# भारत का चौथा लोकसभा चुनाव 1967 : कांग्रेस के एकछत्र प्रभुत्व को पहली बड़ी चुनौती

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

17 से 21 फरवरी 1967 के बीच हुए चौथे लोकसभा आम चुनाव ने स्वतंत्र भारत की राजनीति की दिशा बदल दी। पहली बार कांग्रेस की लोकसभा सीटें 300 से नीचे आ गईं। इंदिरा गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने 520 में से 283 सीटें जीतकर लगातार चौथी बार केंद्र में सरकार बनाई, लेकिन उसकी सीटों की संख्या 1962 के मुकाबले 78 घट गई।

इस चुनाव का दूसरा महत्वपूर्ण परिणाम था गैर-कांग्रेसी दलों का उभार। स्वतंत्र पार्टी, भारतीय जनसंघ, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टियों और डीएमके ने राष्ट्रीय तथा क्षेत्रीय राजनीति में अपनी स्थिति मजबूत की। मद्रास राज्य में कांग्रेस को लोकसभा की केवल तीन सीटें मिलीं, जबकि डीएमके ने 25 सीटें जीत लीं।

साथ हुए विधानसभा चुनावों और उसके बाद बने गठबंधनों ने उत्तर भारत सहित अनेक राज्यों में कांग्रेस के लंबे शासन को चुनौती दी। इसी दौर में संयुक्त विधायक दल की सरकारों और दल-बदल की राजनीति को व्यापक पहचान मिली।

निर्वाचित लोकसभा सीटें

## 520

कांग्रेस की सीटें

## 283

कांग्रेस का वोट शेयर

## 40.78%

मतदान प्रतिशत

## 61.04%

## 1. चौथे लोकसभा चुनाव के प्रमुख तथ्य

| विषय | विवरण |
| --- | --- |
| मतदान की मुख्य तारीखें | 17–21 फरवरी 1967 |
| चुनाव आयोग | मुख्य निर्वाचन आयुक्त के. वी. के. सुंदरम |
| निर्वाचित लोकसभा सीटें | 520 |
| बहुमत के लिए आवश्यक सीटें | 261 |
| कुल उम्मीदवार | 2,369 |
| पंजीकृत मतदाता | लगभग 25.02 करोड़ |
| मतदान प्रतिशत | 61.04% |
| कांग्रेस की सीटें | 283 |
| कांग्रेस का वोट शेयर | 40.78% |
| सबसे बड़ा विपक्षी दल | स्वतंत्र पार्टी — 44 सीटें |
| प्रधानमंत्री | इंदिरा गांधी |
| पहली बैठक, चौथी लोकसभा | 16 मार्च 1967 |

कुल मतदान प्रतिशत और डाले गए वैध मतों के प्रतिशत की गणना अलग होती है। इसी वजह से कुछ ऐतिहासिक संकलनों में मतदान के अलग आँकड़े दिखाई देते हैं।

## 2. तत्कालीन राज्यों में कितनी लोकसभा सीटें थीं और कांग्रेस कितनी जीती?

1962 के बाद एक बड़ा परिवर्तन 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पुनर्गठन से हुआ। हरियाणा नया राज्य बना, जबकि चंडीगढ़ केंद्रशासित प्रदेश बना। 1967 के चुनाव में जम्मू-कश्मीर की छह लोकसभा सीटों पर भी प्रत्यक्ष चुनाव हुए।

नीचे निर्वाचन आयोग की 1967 की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार राज्यवार स्थिति दी गई है।

| राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | कांग्रेस | अन्य |
| --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 85 | 47 | 38 |
| बिहार | 53 | 34 | 19 |
| महाराष्ट्र | 45 | 37 | 8 |
| आंध्र प्रदेश | 41 | 35 | 6 |
| पश्चिम बंगाल | 40 | 14 | 26 |
| मद्रास | 39 | 3 | 36 |
| मध्य प्रदेश | 37 | 24 | 13 |
| मैसूर (कर्नाटक) | 27 | 18 | 9 |
| गुजरात | 24 | 11 | 13 |
| राजस्थान | 23 | 10 | 13 |
| असम | 14 | 10 | 4 |
| पंजाब | 13 | 9 | 4 |
| उड़ीसा | 20 | 6 | 14 |
| केरल | 19 | 1 | 18 |
| हरियाणा | 9 | 7 | 2 |
| जम्मू-कश्मीर | 6 | 5 | 1 |
| दिल्ली | 7 | 1 | 6 |
| हिमाचल प्रदेश | 6 | 6 | 0 |
| त्रिपुरा | 2 | 2 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 0 | 2 |
| गोवा, दमन और दीव | 2 | 0 | 2 |
| नगालैंड | 1 | 0 | 1 |
| अंडमान-निकोबार | 1 | 1 | 0 |
| चंडीगढ़ | 1 | 0 | 1 |
| दादरा और नगर हवेली | 1 | 1 | 0 |
| लक्षद्वीप | 1 | 0 | 1 |
| पांडिचेरी (पुडुचेरी) | 1 | 1 | 0 |
| **कुल** | **520** | **283** | **237** |

स्रोत: निर्वाचन आयोग, *Statistical Report on General Elections, 1967, Fourth Lok Sabha*, खंड I, राज्यवार विजेता दल तालिका, पृष्ठ 80–83।

## राज्यों के परिणामों में चार बड़े उलटफेर

- मद्रास में कांग्रेस 39 में से केवल तीन सीटें जीत पाई; डीएमके 25 सीटों पर विजयी रही।

- केरल में कांग्रेस सिर्फ एक सीट जीती; मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने नौ सीटें हासिल कीं।

- पश्चिम बंगाल में कांग्रेस को 40 में से 14 सीटें मिलीं।

- उड़ीसा में कांग्रेस को 20 में से छह सीटें मिलीं, जबकि स्वतंत्र पार्टी ने आठ सीटें जीतीं।

## 3. राजनीतिक दल, उनके नेता और चुनाव परिणाम

1967 में कांग्रेस के सामने कई अलग-अलग विचारधाराओं वाले दल थे। कांग्रेस के मुकाबले जनसंघ, स्वतंत्र पार्टी, समाजवादी और कम्युनिस्ट दलों का प्रभाव बढ़ा। 1964 में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के विभाजन से बनी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भी पहली बार आम चुनाव लड़ा।

## प्रमुख दल और तत्कालीन नेतृत्व

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | इंदिरा गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज |
| स्वतंत्र पार्टी | सी. राजगोपालाचारी, मीनू मसानी, एन. जी. रंगा |
| भारतीय जनसंघ | दीनदयाल उपाध्याय, बलराज मधोक, अटल बिहारी वाजपेयी |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | एस. ए. डांगे, भूपेश गुप्ता |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | पी. सुंदरैया, ई. एम. एस. नंबूदरीपाद, ए. के. गोपालन |
| संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी | डॉ. राममनोहर लोहिया, जॉर्ज फर्नांडिस, राजनारायण |
| प्रजा सोशलिस्ट पार्टी | अशोक मेहता से जुड़ी समाजवादी धारा, समर गुहा सहित अन्य नेता |
| द्रविड़ मुनेत्र कड़गम | सी. एन. अन्नादुरई, एम. करुणानिधि |
| बंगला कांग्रेस | अजय कुमार मुखर्जी |
| रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया | दादासाहेब गायकवाड़ सहित दलित आंदोलन के नेता |
| अकाली दल (संत समूह) | संत फतेह सिंह |
| अकाली दल (मास्टर समूह) | मास्टर तारा सिंह |
| ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक | हेमंत कुमार बसु सहित नेतृत्व |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | महाराष्ट्र का किसान-मजदूर नेतृत्व |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | केरल का तत्कालीन मुस्लिम लीग नेतृत्व |

ध्यान रहे कि यह संबंधित दलों के प्रमुख राजनीतिक चेहरों की सूची है। इनमें से हर व्यक्ति चुनाव के समय औपचारिक पार्टी अध्यक्ष नहीं था।

