) के गठबंधन को लोकसभा चुनाव में 36 सीटें मिलीं। इसके बावजूद राज्य की राजनीति में अन्नाद्रमुक का प्रभाव बना रहा। उसी वर्ष बाद में विधानसभा चुनाव में एम. जी. रामचंद्रन फिर मुख्यमंत्री बने।

**चौथी — वाम दलों की सफलता:** मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी 37 सीटों के साथ लोकसभा की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनी। पश्चिम बंगाल में उसने 28 और केरल में सात सीटें जीतीं।

**पाँचवीं — असम आंदोलन का चुनाव पर प्रभाव:** असम में विदेशियों की पहचान और मतदाता सूचियों से संबंधित आंदोलन के कारण अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान नहीं हो सका। असम के राजनीतिक संकट का समाधान आगे चलकर 1985 के असम समझौते के माध्यम से करने का प्रयास हुआ।

## 9. 1977 और 1980 के लोकसभा चुनावों की तुलना

| विषय | 1977 | 1980 |
| --- | --- | --- |
| चुनाव-संपन्न सीटें | 542 | 529 |
| कांग्रेस की सीटें | 154 | 353 |
| कांग्रेस वोट शेयर | 34.52% | 42.69% |
| जनता पार्टी / BLD की सीटें | 295 | 31 (जनता पार्टी) |
| जनता पार्टी (सेक्युलर) | अलग दल नहीं | 41 |
| माकपा | 22 | 37 |
| भाकपा | 7 | 10 |
| डीएमके | 2 | 16 |
| अन्नाद्रमुक | 18 | 2 |
| प्रधानमंत्री बने | मोरारजी देसाई | इंदिरा गांधी |

1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार BLD चुनाव चिह्न के अंतर्गत दर्ज थे। दोनों चुनावों की जनता पार्टी संबंधी तुलना इसी ऐतिहासिक अंतर को ध्यान में रखकर पढ़नी चाहिए।

तीन वर्ष से कम समय में कांग्रेस के मत प्रतिशत में 8.17 प्रतिशत अंकों की वृद्धि हुई।

## 10. पहले सात लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन

| चुनाव वर्ष | चुनाव-संपन्न सीटें | कांग्रेस की सीटें | कांग्रेस वोट शेयर |
| --- | --- | --- | --- |
| 1951–52 | 489 | 364 | 44.99% |
| 1957 | 494 | 371 | 47.78% |
| 1962 | 494 | 361 | 44.72% |
| 1967 | 520 | 283 | 40.78% |
| 1971 | 518 | 352 | 43.68% |
| 1977 | 542 | 154 | 34.52% |
| 1980 | 529 | 353 | 42.69% |

## 11. सातवीं लोकसभा के कार्यकाल में प्रमुख घटनाएँ

सातवीं लोकसभा का कार्यकाल 1980 से 1984 तक रहा। इस दौरान देश में अनेक राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी घटनाएँ हुईं, जिनका अगला लोकसभा चुनाव समझने में विशेष महत्व है।

- 6 अप्रैल 1980 — भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई।

- 23 जून 1980 — संजय गांधी का विमान दुर्घटना में निधन हुआ।

- 1980 के दशक की शुरुआत — पंजाब में उग्रवाद और अलगाववादी हिंसा का संकट बढ़ा।

- जून 1984 — अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ।

- 31 अक्टूबर 1984 — प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सुरक्षाकर्मियों ने हत्या कर दी।

- 31 अक्टूबर 1984 — राजीव गांधी प्रधानमंत्री बने।

- दिसंबर 1984 — आठवें लोकसभा चुनाव हुए।

## 12. मूल आधिकारिक स्रोत

1980 के सातवें लोकसभा चुनाव के लिए भारत निर्वाचन आयोग की निम्न रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज है।

[Statistical Report on General Elections, 1980 — Seventh Lok Sabha, Volume I](https://www.eci.gov.in/eci-backend/public/api/download?url=LMAhAK6sOPBp%2FNFF0iRfXbEB1EVSLT41NNLRjYNJJP1KivrUxbfqkDatmHy12e%2FzVx8fLfn2ReU7TfrqYobgIrkMkhGhMjPeTY%2BPWma%2FwX%2F8Izx%2B1DfxezOkQc0%2F0Y7EbMQ%2BBr8WZalKhiKoh3gBixCS0pvrsXes0IES9wL9GL64n5Cy8g2J0%2FFZUDyYnPFQ&utm_source=chatgpt.com)

इसके पृष्ठ 3–5 में सीटें, मतदाता और मतदान; पृष्ठ 84–90 में राज्यवार दलों की सीटें; तथा पृष्ठ 91–93 में राष्ट्रीय वोट शेयर और दलवार परिणाम दिए गए हैं।

निर्वाचन आयोग की [ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव रिपोर्टों की सूची](https://www.eci.gov.in/statistical-reports) पर दूसरे चुनावों के मूल अभिलेख भी उपलब्ध हैं।

## ऐतिहासिक निष्कर्ष

1980 का चुनाव भारतीय संसदीय इतिहास में राजनीतिक पुनर्वापसी और विपक्षी विभाजन का महत्वपूर्ण उदाहरण है। जनता पार्टी को 1977 में मिला बहुमत तीन वर्ष भी स्थिर सरकार नहीं दे सका। उसके विभिन्न घटक अलग-अलग दलों में बँट गए और मतदाताओं ने इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस को फिर स्पष्ट बहुमत दिया।

1977 में कांग्रेस 154 सीटों पर सिमट गई थी, लेकिन 1980 में उसकी संख्या बढ़कर 353 हो गई। वहीं जनता पार्टी के दोनों प्रमुख गुटों को मिलाकर भी केवल 72 सीटें मिलीं।

इस चुनाव के बाद देश में पुनः कांग्रेस की सरकार स्थापित हुई, लेकिन सातवीं लोकसभा के कार्यकाल का अंत इंदिरा गांधी की हत्या और उसके बाद हुए 1984 के चुनावों के साथ हुआ। **1984 का आठवाँ लोकसभा चुनाव भारतीय संसदीय इतिहास में कांग्रेस की सबसे बड़ी सीट-विजय के लिए याद किया जाता है।**

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-7