# भारत का दूसरा लोकसभा चुनाव 1957 : विस्तृत चुनावी इतिहास

ओमकार चौधरी / OCN Research Desk

भारत का दूसरा लोकसभा आम चुनाव 24 फरवरी से 14 मार्च 1957 के बीच हुआ। यह स्वतंत्र भारत की पहली निर्वाचित सरकार के पाँच वर्ष पूरे होने के बाद आयोजित चुनाव था। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार स्पष्ट बहुमत हासिल किया। दूसरी ओर, कम्युनिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय जनसंघ और कई क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

1956 में हुए व्यापक राज्य पुनर्गठन के कारण इस चुनाव का राजनीतिक मानचित्र पहले चुनाव से काफी अलग था।

निर्वाचित लोकसभा सीटें

## 494

कांग्रेस की जीत

## 371

कांग्रेस का मत प्रतिशत

## 47.78%

चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दल

## 15

| चुनाव संबंधी तथ्य | विवरण |
| --- | --- |
| मतदान | 24 फरवरी–14 मार्च 1957 |
| मुख्य निर्वाचन आयुक्त | सुकुमार सेन |
| चुनावी राज्य | 13 |
| मतदान वाले केंद्रशासित प्रदेश | 4 |
| संसदीय निर्वाचन क्षेत्र | 403 |
| निर्वाचित सीटें | 494 |
| पंजीकृत मतदाता | 19,36,52,179 |
| मतदान प्रतिशत | लगभग 45.44% |
| विजेता दल | भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस |
| प्रधानमंत्री | जवाहरलाल नेहरू |
| सबसे बड़ा विपक्षी दल | भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी — 27 सीटें |
| निर्वाचित महिला सांसद | 27 |

निर्वाचन आयोग के अनुसार 1957 में 403 निर्वाचन क्षेत्रों से 494 सांसद चुने गए। इनमें 91 दो-सदस्यीय और 312 एक-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र थे। दो-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों की व्यवस्था 1961 में समाप्त कर दी गई।

## 1. राज्यवार लोकसभा सीटें और चुनाव परिणाम

1956 के राज्य पुनर्गठन अधिनियम ने भारत की राजनीतिक और प्रशासनिक संरचना बदल दी थी। 1951–52 में मौजूद हैदराबाद, सौराष्ट्र, मध्य भारत, विंध्य प्रदेश और त्रावणकोर-कोचीन जैसी कई इकाइयाँ अब दूसरे राज्यों में समाहित हो चुकी थीं। आंध्र प्रदेश और केरल नए स्वरूप में अस्तित्व में आए।

नीचे तत्कालीन 13 राज्यों और चार केंद्रशासित प्रदेशों की निर्वाचित लोकसभा सीटों का विवरण है।

| तत्कालीन राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | कुल सीटें | कांग्रेस | अन्य |
| --- | --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 86 | 70 | 16 |
| बंबई | 66 | 38 | 28 |
| बिहार | 53 | 41 | 12 |
| आंध्र प्रदेश | 43 | 37 | 6 |
| मद्रास | 41 | 31 | 10 |
| पश्चिम बंगाल | 36 | 23 | 13 |
| मध्य प्रदेश | 36 | 35 | 1 |
| मैसूर | 26 | 23 | 3 |
| पंजाब | 22 | 21 | 1 |
| राजस्थान | 22 | 19 | 3 |
| उड़ीसा | 20 | 7 | 13 |
| केरल | 18 | 6 | 12 |
| असम | 12 | 9 | 3 |
| दिल्ली | 5 | 5 | 0 |
| हिमाचल प्रदेश | 4 | 4 | 0 |
| मणिपुर | 2 | 1 | 1 |
| त्रिपुरा | 2 | 1 | 1 |
| **कुल** | **494** | **371** | **123** |

जम्मू-कश्मीर के छह प्रतिनिधि और कुछ अन्य मनोनीत प्रतिनिधि इन 494 निर्वाचित सीटों में शामिल नहीं हैं।