## 4. पार्टीवार सीटें और राष्ट्रीय वोट शेयर

निर्वाचन आयोग के मूल आँकड़ों के अनुसार परिणाम इस प्रकार थे।

| राजनीतिक दल | जीती सीटें | वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 283 | 40.78% |
| स्वतंत्र पार्टी | 44 | 8.67% |
| भारतीय जनसंघ | 35 | 9.31% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 23 | 5.11% |
| संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी | 23 | 4.92% |
| मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी | 19 | 4.28% |
| प्रजा सोशलिस्ट पार्टी | 13 | 3.06% |
| डीएमके | 25 | 3.79% |
| बंगला कांग्रेस | 5 | 0.83% |
| अकाली दल (संत समूह) | 3 | 0.66% |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | 2 | 0.71% |
| फॉरवर्ड ब्लॉक | 2 | 0.43% |
| इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग | 2 | 0.28% |
| रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया | 1 | 2.47% |
| ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस | 1 | 0.08% |
| जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस | 1 | 0.14% |
| झारखंड दल | 1 | 0.13% |
| नगालैंड नेशनलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन | 1 | 0.00%\* |
| यूनाइटेड गोअन्स (सेक्वेरा समूह) | 1 | 0.07% |
| यूनाइटेड गोअन्स से संबंधित अन्य समूह | 0 | लगभग 0.00% |
| निर्दलीय उम्मीदवार | 35 | 13.78% |

\*निर्वाचन आयोग की दलवार तालिका में नगालैंड नेशनलिस्ट ऑर्गेनाइजेशन के निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवार के कारण दर्ज मत शून्य हैं। शून्य वोट शेयर का अर्थ चुनावी समर्थन का अभाव नहीं है। इस तालिका में अन्य शून्य-सीट वाले छोटे दलों को अलग-अलग नहीं दिखाया गया है।

## एक विशेष बात

जनसंघ को 9.31 प्रतिशत मत मिले, जबकि स्वतंत्र पार्टी को 8.67 प्रतिशत। इसके बावजूद स्वतंत्र पार्टी ने 44 और जनसंघ ने 35 सीटें जीतीं।

इसी प्रकार केवल 3.79 प्रतिशत राष्ट्रीय मत प्राप्त करने वाली डीएमके 25 सीटें जीत गई, क्योंकि उसका जनाधार मुख्यतः मद्रास राज्य में केंद्रित था।

## 5. प्रमुख राज्यों में विपक्ष का प्रदर्शन

| राज्य | विपक्ष और क्षेत्रीय दलों की सीटें |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | जनसंघ 12, संयुक्त सोशलिस्ट 8, भाकपा 5, प्रजा सोशलिस्ट 2, निर्दलीय 8 सहित अन्य |
| बिहार | संयुक्त सोशलिस्ट 7, भाकपा 5, निर्दलीय 4, जनसंघ 1, प्रजा सोशलिस्ट 1, झारखंड दल 1 |
| मध्य प्रदेश | जनसंघ 10, निर्दलीय 2, स्वतंत्र पार्टी 1 |
| पश्चिम बंगाल | भाकपा 5, माकपा 5, बंगला कांग्रेस 5, निर्दलीय 7, फॉरवर्ड ब्लॉक 2 सहित अन्य |
| मद्रास | डीएमके 25, स्वतंत्र पार्टी 6, माकपा 4, निर्दलीय 1 |
| गुजरात | स्वतंत्र पार्टी 12, निर्दलीय 1 |
| राजस्थान | स्वतंत्र पार्टी 8, जनसंघ 3, निर्दलीय 2 |
| उड़ीसा | स्वतंत्र पार्टी 8, प्रजा सोशलिस्ट 4, संयुक्त सोशलिस्ट 1, निर्दलीय 1 |
| केरल | माकपा 9, भाकपा 3, संयुक्त सोशलिस्ट 3, मुस्लिम लीग 2, निर्दलीय 1 |
| दिल्ली | जनसंघ 6, कांग्रेस 1 |

