# भारत का छठा लोकसभा चुनाव 1977 : आपातकाल के बाद कांग्रेस की पहली पराजय और जनता पार्टी की सरकार

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारत के संसदीय इतिहास में **1977 का छठा लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन का वर्ष** था। स्वतंत्रता के बाद लगातार लगभग तीस वर्षों तक केंद्र की सत्ता में रही कांग्रेस पहली बार लोकसभा चुनाव हार गई। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी स्वयं रायबरेली से चुनाव हार गईं और उनके पुत्र संजय गांधी को अमेठी में पराजय का सामना करना पड़ा।

25 जून 1975 को लागू किए गए आपातकाल, विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियों, प्रेस सेंसरशिप, नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध और जबरन नसबंदी जैसे मुद्दों के बीच विपक्षी दल एकजुट हुए। जनता पार्टी ने लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली को अपने चुनाव अभियान का केंद्रीय विषय बनाया।

16 से 20 मार्च 1977 के बीच मतदान हुआ। परिणाम घोषित होने के बाद 24 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई ने भारत के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।

कुल लोकसभा सीटें

## 542

जनता पार्टी की सीटें

## 295

जनता पार्टी का वोट शेयर

## 41.32%

कांग्रेस की सीटें

## 154

## 1. छठे लोकसभा चुनाव के महत्वपूर्ण आँकड़े

| विषय | विवरण |
| --- | --- |
| चुनाव की तारीखें | 16–20 मार्च 1977 |
| लोकसभा | छठी |
| कुल निर्वाचित सीटें | 542 |
| सामान्य सीटें | 426 |
| अनुसूचित जाति आरक्षित | 78 |
| अनुसूचित जनजाति आरक्षित | 38 |
| बहुमत के लिए | 272 सीटें |
| पंजीकृत मतदाता | 32,11,74,327 |
| मतदान करने वाले | 19,42,63,915 |
| मतदान प्रतिशत | 60.49% |
| कुल उम्मीदवार | 2,439 |
| राजनीतिक दल | 34 |
| निर्दलीय उम्मीदवार | 1,224 |
| जनता पार्टी (BLD) की सीटें | 295 |
| कांग्रेस की सीटें | 154 |
| जनता पार्टी का राष्ट्रीय वोट शेयर | 41.32% |
| कांग्रेस का राष्ट्रीय वोट शेयर | 34.52% |
| प्रधानमंत्री (चुनाव से पहले) | इंदिरा गांधी |
| प्रधानमंत्री (चुनाव के बाद) | मोरारजी देसाई |
| छठी लोकसभा का गठन | 23 मार्च 1977 |

स्रोत: निर्वाचन आयोग की *Statistical Report on General Elections, 1977*, पृष्ठ 1–8 और 93–95।

## 2. जनता पार्टी के 295 और 298 सांसदों का अंतर क्या है?

इतिहास की दृष्टि से यह अंतर विशेष रूप से समझना चाहिए।

1977 में भारतीय लोकदल, भारतीय जनसंघ, कांग्रेस (संगठन) के अधिकांश नेता और समाजवादी धारा जनता पार्टी के गठन की प्रक्रिया में साथ आए। चुनाव आयोग के अभिलेखों में जनता पार्टी के उम्मीदवारों को **BLD अर्थात भारतीय लोकदल** के चुनाव चिह्न पर दर्ज किया गया था।

इसलिए आधिकारिक परिणाम में BLD की 295 सीटें दिखाई देती हैं। कुछ राजनीतिक विवरणों में कांग्रेस (संगठन) की तीन सीटें जोड़कर जनता पार्टी का आँकड़ा 298 बताया जाता है।

चुनाव के समय जगजीवन राम के नेतृत्व वाली कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी भी जनता गठबंधन के साथ थी और उसके उम्मीदवार जनता पार्टी के साझा चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे थे।

इसलिए 295 आधिकारिक दल-कोड के अंतर्गत दर्ज सीटों का आँकड़ा है, जबकि 298 व्यापक राजनीतिक गणना में प्रयुक्त होता है।

## 3. किस राज्य में कितनी सीटें थीं और कौन जीता?

1977 तक भारत का राजनीतिक मानचित्र बदल चुका था। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम सहित नए राज्यों का प्रतिनिधित्व था। 1977 के चुनाव में कुल 31 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की सीटों के परिणाम दर्ज हुए।