## 2. कौन-कौन से राजनीतिक दल मैदान में थे? उनके प्रमुख नेता कौन थे?

1957 में कुल 15 राजनीतिक दलों ने उम्मीदवार उतारे। निर्दलीय उम्मीदवार इनके अतिरिक्त थे। 1952 में सक्रिय समाजवादी और किसान मजदूर प्रजा पार्टी के विलय से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी बन चुकी थी। इसने कांग्रेस के सामने एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विकल्प के रूप में चुनाव लड़ा।

| राजनीतिक दल | प्रमुख नेता / संबंधित नेतृत्व |
| --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | जवाहरलाल नेहरू; कांग्रेस अध्यक्ष यू. एन. ढेबर |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | अजय घोष; ए. के. गोपालन |
| प्रजा सोशलिस्ट पार्टी | जयप्रकाश नारायण, आचार्य कृपलानी, अशोक मेहता, राममनोहर लोहिया |
| भारतीय जनसंघ | देबप्रसाद घोष; संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 1953 में निधन हो चुका था |
| शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन | डॉ. आंबेडकर की राजनीतिक विरासत से जुड़े नेता; आंबेडकर का निधन दिसंबर 1956 में हो चुका था |
| अखिल भारतीय गणतंत्र परिषद | राजेंद्र नारायण सिंह देव |
| झारखंड पार्टी | जयपाल सिंह मुंडा |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | केशवराव जेधे सहित किसान नेतृत्व |
| पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट | आंध्र क्षेत्र के वामपंथी नेता |
| हिंदू महासभा | एन. सी. चटर्जी सहित वरिष्ठ नेतृत्व |
| फॉरवर्ड ब्लॉक (मार्क्सवादी) | हेमंत कुमार बसु से जुड़ी राजनीतिक धारा |
| छोटानागपुर संथाल परगना जनता पार्टी | छोटानागपुर-संथाल परगना क्षेत्रीय नेतृत्व |
| राम राज्य परिषद | स्वामी करपात्री महाराज |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | त्रिदीब चौधरी |
| प्रजा पार्टी | स्थानीय संगठनात्मक नेतृत्व |

यह तालिका प्रमुख ऐतिहासिक नेताओं और राजनीतिक धाराओं को बताती है। इसे सभी दलों के 1957 के औपचारिक अध्यक्षों की प्रमाणित सूची नहीं मानना चाहिए।

## 3. किस पार्टी को कितनी सीटें मिलीं और वोट शेयर कितना रहा?

| दल | सीटें | राष्ट्रीय वोट शेयर |
| --- | --- | --- |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 371 | 47.78% |
| भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी | 27 | 8.92% |
| प्रजा सोशलिस्ट पार्टी | 19 | 10.41% |
| अखिल भारतीय गणतंत्र परिषद | 7 | 1.07% |
| शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन | 6 | 1.69% |
| झारखंड पार्टी | 6 | 0.62% |
| भारतीय जनसंघ | 4 | 5.97% |
| पीजेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी | 4 | 0.77% |
| छोटानागपुर संथाल परगना जनता पार्टी | 3 | 0.42% |
| पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट | 2 | 0.87% |
| फॉरवर्ड ब्लॉक (मार्क्सवादी) | 2 | 0.55% |
| हिंदू महासभा | 1 | 0.86% |
| राम राज्य परिषद | 0 | 0.38% |
| रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी | 0 | 0.26% |
| प्रजा पार्टी | 0 | 0.12% |
| निर्दलीय | 42 | 19.32% |
| **कुल** | **494** | **लगभग 100%** |

प्रतिशत दो दशमलव तक पूर्णांकित हैं। स्रोत: निर्वाचन आयोग की ऐतिहासिक दलवार परिणाम तालिका।