## 6. चुनाव के सबसे चर्चित नेता और उनके परिणाम

**इंदिरा गांधी — रायबरेली से विजय**

इंदिरा गांधी ने उत्तर प्रदेश की रायबरेली सीट से चुनाव जीता। वे 1966 में लालबहादुर शास्त्री के निधन के बाद प्रधानमंत्री बनी थीं। 1967 उनका प्रधानमंत्री के रूप में पहला आम चुनाव था।

**अटल बिहारी वाजपेयी — बलरामपुर से जीत**

1962 में बलरामपुर से पराजय के बाद वाजपेयी ने 1967 में यही सीट फिर जीत ली। इस चुनाव में जनसंघ की सीटें 14 से बढ़कर 35 हो गईं।

**डॉ. राममनोहर लोहिया — कन्नौज से जीत**

लोहिया संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के प्रमुख नेताओं में थे। कांग्रेस विरोधी दलों की व्यापक राजनीतिक एकजुटता में उनका महत्वपूर्ण योगदान था। उनका निधन इसी वर्ष 12 अक्टूबर 1967 को हुआ।

**जॉर्ज फर्नांडिस — एस. के. पाटिल को पराजित किया**

बंबई दक्षिण लोकसभा सीट पर जॉर्ज फर्नांडिस ने कांग्रेस के शक्तिशाली नेता एस. के. पाटिल को हराया। इस विजय से फर्नांडिस राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए।

इसके अलावा विजयलक्ष्मी पंडित फूलपुर से, राजमाता विजयाराजे सिंधिया गुना से और गुलजारीलाल नंदा कैथल से निर्वाचित हुए।

## 7. कांग्रेस को किन बड़े नेताओं की हार से झटका लगा?

1967 में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को पराजय मिली। इनमें कांग्रेस अध्यक्ष के. कामराज, केंद्रीय मंत्री एस. के. पाटिल, अतुल्य घोष और बिहार के नेता के. बी. सहाय शामिल थे।

कांग्रेस संगठन के शक्तिशाली नेताओं का प्रभाव कम हुआ और प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तथा पार्टी के वरिष्ठ संगठनात्मक नेतृत्व के बीच आगे चलकर मतभेद गहरे हुए। यही टकराव 1969 में कांग्रेस विभाजन की पृष्ठभूमि बना।

## 8. नौ राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर : 1967 का राजनीतिक परिवर्तन

यह ध्यान देने योग्य है कि नीचे विधानसभा चुनावों और उसके बाद हुए सरकार गठन की चर्चा है, लोकसभा सीटों की नहीं।

1967 में नौ राज्यों में कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। सात राज्यों में उसका बहुमत समाप्त हुआ और दो अन्य राज्यों में दल-बदल के कारण वह सरकार नहीं बना सकी या सरकार से बाहर हो गई।

| राज्य | गैर-कांग्रेसी सरकार से जुड़ा प्रमुख नेता |
| --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | चौधरी चरण सिंह |
| बिहार | महामाया प्रसाद सिन्हा |
| मध्य प्रदेश | गोविंद नारायण सिंह |
| हरियाणा | राव बीरेंद्र सिंह |
| पंजाब | गुरनाम सिंह |
| पश्चिम बंगाल | अजय कुमार मुखर्जी |
| उड़ीसा | राजेंद्र नारायण सिंह देव |
| मद्रास | सी. एन. अन्नादुरई |
| केरल | ई. एम. एस. नंबूदरीपाद |

## संयुक्त विधायक दल की राजनीति

उत्तर प्रदेश में 425 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस 199 सीटों पर सिमट गई। चौधरी चरण सिंह कांग्रेस से अलग हुए और अप्रैल 1967 में विभिन्न दलों के समर्थन से मुख्यमंत्री बने।

इस सरकार को जनसंघ, समाजवादी दलों, कम्युनिस्ट धारा के दलों, स्वतंत्र पार्टी तथा निर्दलीय विधायकों का समर्थन मिला। अलग-अलग विचारधाराओं वाले दलों का कांग्रेस-विरोध के आधार पर एकजुट होना इस दौर की प्रमुख राजनीतिक विशेषता थी।