निर्वाचन आयोग की मूल रिपोर्ट के अनुसार राज्यवार परिणाम इस प्रकार हैं।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | जनता (BLD) | कांग्रेस | अन्य |
| --- | --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 85 | 85 | 0 | 0 |
| बिहार | 54 | 52 | 0 | 2 |
| महाराष्ट्र | 48 | 19 | 20 | 9 |
| आंध्र प्रदेश | 42 | 1 | 41 | 0 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 15 | 3 | 24 |
| मध्य प्रदेश | 40 | 37 | 1 | 2 |
| तमिलनाडु | 39 | 0 | 14 | 25 |
| कर्नाटक | 28 | 2 | 26 | 0 |
| गुजरात | 26 | 16 | 10 | 0 |
| राजस्थान | 25 | 24 | 1 | 0 |
| ओडिशा (तत्कालीन उड़ीसा) | 21 | 15 | 4 | 2 |
| केरल | 20 | 0 | 11 | 9 |
| असम | 14 | 3 | 10 | 1 |
| पंजाब | 13 | 3 | 0 | 10 |
| हरियाणा | 10 | 10 | 0 | 0 |
| दिल्ली | 7 | 7 | 0 | 0 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 0 | 3 | 3 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 4 | 0 | 0 |
| अरुणाचल प्रदेश | 2 | 0 | 1 | 1 |
| गोवा, दमन और दीव | 2 | 0 | 1 | 1 |
| मणिपुर | 2 | 0 | 2 | 0 |
| मेघालय | 2 | 0 | 1 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 1 | 1 | 0 |
| मिजोरम | 1 | 0 | 0 | 1 |
| नगालैंड | 1 | 0 | 0 | 1 |
| सिक्किम | 1 | 0 | 1 | 0 |
| अंडमान-निकोबार | 1 | 0 | 1 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 1 | 0 | 0 |
| दादरा एवं नगर हवेली | 1 | 0 | 1 | 0 |
| लक्षद्वीप | 1 | 0 | 1 | 0 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 0 | 0 | 1 |
| **कुल** | **542** | **295** | **154** | **93** |

इस तालिका का ‘अन्य’ स्तंभ एक संयुक्त श्रेणी है। इसमें मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, अन्नाद्रमुक, अकाली दल, कांग्रेस (संगठन), अन्य क्षेत्रीय दल और निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। इन्हें जनता पार्टी के आधिकारिक BLD आँकड़े में नहीं मिलाया गया है।

## पाँच राज्यों के नतीजे विशेष रूप से महत्वपूर्ण थे

उत्तर प्रदेश में सभी 85 सीटें जनता पार्टी ने जीतीं। बिहार की 54 में से 52 सीटें उसे मिलीं। मध्य प्रदेश में 40 में से 37, राजस्थान में 25 में से 24 और हरियाणा व दिल्ली में सभी सीटें जनता पार्टी ने जीतीं।

इसके विपरीत आंध्र प्रदेश में कांग्रेस ने 42 में से 41 और कर्नाटक में 28 में से 26 सीटें जीत लीं। इस प्रकार उत्तर भारत और दक्षिण भारत के परिणामों में उल्लेखनीय अंतर था।

## 4. किस पार्टी को कितनी सीटें और कितना वोट शेयर मिला?

1977 के चुनाव में पाँच राष्ट्रीय दलों तथा अनेक राज्य स्तरीय और छोटे दलों ने हिस्सा लिया। नीचे निर्वाचन आयोग की मूल राष्ट्रीय परिणाम तालिका से सभी सीट जीतने वाले दलों के आँकड़े दिए गए हैं।

| राजनीतिक दल | जीती सीटें | वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| जनता पार्टी / BLD | 295 | 41.32% |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 154 | 34.52% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 22 | 4.29% |
| अन्नाद्रमुक (AIADMK) | 18 | 2.90% |
| शिरोमणि अकाली दल | 9 | 1.26% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 7 | 2.82% |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | 5 | 0.55% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 4 | 0.45% |
| कांग्रेस (संगठन) | 3 | 1.72% |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | 3 | 0.34% |
| द्रविड़ मुनेत्र कड़गम | 2 | 1.76% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 2 | 0.26% |
| केरल कांग्रेस | 2 | 0.26% |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | 2 | 0.30% |
| रिपब्लिकन पार्टी (खोब्रागड़े) | 2 | 0.51% |
| महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी | 1 | 0.06% |
| यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (नगालैंड) | 1 | 0.07% |
| ऑल इंडिया झारखंड पार्टी | 1 | 0.07% |
| निर्दलीय | 9 | 5.50% |
| **कुल** | **542** |  |