## वोट और सीटों में कितना अंतर था?

कांग्रेस को 47.78 प्रतिशत वोट मिले लेकिन 494 में से 371 सीटें, यानी लगभग 75.1 प्रतिशत सीटें जीत लीं। दूसरी ओर, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को कम्युनिस्ट पार्टी से अधिक वोट मिलने के बावजूद आठ सीटें कम मिलीं।

इससे पहले-पहल ही स्पष्ट हो गया था कि भारतीय संसदीय चुनाव प्रणाली में राष्ट्रीय वोट प्रतिशत के साथ-साथ वोटों का निर्वाचन क्षेत्रवार वितरण भी निर्णायक होता है।

## 4. प्रमुख राज्यों में किस पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहा?

1957 के चुनाव में कांग्रेस की जीत देशव्यापी थी, लेकिन केरल, उड़ीसा, बंबई और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विपक्ष ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।

| राज्य | कांग्रेस | प्रमुख विपक्षी दलों का प्रदर्शन |
| --- | --- | --- |
| उत्तर प्रदेश | 70 | प्रजा सोशलिस्ट 4, जनसंघ 2, कम्युनिस्ट 1, निर्दलीय 9 |
| बिहार | 41 | झारखंड पार्टी 6, छोटानागपुर जनता पार्टी 3, प्रजा सोशलिस्ट 2, निर्दलीय 1 |
| बंबई | 38 | प्रजा सोशलिस्ट 5, शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन 5, कम्युनिस्ट 4, किसान-मजदूर पार्टी 4, जनसंघ 2, निर्दलीय 8 |
| आंध्र प्रदेश | 37 | कम्युनिस्ट 2, पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट 2, निर्दलीय 2 |
| मद्रास | 31 | कम्युनिस्ट 2, निर्दलीय 8 |
| पश्चिम बंगाल | 23 | कम्युनिस्ट 6, प्रजा सोशलिस्ट 2, फॉरवर्ड ब्लॉक 2, निर्दलीय 3 |
| मध्य प्रदेश | 35 | हिंदू महासभा 1 |
| केरल | 6 | कम्युनिस्ट 9, प्रजा सोशलिस्ट 1, निर्दलीय 2 |
| उड़ीसा | 7 | गणतंत्र परिषद 7, प्रजा सोशलिस्ट 2, कम्युनिस्ट 1, निर्दलीय 3 |
| पंजाब | 21 | कम्युनिस्ट 1 |

## 5. दूसरे आम चुनाव की पाँच महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ

## केरल में कम्युनिस्ट पार्टी का उभार

केरल की 18 लोकसभा सीटों में कम्युनिस्ट पार्टी को नौ और कांग्रेस को छह सीटें मिलीं। इसी समय हुए विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी ने 126 में से 60 सीटें जीतीं। पाँच निर्दलीय सदस्यों के समर्थन से ई. एम. एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में 5 अप्रैल 1957 को सरकार बनी।

इसे दुनिया की शुरुआती लोकतांत्रिक चुनावों से बनी कम्युनिस्ट सरकारों में गिना जाता है।

## प्रजा सोशलिस्ट पार्टी राष्ट्रीय विपक्ष के रूप में

1952 के बाद समाजवादी धारा के पुनर्गठन से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी बनी। उसे 1957 में 10.41 प्रतिशत मत मिले। यह कम्युनिस्ट पार्टी के 8.92 प्रतिशत से अधिक था, लेकिन प्रजा सोशलिस्ट पार्टी 19 सीटों पर सिमट गई, जबकि कम्युनिस्ट पार्टी ने 27 सीटें जीत लीं।

## भारतीय जनसंघ का विस्तार

भारतीय जनसंघ ने 1952 में तीन सीटें और 3.06 प्रतिशत मत प्राप्त किए थे। 1957 में उसकी सीटें चार और मत प्रतिशत बढ़कर 5.97 हो गया। सीटों के हिसाब से वृद्धि सीमित थी, लेकिन राष्ट्रीय मत प्रतिशत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