## 9. 1967 के चुनाव से पहले देश की परिस्थितियाँ

1962 से 1967 के बीच भारत ने कई बड़ी घटनाओं का सामना किया था।

- अक्टूबर–नवंबर 1962 में भारत-चीन युद्ध हुआ।

- मई 1964 में जवाहरलाल नेहरू का निधन हुआ।

- लालबहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री बने।

- 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ।

- जनवरी 1966 में ताशकंद समझौते के बाद शास्त्री का निधन हुआ।

- इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं।

- देश को खाद्यान्न संकट, सूखे, महँगाई और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

- जून 1966 में रुपये का अवमूल्यन किया गया।

इन परिस्थितियों ने चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि तैयार की। सामाजिक असंतोष, आर्थिक कठिनाइयों और विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय मांगों का असर भी चुनावी राजनीति में दिखाई दिया।

## 10. पहले चार लोकसभा चुनावों की तुलना

| विवरण | 1951–52 | 1957 | 1962 | 1967 |
| --- | --- | --- | --- | --- |
| निर्वाचित सीटें | 489 | 494 | 494 | 520 |
| कांग्रेस की सीटें | 364 | 371 | 361 | 283 |
| कांग्रेस वोट शेयर | 44.99% | 47.78% | 44.72% | 40.78% |
| जनसंघ की सीटें | 3 | 4 | 14 | 35 |
| जनसंघ वोट शेयर | 3.06% | 5.97% | 6.44% | 9.31% |
| कम्युनिस्ट पार्टी की सीटें (भाकपा) | 16 | 27 | 29 | 23 |
| स्वतंत्र पार्टी की सीटें | — | — | 18 | 44 |

1962 से 1967 के बीच कांग्रेस की 78 सीटें कम हुईं, जबकि लोकसभा की निर्वाचित सीटें 494 से बढ़कर 520 हो चुकी थीं।

## 11. 1967 के चुनाव का ऐतिहासिक महत्व

1967 भारतीय लोकतंत्र के विकास में एक निर्णायक वर्ष था। इस चुनाव ने यह स्थापित कर दिया कि कांग्रेस के लंबे शासन के बावजूद उसके सामने कई राज्यों में प्रभावशाली राजनीतिक विकल्प उभर चुके थे।

स्वतंत्र पार्टी 44 सीटों के साथ सबसे बड़ा विपक्षी दल बनी। जनसंघ की सीटें बढ़कर 35 पहुँचीं। वामपंथी राजनीति दो अलग कम्युनिस्ट दलों के माध्यम से आगे बढ़ी। डीएमके ने मद्रास में कांग्रेस के प्रभुत्व को समाप्त किया। उत्तर भारत में संयुक्त विधायक दल की सरकारों ने गठबंधन आधारित सत्ता-संचालन का प्रयोग शुरू किया।

**इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक परिणाम यह था कि कांग्रेस केंद्र में अपना बहुमत बचाने में सफल रही, लेकिन राज्यों में उसका एकछत्र प्रभुत्व समाप्त होने लगा।** यही परिस्थितियाँ 1969 के कांग्रेस विभाजन और 1971 के मध्यावधि लोकसभा चुनाव की पृष्ठभूमि बनीं।

आधिकारिक मूल स्रोत: [निर्वाचन आयोग : चौथा लोकसभा आम चुनाव 1967, संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट (खंड I)](https://www.eci.gov.in/eci-backend/public/api/download?url=LMAhAK6sOPBp%2FNFF0iRfXbEB1EVSLT41NNLRjYNJJP1KivrUxbfqkDatmHy12e%2FzVx8fLfn2ReU7TfrqYobgIoseT0ZHlxSqV5yDBw7qZy8BF%2FVqVfUFZB5kPI2dacyxFUsCtgFOtq6nBgIeTuoJZxx9hqrgzh%2Bp%2FKhICKDnqu%2FEPIcjKuQAupJewJECwP16&utm_source=chatgpt.com)।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-4