वोट शेयर में शून्य सीट प्राप्त करने वाले दल शामिल नहीं हैं, इसलिए सूचीबद्ध प्रतिशत का योग 100% नहीं है। यहाँ राष्ट्रीय वोट प्रतिशत दिया गया है, न कि केवल संबंधित दल की लड़ी गई सीटों का मत प्रतिशत।

## मत प्रतिशत और सीटों का अंतर

जनता पार्टी को 41.32 प्रतिशत राष्ट्रीय वोट मिले और उसने 54.4 प्रतिशत लोकसभा सीटें जीतीं। कांग्रेस को 34.52 प्रतिशत मत मिले और 28.4 प्रतिशत सीटें।

जनता पार्टी ने कांग्रेस के मुकाबले लगभग 6.8 प्रतिशत अंक अधिक वोट प्राप्त किए, लेकिन दोनों के बीच 141 सीटों का अंतर रहा। इसका प्रमुख कारण जनता पार्टी के पक्ष में उत्तर भारत की अनेक सीटों पर मतों का सघन समर्थन था।

## 5. कौन-कौन से राजनीतिक दल और उनके प्रमुख नेता थे?

| राजनीतिक दल या राजनीतिक धारा | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| जनता पार्टी | मोरारजी देसाई, चंद्रशेखर |
| जनता पार्टी में शामिल पूर्व भारतीय जनसंघ | अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, नानाजी देशमुख |
| जनता पार्टी में शामिल भारतीय लोकदल | चौधरी चरण सिंह, राजनारायण |
| जनता पार्टी की समाजवादी धारा | जॉर्ज फर्नांडिस, मधु लिमये, मधु दंडवते |
| कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी (जनता गठबंधन) | जगजीवन राम, हेमवती नंदन बहुगुणा |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | इंदिरा गांधी |
| कांग्रेस (संगठन) | के. कामराज की राजनीतिक धारा; पी. रामचंद्रन सहित नेता |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | ई. एम. एस. नंबूदरीपाद, ज्योति बसु, ए. के. गोपालन |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | एस. ए. डांगे, सी. राजेश्वर राव |
| अन्नाद्रमुक | एम. जी. रामचंद्रन |
| डीएमके | एम. करुणानिधि |
| शिरोमणि अकाली दल | प्रकाश सिंह बादल, जगदेव सिंह तलवंडी |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | शेख अब्दुल्ला |
| केरल कांग्रेस | के. एम. मणि तथा क्षेत्रीय नेतृत्व |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | महाराष्ट्र का किसान-मजदूर नेतृत्व |
| फॉरवर्ड ब्लॉक | चित्त बसु |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | त्रिदीब चौधरी |

यह दलों से जुड़े प्रमुख नेताओं की सूची है। सभी व्यक्ति संबंधित दलों के औपचारिक अध्यक्ष नहीं थे।

## जयप्रकाश नारायण की भूमिका

जयप्रकाश नारायण जनता पार्टी के संगठनात्मक अध्यक्ष या प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं थे। लेकिन आपातकाल विरोधी आंदोलन और विपक्षी एकता में उनका अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान था।

उन्होंने 1974 से बिहार आंदोलन और ‘संपूर्ण क्रांति’ के माध्यम से कांग्रेस सरकार के विरुद्ध राजनीतिक आंदोलन का नेतृत्व किया।

## 6. चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण घटनाएँ और चर्चित उम्मीदवार

**मोरारजी देसाई — देश के पहले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री**

जनता पार्टी की जीत के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह और जगजीवन राम प्रमुख दावेदार थे। जयप्रकाश नारायण और आचार्य कृपलानी की उपस्थिति में सहमति बनी और 24 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री चुने गए।

## इंदिरा गांधी और संजय गांधी की पराजय

## रायबरेली : इंदिरा गांधी बनाम राजनारायण

| प्रत्याशी | मत | वोट प्रतिशत |
| --- | --- | --- |
| राजनारायण — जनता पार्टी | 1,77,719 | 53.51% |
| इंदिरा गांधी — कांग्रेस | 1,22,517 | 36.89% |