## डॉ. आंबेडकर के निधन के बाद पहला चुनाव

6 दिसंबर 1956 को डॉ. भीमराव आंबेडकर का निधन हो गया था। उनके राजनीतिक आंदोलन से जुड़ी शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन ने 1957 में छह लोकसभा सीटें जीतीं। यह दलित राजनीति के पुनर्गठन का महत्वपूर्ण दौर था।

## पहली बार व्यापक भाषाई पुनर्गठन के बाद चुनाव

1956 के राज्य पुनर्गठन के बाद यह पहला लोकसभा आम चुनाव था। विशेष रूप से बंबई राज्य में मराठी और गुजराती भाषाई क्षेत्रों को लेकर राजनीतिक संघर्ष जारी था। आगे चलकर 1960 में महाराष्ट्र और गुजरात दो अलग राज्य बने।

## 6. 1952 बनाम 1957 : क्या बदला?

| महत्वपूर्ण आँकड़ा | 1951–52 | 1957 |
| --- | --- | --- |
| निर्वाचित लोकसभा सीटें | 489 | 494 |
| कांग्रेस की सीटें | 364 | 371 |
| कांग्रेस का वोट शेयर | 44.99% | 47.78% |
| कम्युनिस्ट पार्टी की सीटें | 16 | 27 |
| कम्युनिस्ट पार्टी का वोट शेयर | 3.29% | 8.92% |
| जनसंघ की सीटें | 3 | 4 |
| जनसंघ का वोट शेयर | 3.06% | 5.97% |
| निर्दलीय सांसद | 37 | 42 |

1957 के चुनाव ने तीन राजनीतिक प्रवृत्तियाँ स्थापित कीं। कांग्रेस का राष्ट्रीय प्रभुत्व कायम रहा, कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख संसदीय विपक्ष के रूप में मजबूत हुई और क्षेत्रीय राजनीतिक अस्मिताओं का प्रतिनिधित्व करने वाले दलों ने कई राज्यों में चुनावी प्रभाव दिखाया।

## 7. आधिकारिक ऐतिहासिक स्रोत

इस चुनाव के मूल दस्तावेज निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।

- [Second General Elections, Vol. I (1957) — निर्वाचन आयोग](https://www.eci.gov.in/eci-publication/)

- [1957 लोकसभा चुनाव की संपूर्ण सांख्यिकीय रिपोर्ट](https://www.eci.gov.in/statistical-reports)

- [निर्वाचन आयोग : ऐतिहासिक चुनावी आँकड़े](https://www.eci.gov.in/eci-backend/public/api/download?url=LMAhAK6sOPBp%2FNFF0iRfXbEB1EVSLT41NNLRjYNJJP1KivrUxbfqkDatmHy12e%2FzVx8fLfn2ReU7TfrqYobgIp3FkHJEH03HdUqVNGXd%2BrAoFcaULKPkZEzGFJFSyEuIfH2yBBtIlt8LEiiH3eBODI3oWxlqGvTyGsxE%2Bvy01mIWg%2FDAyOIXSdAs9qnmsPCahtDHL6KmVVf5hrvMeLSKAg%3D%3D)

**ऐतिहासिक निष्कर्ष:** 1957 का चुनाव केवल नेहरू और कांग्रेस की दूसरी विजय नहीं था। यह उस राजनीतिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव भी था जिसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, समाजवादी आंदोलन, जनसंघ, दलित राजनीति और क्षेत्रीय दलों ने आने वाले दशकों की बहुदलीय राजनीति के लिए अपनी जमीन तैयार की।

इस तरह 1951–52 और 1957 के दोनों चुनावों का तुलनात्मक अध्ययन 1962 और विशेष रूप से 1967 के चुनावों में होने वाले राजनीतिक परिवर्तनों को समझने की बुनियाद प्रदान करता है।

मूल वेबसाइट: https://omkarchaudhary.com/research/lok-sabha-elections-1951-2024/election-2