जीत का अंतर

## 55,202 वोट

निर्वाचन आयोग का निर्वाचन क्षेत्रवार परिणाम।

## अमेठी : संजय गांधी बनाम रवींद्र प्रताप सिंह

| प्रत्याशी | मत | वोट प्रतिशत |
| --- | --- | --- |
| रवींद्र प्रताप सिंह — जनता पार्टी | 1,76,410 | 60.47% |
| संजय गांधी — कांग्रेस | 1,00,566 | 34.47% |

जीत का अंतर

## 75,844 वोट

निर्वाचन आयोग आधारित अमेठी निर्वाचन क्षेत्र का परिणाम।

## कुछ अन्य उल्लेखनीय नतीजे

चौधरी चरण सिंह बागपत से, अटल बिहारी वाजपेयी नई दिल्ली से, लालकृष्ण आडवाणी नई दिल्ली के बजाय राज्यसभा के सदस्य के रूप में सरकार से जुड़े, और जॉर्ज फर्नांडिस बिहार की मुजफ्फरपुर सीट से निर्वाचित हुए।

जगजीवन राम बिहार की सासाराम सीट से तथा हेमवती नंदन बहुगुणा उत्तर प्रदेश की लखनऊ सीट से जनता गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीते।

## 7. आपातकाल और चुनाव : महत्वपूर्ण समयरेखा

1. **12 जून 1975 — इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला**

न्यायालय ने 1971 में रायबरेली से इंदिरा गांधी का निर्वाचन निरस्त किया। इसके बाद संवैधानिक और राजनीतिक विवाद बढ़ा। 2. **25–26 जून 1975 — आंतरिक आपातकाल**

राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने संविधान के अनुच्छेद 352 के अंतर्गत आपातकाल की घोषणा की। विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारियाँ, सेंसरशिप और नागरिक स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध शुरू हुए। 3. **जनवरी 1977 — चुनाव कराने का निर्णय**

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने लोकसभा चुनाव की घोषणा की। आपातकाल के दौरान गिरफ्तार किए गए अनेक प्रमुख विपक्षी नेताओं को रिहा किया गया। 4. **जनवरी–फरवरी 1977 — जनता पार्टी और विपक्षी गठबंधन**

अलग-अलग विपक्षी धाराएँ एकजुट हुईं। फरवरी में जगजीवन राम कांग्रेस छोड़कर कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी के साथ जनता गठबंधन में शामिल हुए। 5. **16–20 मार्च 1977 — लोकसभा चुनाव**

मतदान हुआ और जनता गठबंधन ने उत्तर भारत में भारी सफलता हासिल की। 6. **21 मार्च 1977 — आपातकाल समाप्त**

आपातकाल औपचारिक रूप से वापस लिया गया। 7. **24 मार्च 1977 — नई सरकार**

मोरारजी देसाई ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

## 8. आपातकाल के प्रमुख मुद्दे और राजनीतिक असर

चुनाव में आपातकाल के दौरान की कई सरकारी कार्रवाइयों पर व्यापक राजनीतिक बहस हुई।

**प्रेस पर सेंसरशिप:** समाचार पत्रों और पत्रकारों पर लगाए गए प्रतिबंध विपक्ष के अभियान का प्रमुख विषय बने।

**विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी:** जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और अन्य नेताओं की गिरफ्तारियाँ नागरिक अधिकारों के प्रश्न से जुड़ीं।

**नसबंदी अभियान:** विशेष रूप से उत्तर भारत में नसबंदी कार्यक्रम और कुछ स्थानों पर जबरदस्ती किए जाने की शिकायतें विवाद का विषय बनीं। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 1975–76 और 1976–77 में संयुक्त रूप से लगभग 1.07 करोड़ नसबंदी प्रक्रियाएँ दर्ज हुई थीं। यह संख्या अपने आप में जबरन की गई प्रक्रियाओं की संख्या नहीं है।

**बस्तियों का ध्वस्तीकरण:** दिल्ली के तुर्कमान गेट सहित विभिन्न घटनाएँ आपातकाल के विरोध में उठाए गए मुद्दों में थीं।

इन मुद्दों के राजनीतिक प्रभाव का स्वरूप अलग-अलग राज्यों में भिन्न दिखाई दिया। उत्तर भारत में कांग्रेस का लगभग सफाया हो गया, जबकि दक्षिण भारत में उसका समर्थन काफी हद तक बना रहा।

## 9. 1971 और 1977 के चुनावों की तुलना

| राजनीतिक दल / विवरण | 1971 | 1977 |
| --- | --- | --- |
| कुल निर्वाचित सीटें | 518 | 542 |
| कांग्रेस की सीटें | 352 | 154 |
| कांग्रेस वोट शेयर | 43.68% | 34.52% |
| जनता पार्टी की सीटें | अस्तित्व में नहीं | 295 |
| जनता पार्टी वोट शेयर | — | 41.32% |
| माकपा सीटें | 25 | 22 |
| भाकपा सीटें | 23 | 7 |
| डीएमके सीटें | 23 | 2 |
| अन्नाद्रमुक सीटें | अस्तित्व में नहीं | 18 |
| जनसंघ | 22 | जनता पार्टी में समाहित |

कांग्रेस की सीटें 198 कम हुईं। राष्ट्रीय वोट शेयर में 9.16 प्रतिशत अंकों की गिरावट दर्ज हुई।

## 10. जनता सरकार केवल ढाई वर्ष भी क्यों नहीं चल सकी?

1977 में जनता पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत था, लेकिन सरकार के भीतर अनेक राजनीतिक धाराएँ थीं। मोरारजी देसाई, चौधरी चरण सिंह, जगजीवन राम और अन्य वरिष्ठ नेताओं के बीच नेतृत्व तथा नीतिगत मतभेद बढ़ते गए।

पूर्व जनसंघ नेताओं की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्धता को लेकर दोहरी सदस्यता का विवाद भी सामने आया।

1979 में जनता पार्टी में विभाजन हुआ। मोरारजी देसाई ने जुलाई 1979 में त्यागपत्र दे दिया। चौधरी चरण सिंह 28 जुलाई 1979 को प्रधानमंत्री बने, लेकिन लोकसभा में विश्वास मत हासिल करने से पहले ही कांग्रेस ने उनका समर्थन वापस ले लिया।

इसके बाद जनवरी 1980 में सातवें लोकसभा चुनाव हुए, जिनमें इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की।

## 11. पहले छह लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन

| वर्ष | कुल सीटें | कांग्रेस की सीटें | कांग्रेस वोट शेयर |
| --- | --- | --- | --- |
| 1951–52 | 489 | 364 | 44.99% |
| 1957 | 494 | 371 | 47.78% |
| 1962 | 494 | 361 | 44.72% |
| 1967 | 520 | 283 | 40.78% |
| 1971 | 518 | 352 | 43.68% |
| 1977 | 542 | 154 | 34.52% |

## 12. मूल ऐतिहासिक स्रोत

शोध और पुस्तक के लिए सबसे उपयोगी स्रोत निर्वाचन आयोग का मूल दस्तावेज है।

[निर्वाचन आयोग : 1977 लोकसभा चुनाव की संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट](https://www.eci.gov.in/statistical-reports)

[Sixth General Elections, 1977 — आधिकारिक चुनाव इतिहास](https://www.eci.gov.in/eci-publication/)

[लोकसभा सचिवालय : 1977 चुनाव और जनता सरकार के गठन का समकालीन विवरण](https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/764411/1/jpi_April-June_1977.pdf)

## ऐतिहासिक निष्कर्ष

1977 का छठा लोकसभा चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है कि इसमें पहली बार मतदाताओं ने केंद्र में कांग्रेस के स्थान पर किसी दूसरे राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत दिया। आपातकाल और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े प्रश्न चुनाव के केंद्रीय मुद्दे बने।

जनता पार्टी को 295 सीटें मिलीं, जबकि सहयोगियों के साथ उसका संसदीय समर्थन और व्यापक था। कांग्रेस की सीटें 352 से गिरकर 154 रह गईं। इंदिरा गांधी और संजय गांधी दोनों चुनाव हार गए।

हालाँकि जनता सरकार अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल पूरा नहीं कर सकी, फिर भी 1977 के चुनाव ने भारतीय संसदीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण तथ्य स्थापित किया—**केंद्र में सत्ता का परिवर्तन मतपेटी के माध्यम से संभव है और सत्तारूढ़ दल को भी चुनावी पराजय का सामना करना पड़ सकता है।**

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-6